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भीम आर्मी में बन सकती है टकराव की स्थिति
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:51 PM IST
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सहारनपुर। जिले में हिंसा और बवाल के मामले में आरोपी भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर के जेल चले जाने के बाद अब नेतृत्व को लेकर टकराव की स्थिति बनती जा रही है। प्रदेश कार्यकारिणी के भंग होने के बाद भीम आर्मी की कार्यकारिणी के नए गठन की प्रक्रिया चल रही है। जिसको लेकर आपसी मनमुटाव बढ़ रहा है।
सहारनपुर बवाल में हिंसा की आरोपी भीम आर्मी में नेतृत्व को लेकर अंतर्द्वंद्व छिड़ गया है। चंद्रशेखर एवं जिलाध्यक्ष कमल वालिया के जेल जाने के बाद भीम आर्मी में हालात बदल गए हैं। 18 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में हुई जूतम-पैजार के बाद तो आपसी विवाद सामने आ गया है। कुछ लोगों ने भीम आर्मी को चंद्रशेखर और उसके परिवार मात्र का संगठन बता दिया। यही नहीं संगठन से ही जुड़े लोगों ने भीम आर्मी के नाम से चंदा एवं वसूली करना शुरू कर दिया। यह बात महक सिंह ने भी अपने जारी बयान में स्वीकार की। जिससे भीम आर्मी की अंतर्कलह सामने आ गई है। संगठन से ही जुड़े हरियाणा के सतपाल तंवर ने तो खुलकर उगाही और एकत्रित किए गए धन के बंदरबांट करने के आरोप लगा दिए। जिस पर चंद्रशेखर ने उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी महक सिंह के माध्यम से पूरी कार्यकारिणी को ही भंग करा दिया है।
अब नेतृत्व को लेकर टकराव की स्थिति बनती जा रही है। बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर के जेल जाने के बाद भीम आर्मी पर कब्जा करने की होड़ शुरू हो गई है। चंद्रशेखर के परिजनों के हस्तक्षेप न करने के निर्णय के बाद गाजियाबाद, दिल्ली, हरियाणा समेत कई जगह के नेता पूरे देश में मशहूर हो चुके इस संगठन पर अधिकार करने की फिराक में लगे हुए हैं और चंद्रशेखर के जेल में रहने का लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए पदाधिकारियों को अपने पक्ष में करने की होड़ लगी हुई है। हालांकि यह घोषणा हो चुकी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद विनय रतन सिंह के पास ही रहेगा, लेकिन अन्य पदों को लेकर घमासान मच रहा है। सूत्रों के अनुसार भीम आर्मी की नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जेल में ही रहकर चंद्रशेखर भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन को इसके लिए दिशा निर्देश दे रहा है। हालांकि लोग मान रहे हैं कि चंद्रशेखर की शीघ्र रिहाई कराने के प्रयास किए जा रहे हैं और बाहर आने के बाद ही चंद्रशेखर नई कार्यकारिणी की घोषणा करेगा।
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सहारनपुर बवाल में हिंसा की आरोपी भीम आर्मी में नेतृत्व को लेकर अंतर्द्वंद्व छिड़ गया है। चंद्रशेखर एवं जिलाध्यक्ष कमल वालिया के जेल जाने के बाद भीम आर्मी में हालात बदल गए हैं। 18 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में हुई जूतम-पैजार के बाद तो आपसी विवाद सामने आ गया है। कुछ लोगों ने भीम आर्मी को चंद्रशेखर और उसके परिवार मात्र का संगठन बता दिया। यही नहीं संगठन से ही जुड़े लोगों ने भीम आर्मी के नाम से चंदा एवं वसूली करना शुरू कर दिया। यह बात महक सिंह ने भी अपने जारी बयान में स्वीकार की। जिससे भीम आर्मी की अंतर्कलह सामने आ गई है। संगठन से ही जुड़े हरियाणा के सतपाल तंवर ने तो खुलकर उगाही और एकत्रित किए गए धन के बंदरबांट करने के आरोप लगा दिए। जिस पर चंद्रशेखर ने उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी महक सिंह के माध्यम से पूरी कार्यकारिणी को ही भंग करा दिया है।
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अब नेतृत्व को लेकर टकराव की स्थिति बनती जा रही है। बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर के जेल जाने के बाद भीम आर्मी पर कब्जा करने की होड़ शुरू हो गई है। चंद्रशेखर के परिजनों के हस्तक्षेप न करने के निर्णय के बाद गाजियाबाद, दिल्ली, हरियाणा समेत कई जगह के नेता पूरे देश में मशहूर हो चुके इस संगठन पर अधिकार करने की फिराक में लगे हुए हैं और चंद्रशेखर के जेल में रहने का लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए पदाधिकारियों को अपने पक्ष में करने की होड़ लगी हुई है। हालांकि यह घोषणा हो चुकी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद विनय रतन सिंह के पास ही रहेगा, लेकिन अन्य पदों को लेकर घमासान मच रहा है। सूत्रों के अनुसार भीम आर्मी की नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जेल में ही रहकर चंद्रशेखर भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन को इसके लिए दिशा निर्देश दे रहा है। हालांकि लोग मान रहे हैं कि चंद्रशेखर की शीघ्र रिहाई कराने के प्रयास किए जा रहे हैं और बाहर आने के बाद ही चंद्रशेखर नई कार्यकारिणी की घोषणा करेगा।
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