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सीरिया का नरसंहार इंसानियत को शर्मसार करना वाला: आजमी
Updated Fri, 09 Mar 2018 12:32 AM IST
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सीरिया का नरसंहार इंसानियत को शर्मसार करने वाला : आजमी
देवबंद(सहारनपुर)। राब्ता-ए-आलमी इस्लामी के सदस्य व दारुल उलूम के पूर्व उस्ताद कारी अबुल हसन आजमी ने सीरिया में हो रहे नरसंहार को इंसानियत को शर्मसार करने वाला बताते हुए मुस्लिम बाहुल्य देशों की खामोशी पर चिंता जताते हुए भारत सरकार से सीरिया के मजलूम लोगों की मदद के लिए आगे आने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को जारी बयान में कारी अबुल हसन आजमी ने कहा कि सीरिया के गोता शहर में हो रही बमबारी ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। वहां के मासूम नागरिक इन हमलों के शिकार हो रहे हैं। जो लोग इन हमलों में जिंदा बचे हुए हैं, उनके सामने खाने पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की समस्या गहराने लगी है। ऐसे हालात में दुनिया के मुस्लिम बाहुल्य देशों की खामोशी वास्तव में अफसोसनाक है। उन्होंने कहा कि भारत की हमेशा से मजलूमों व मजबूरों की मदद करने की परंपरा रही है। इसलिए भारत सरकार को परंपरा पर कायम रहते हुए इस मानव त्रासदी को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाते हुए सीरिया के मजलूमों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। साथ ही कहा कि तमाम मुसलमानों को चाहिए कि वह सीरियाई नागरिकों के लिए अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करें। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है।
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देवबंद(सहारनपुर)। राब्ता-ए-आलमी इस्लामी के सदस्य व दारुल उलूम के पूर्व उस्ताद कारी अबुल हसन आजमी ने सीरिया में हो रहे नरसंहार को इंसानियत को शर्मसार करने वाला बताते हुए मुस्लिम बाहुल्य देशों की खामोशी पर चिंता जताते हुए भारत सरकार से सीरिया के मजलूम लोगों की मदद के लिए आगे आने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को जारी बयान में कारी अबुल हसन आजमी ने कहा कि सीरिया के गोता शहर में हो रही बमबारी ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। वहां के मासूम नागरिक इन हमलों के शिकार हो रहे हैं। जो लोग इन हमलों में जिंदा बचे हुए हैं, उनके सामने खाने पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की समस्या गहराने लगी है। ऐसे हालात में दुनिया के मुस्लिम बाहुल्य देशों की खामोशी वास्तव में अफसोसनाक है। उन्होंने कहा कि भारत की हमेशा से मजलूमों व मजबूरों की मदद करने की परंपरा रही है। इसलिए भारत सरकार को परंपरा पर कायम रहते हुए इस मानव त्रासदी को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाते हुए सीरिया के मजलूमों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। साथ ही कहा कि तमाम मुसलमानों को चाहिए कि वह सीरियाई नागरिकों के लिए अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करें। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है।
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