{"_id":"5939a6a24f1c1b95708b4581","slug":"101496950434-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हराम रिजक से दूर रहें रोजेदार : गोरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हराम रिजक से दूर रहें रोजेदार : गोरा
Updated Fri, 09 Jun 2017 01:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हराम रिजक से दूर रहें रोजेदार : गोरा
देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत दावातुल मुसलमीन के संरक्षक एवं आलिम कारी इसहाक गोरा ने रोजा इफ्तारी पर रोशनी डालते हुए कहा कि रोजेदार इस बात का ख्याल रखें कि शरीयत ने रमजान में रोजेदारों के खाने के लिए इफ्तार में रिज्क-ए-हलाल और कम खाने की अहमियत बताई है।
मोहल्ला अबुलमाली में कारी इसहाक गोरा ने एक पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि जिस प्रकार जहर शरीर के लिए खतरनाक है, उसी तरह हराम रिजक भी दीन के लिए खतरनाक है। यहां तक हलाल रिजक भी कम खाना चाहिए। इसकी मिसाल एक दवा जैसी है जिसकी कम मात्रा फायदेमंद और अधिक मात्रा खतरनाक होती है। रोजे का मकसद यह है कि हलाल खाना भी कम खाया जाए ताकि फायदेमंद रहे। उन्होंने कहा कि अल्लाह के नजदीक कोई भी चीज इतनी बुरी नहीं जितना बुरा वो पेट है जो हराम रिजक से भर दिया गया हो। रोजे का असली मकसद यह भी है कि पेट खाली रहे और नफ की ख्वाहिशात खत्म हो जाए।
कारी इसहाक ने कहा कि इफ्तार के समय लोग आमतौर पर इधर-उधर के कामों में मशगूल हो जाते हैं जबकि महिलाएं इफ्तार का सामान तैयार करने और पुरुष बाजारों की चहल-पहल का इजाफा करने के लिए निकल जाते हैं जो बिल्कुल गलत है। एक हदीस बयान करते हुए कारी इसहाक गोरा ने कहा कि हजरत मोहम्मद सल्ललाहुअलैहिवसल्लम ने इरशाद फरमाया कि रोजेदार की दुआ रद नहीं की जाती। इसी बात को दूसरे लफ्जों में भी बयान किया गया है कि इफ्तार के समय हर रोजेदार की दुआ कबूल की जाती है। रोजेदार को चाहिए कि वह इफ्तार के समय बिना वजह के कामों में वक्त गुजारने के बजाए दुआ में मशगूल हो जाएं। उन्होंने कहा कि रमजान के मुकद्दस महीने में यह मकाम केवल 30 दिनों के लिए मिलता है। इसलिए रोजेदारों को चाहिए कि वह इफ्तार के समय खुद और अपने बीवी बच्चों समेत इफ्तार के पहले दस्तरखान पर इकट्ठा हो जाएं और अल्लाह से भरे मन से दुआ मांगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत दावातुल मुसलमीन के संरक्षक एवं आलिम कारी इसहाक गोरा ने रोजा इफ्तारी पर रोशनी डालते हुए कहा कि रोजेदार इस बात का ख्याल रखें कि शरीयत ने रमजान में रोजेदारों के खाने के लिए इफ्तार में रिज्क-ए-हलाल और कम खाने की अहमियत बताई है।
मोहल्ला अबुलमाली में कारी इसहाक गोरा ने एक पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि जिस प्रकार जहर शरीर के लिए खतरनाक है, उसी तरह हराम रिजक भी दीन के लिए खतरनाक है। यहां तक हलाल रिजक भी कम खाना चाहिए। इसकी मिसाल एक दवा जैसी है जिसकी कम मात्रा फायदेमंद और अधिक मात्रा खतरनाक होती है। रोजे का मकसद यह है कि हलाल खाना भी कम खाया जाए ताकि फायदेमंद रहे। उन्होंने कहा कि अल्लाह के नजदीक कोई भी चीज इतनी बुरी नहीं जितना बुरा वो पेट है जो हराम रिजक से भर दिया गया हो। रोजे का असली मकसद यह भी है कि पेट खाली रहे और नफ की ख्वाहिशात खत्म हो जाए।
विज्ञापन
कारी इसहाक ने कहा कि इफ्तार के समय लोग आमतौर पर इधर-उधर के कामों में मशगूल हो जाते हैं जबकि महिलाएं इफ्तार का सामान तैयार करने और पुरुष बाजारों की चहल-पहल का इजाफा करने के लिए निकल जाते हैं जो बिल्कुल गलत है। एक हदीस बयान करते हुए कारी इसहाक गोरा ने कहा कि हजरत मोहम्मद सल्ललाहुअलैहिवसल्लम ने इरशाद फरमाया कि रोजेदार की दुआ रद नहीं की जाती। इसी बात को दूसरे लफ्जों में भी बयान किया गया है कि इफ्तार के समय हर रोजेदार की दुआ कबूल की जाती है। रोजेदार को चाहिए कि वह इफ्तार के समय बिना वजह के कामों में वक्त गुजारने के बजाए दुआ में मशगूल हो जाएं। उन्होंने कहा कि रमजान के मुकद्दस महीने में यह मकाम केवल 30 दिनों के लिए मिलता है। इसलिए रोजेदारों को चाहिए कि वह इफ्तार के समय खुद और अपने बीवी बच्चों समेत इफ्तार के पहले दस्तरखान पर इकट्ठा हो जाएं और अल्लाह से भरे मन से दुआ मांगे।
विज्ञापन