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कक्षा श्रवण से हो जाती हैं मानव मन की कुसंगतियां दूर
Updated Sat, 26 May 2018 12:36 AM IST
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साढ़ौली कदीम। कथा सुनने मात्र से मानव के अनेक कष्टों का निवारण हो जाता है तथा मानव मन की अनेक कुसंगतियां स्वत: दूर जाने को बाध्य हो जाती हैं।
कम्बोहमजरा के सिद्धपीठ हनुमान मंदिर में चल रही भागवत कथा में कथावाचिका पूज्य मीरा समदर्शनी ने कहा कि कथा सुनने से मानव को पुण्य प्राप्त होता है। भगवान की शरण लेकर ही मानव जीवन सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि मानव को दूसरों को कभी पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए बल्कि दूसरों की पीड़ा को दूर करने का हर संभव प्रयत्न करना चाहिए। मानव को अहंकार से हमेशा दूर रहा चाहिए अहंकार भगवान से दूरी बना देता है। उन्होंने श्री कृष्ण भगवान के जन्म के समय कारागार में अर्द्धरात्रि में भगवान की लीला का गुणगान करते हुए कहा कि सभी पहरेदार सम्मोहन में आ गए तब देवकी के परामर्श के अनुसार बालक को टोकरी में रख यमुना पार गोकुल बालिका को बदले में लाया गया। यमुना का उफान भगवान श्री कृष्ण के चरण स्पर्श कर शांत हो गया। कथा के अनेक सुंदर प्रसंग सुनते हुए श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कथा वाचन में पंडित कृष्णकांत मिश्रा, इंद्रपाल सिंह, केशव, महंत संतोष दास, गोपी सिंह आदि का सहयोग रहा।
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कम्बोहमजरा के सिद्धपीठ हनुमान मंदिर में चल रही भागवत कथा में कथावाचिका पूज्य मीरा समदर्शनी ने कहा कि कथा सुनने से मानव को पुण्य प्राप्त होता है। भगवान की शरण लेकर ही मानव जीवन सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि मानव को दूसरों को कभी पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए बल्कि दूसरों की पीड़ा को दूर करने का हर संभव प्रयत्न करना चाहिए। मानव को अहंकार से हमेशा दूर रहा चाहिए अहंकार भगवान से दूरी बना देता है। उन्होंने श्री कृष्ण भगवान के जन्म के समय कारागार में अर्द्धरात्रि में भगवान की लीला का गुणगान करते हुए कहा कि सभी पहरेदार सम्मोहन में आ गए तब देवकी के परामर्श के अनुसार बालक को टोकरी में रख यमुना पार गोकुल बालिका को बदले में लाया गया। यमुना का उफान भगवान श्री कृष्ण के चरण स्पर्श कर शांत हो गया। कथा के अनेक सुंदर प्रसंग सुनते हुए श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कथा वाचन में पंडित कृष्णकांत मिश्रा, इंद्रपाल सिंह, केशव, महंत संतोष दास, गोपी सिंह आदि का सहयोग रहा।