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दारुल उलूम और तब्लीगी जमात के बीच बढ़ती जा रही दूरियां...
Updated Thu, 01 Feb 2018 12:17 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना साद के गैर जिम्मेदाराना बयानों को लेकर विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम व तब्लीगी जमात के मरकज के जिम्मेदारों के बीच लगातार दूरियां बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी की ओर से जारी हुए बयान में कहा कि गया है कि मौलाना साद गलती मानने के बावजूद इस प्रकार के बयान दे रहे हैं कि जिससे उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन में स्थित तब्लीगी जमात के मरकज (एक गुट) के अमीर मौलाना साद ने कुछ दिनों पूर्व हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को लेकर गलत बयानबाजी की थी जिसको लेकर विभिन्न देशों के मुसलमानों में बेचैनी पैदा हो गई थी। इतना ही नहीं मौलाना साद के बयान को लेकर देश विदेश में बैठे लोग लगातार दारुल उलूम से उसका रुख जानने का प्रयास कर रहे हैं। बुधवार को मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि गलती मानने के बाद भी मौलाना साद के कुछ इस तरह के बयान सामने आ रहे हैं जिसमें वह जमात के काम को लेकर शरीयत का गलत उदाहरण दे रहे हैं। जिसकी वजह से दारुल उलूम ही नहीं तमाम उलमा की जमात उनके बयानों को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि अकाबिरों की विचारधारा से जरा भी हटना बड़े नुकसान का सबब बन सकता है। इसलिए मौलाना साद को चाहिए कि वे अपने विचार और सोच को छोड़कर अकाबिरों के बताए रास्ते पर चलें। मौलाना बनारसी ने यह भी स्पष्ट किया कि तब्लीगी जमात के अंदरूनी झगड़ों से उनका कोई लेना देना नहीं है, लेकिन कौम की सही रहनुमाई के लिए दारुल उलूम लगातार अपनी बात रखता रहेगा। जो उसकी जिम्मेदारी है।
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दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन में स्थित तब्लीगी जमात के मरकज (एक गुट) के अमीर मौलाना साद ने कुछ दिनों पूर्व हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को लेकर गलत बयानबाजी की थी जिसको लेकर विभिन्न देशों के मुसलमानों में बेचैनी पैदा हो गई थी। इतना ही नहीं मौलाना साद के बयान को लेकर देश विदेश में बैठे लोग लगातार दारुल उलूम से उसका रुख जानने का प्रयास कर रहे हैं। बुधवार को मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि गलती मानने के बाद भी मौलाना साद के कुछ इस तरह के बयान सामने आ रहे हैं जिसमें वह जमात के काम को लेकर शरीयत का गलत उदाहरण दे रहे हैं। जिसकी वजह से दारुल उलूम ही नहीं तमाम उलमा की जमात उनके बयानों को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि अकाबिरों की विचारधारा से जरा भी हटना बड़े नुकसान का सबब बन सकता है। इसलिए मौलाना साद को चाहिए कि वे अपने विचार और सोच को छोड़कर अकाबिरों के बताए रास्ते पर चलें। मौलाना बनारसी ने यह भी स्पष्ट किया कि तब्लीगी जमात के अंदरूनी झगड़ों से उनका कोई लेना देना नहीं है, लेकिन कौम की सही रहनुमाई के लिए दारुल उलूम लगातार अपनी बात रखता रहेगा। जो उसकी जिम्मेदारी है।
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