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ब्लैक फंगस को लेकर जिले में बरती जा रही है सतर्कता
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रामपुर। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच ब्लैक फंगस ने अपनी दस्तक दे दी है। दुर्लभ किस्म की ब्लैक फंगस बीमारी कोरोना से उबरे मरीजों में तेजी से पनप रही है। हालांकि रामपुर में ब्लैक फंगस के संक्रमण का मामला सामने नहीं आया है। फिर भी इसको लेकर सतर्कता बरती जा रही है। ब्लैक फंगस संक्रमित मरीजों में सिर में दर्द, आंखों का लाल होना, आंखों में पानी आना और आंखों का मूवमेंट बंद हो जाने जैसे लक्षण सामने आते हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
कई राज्यों के बाद उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ब्लैक फंगस के सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक स्टेरायड, एंटी बायोटिक दवाओं के कारण व अधिक समय तक इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) व हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में रहने से म्यूकारमाइकोसिस (काली फफूंदी या ब्लैक फंगस) कोरोना संक्रमितों की आंखों पर हमला कर रहा है। यह समस्या कोरोना से ठीक होने के बाद भी आ रही है।
अगर शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो तो ये जानलेवा साबित हो जाती है। यह बीमारी मधुमेह के मरीजों को ज्यादा चपेट में लेती है। इस रोग में आंख की नसों के पास फंगस इंफेक्शन जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटिनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। इसकी वजह से आंखों की रोशनी जाने की आशंका रहती है।
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आंख, नाक के रास्ते यह फंगस दिमाग तक पहुंचता है और इस दौरान रास्ते में आने वाली हड्डी और त्वचा को नष्ट कर देता है। डॉक्टर का कहना है कि जो मरीज बहुत ज्यादा दिन तक ऑक्सीजन और वेंटीलेटर के सपोर्ट पर रहते हैं और जिनका मधुमेह का स्तर अनियंत्रित रहता है, उन्हें इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका है। सीएमओ डॉ. संजीव यादव का कहना है कि रामपुर में ब्लैक फंगस का मामला अभी तक सामने नहीं आया है।
हायर सेंटर पर ही संभव है इलाज
ब्लैक फंगस की चपेट में आने वाले लोगों का इलाज हायर सेंटर पर ही संभव है। क्योंकि इसके लिए कंबाइंड टाइप इंस्टीट्यूट की जरूरत होती है। इसके लिए ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ और सर्जन के संयुक्त इलाज की आवश्यकता होती है।
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कई राज्यों के बाद उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ब्लैक फंगस के सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक स्टेरायड, एंटी बायोटिक दवाओं के कारण व अधिक समय तक इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) व हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में रहने से म्यूकारमाइकोसिस (काली फफूंदी या ब्लैक फंगस) कोरोना संक्रमितों की आंखों पर हमला कर रहा है। यह समस्या कोरोना से ठीक होने के बाद भी आ रही है।
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अगर शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो तो ये जानलेवा साबित हो जाती है। यह बीमारी मधुमेह के मरीजों को ज्यादा चपेट में लेती है। इस रोग में आंख की नसों के पास फंगस इंफेक्शन जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटिनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। इसकी वजह से आंखों की रोशनी जाने की आशंका रहती है।
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आंख, नाक के रास्ते यह फंगस दिमाग तक पहुंचता है और इस दौरान रास्ते में आने वाली हड्डी और त्वचा को नष्ट कर देता है। डॉक्टर का कहना है कि जो मरीज बहुत ज्यादा दिन तक ऑक्सीजन और वेंटीलेटर के सपोर्ट पर रहते हैं और जिनका मधुमेह का स्तर अनियंत्रित रहता है, उन्हें इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका है। सीएमओ डॉ. संजीव यादव का कहना है कि रामपुर में ब्लैक फंगस का मामला अभी तक सामने नहीं आया है।
हायर सेंटर पर ही संभव है इलाज
ब्लैक फंगस की चपेट में आने वाले लोगों का इलाज हायर सेंटर पर ही संभव है। क्योंकि इसके लिए कंबाइंड टाइप इंस्टीट्यूट की जरूरत होती है। इसके लिए ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ और सर्जन के संयुक्त इलाज की आवश्यकता होती है।