{"_id":"5a78af104f1c1b91268b8895","slug":"101517858576-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आम के हरे पेड़ों के अवैध कटान पर रोक की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आम के हरे पेड़ों के अवैध कटान पर रोक की मांग
Updated Tue, 06 Feb 2018 12:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेहट (सहारनपुर)। युवा जनसेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने बेहट फल पट्टी क्षेत्र में आम के हरे-भरे पेड़ों के अवैध रूप से किए जा रहे कटान पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग को लेकर एसडीएम को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को दिया है। उनका कहना है कि यदि इसी तेजी से कटान होता रहा तो एक दिन फल पट्टी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
सोमवार को युवा जनसेवा समिति के कार्यकर्ता तहसील पहुंचे और एसडीएम के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार हर्ष चावला को सौंपा। ज्ञापन में समिति कार्यकर्ताओं का कहना है कि बेहट फल पट्टी क्षेत्र घोषित है, जिसमें आम की बड़े पैमाने पर पैदावार होती है। यहां से विदेशों में आम का एक्सपोर्ट किया जाता है। फल पट्टी से बेहट की विदेशों में अलग पहचान है, लेकिन पिछले एक दशक से वन एवं उद्यान विभाग की मिलीभगत के चलते आम के हरे-भरे पेड़ों का बड़े पैमाने पर कटान किया जा रहा है। इससे जहां फल पट्टी का अस्तित्व खतरे में है, वहीं पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। यदि इसी स्तर पर पेड़ों का कटान किया जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब फल पट्टी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। उनका यह भी कहना था कि पहले फोरलेन निर्माण के लिए दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे किनारे से सभी पेड़ों का कटान किए जाने से यहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच चुका है। ऐसे में फल पट्टी क्षेत्र में हरे-भरे फलदार पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। ज्ञापन देने वालों में मेहरबान, सद्दाम कुरैशी, जाबिर कुरैशी, मो. राजा खान, अरुण गौतम, नादिर शेख, आसिफ शेख, शेख परवेज आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
सोमवार को युवा जनसेवा समिति के कार्यकर्ता तहसील पहुंचे और एसडीएम के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार हर्ष चावला को सौंपा। ज्ञापन में समिति कार्यकर्ताओं का कहना है कि बेहट फल पट्टी क्षेत्र घोषित है, जिसमें आम की बड़े पैमाने पर पैदावार होती है। यहां से विदेशों में आम का एक्सपोर्ट किया जाता है। फल पट्टी से बेहट की विदेशों में अलग पहचान है, लेकिन पिछले एक दशक से वन एवं उद्यान विभाग की मिलीभगत के चलते आम के हरे-भरे पेड़ों का बड़े पैमाने पर कटान किया जा रहा है। इससे जहां फल पट्टी का अस्तित्व खतरे में है, वहीं पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। यदि इसी स्तर पर पेड़ों का कटान किया जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब फल पट्टी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। उनका यह भी कहना था कि पहले फोरलेन निर्माण के लिए दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे किनारे से सभी पेड़ों का कटान किए जाने से यहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच चुका है। ऐसे में फल पट्टी क्षेत्र में हरे-भरे फलदार पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। ज्ञापन देने वालों में मेहरबान, सद्दाम कुरैशी, जाबिर कुरैशी, मो. राजा खान, अरुण गौतम, नादिर शेख, आसिफ शेख, शेख परवेज आदि शामिल रहे।
विज्ञापन