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यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है और दान से कमाया हुआ धन
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रामपुर। आर्य समाज ज्वाला नगर का 23 वां वेद महोत्सव 11 कुंडीय वैदिक महायज्ञ प्रारंभ किया गया। यज्ञ आर्य समाज विद्वान अंतर्राष्ट्रीय वैदिक धर्म प्रचारक महावीर सिंह मुमुक्षु ने वैदिक विधि विधान से यज्ञ संपन्न कराया गया। यज्ञ के साथ-साथ वैदिक मंत्रों के अर्थों का भी वर्णन करते हुए यज्ञ के महत्व और वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला।
शुक्रवार को शुरु हुए समारोह में उन्होंने कहा कि यज्ञ मनुष्य का मुख्य कर्म है। यज्ञ कर्म के बिना जीवन सफल नहीं हो सकता। अपना जीवन सफल करना है तो यज्ञ अवश्य करना होगा। यज्ञ से वातावरण की शुद्धि होती है। उन्होंने कहा कि दान से कमाया हुआ धन शुद्ध होता है। सत्संग और संगतिकरण से बुद्धि शुद्ध होती है। इसलिए मानव जीवन के तीन मुख्य कर्म, यज्ञ दान और सत्संग अथवा संगतिकरण अवश्य करते रहना चाहिए। बिजनौर से पधारे पंडित नरेश दत्त आर्य भजनोपदेशक ने कहा कि परमपिता परमात्मा को कभी नहीं भूलना चाहिए। क्योंकि परमपिता परमात्मा सुख अथवा दुख जो भी देता है वह अपने पास से कुछ नहीं देता बल्कि आपके कर्मों का फल ही आपको मिलता है। बदायूं से आईं अलका आर्य ने महिलाओं से अपनी शक्ति को पहचान कर आडंबर, ढोंग,पाखंडों से निकलकर ज्ञान के रास्ते पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया। अध्यक्षता भगवत स्वरूप आर्य व संचालन ओमवीर सिंह वैदिक ने किया। हरिदत्त कर्मठ, राजवीर आर्य, सत्य प्रकाश आर्य, गिरेंद्र सिंह आर्य, भारत सिंह आर्य, अमन सिंह आर्य, वेद प्रकाश आर्य, भजन लाल आर्य, सुरेश कुमार श्रीवास्तव एवं श्रीमती चंद्रलेखा आर्या, गायत्री आर्य, मुन्नी देवी आर्या, ललिता आर्य, शिवालिका आर्या, गीता देवी आर्या, चंद्रकांता आर्य आदि मौजूद रहे।
दूसरी ओर आर्य समाज पट्टी टोला के 123 वें वार्षिक उत्सव के पांचवें व अंतिम दिवस के कार्यक्रम का प्रारंभ ब्रह्म यज्ञ एवं देव यज्ञ से हुआ। जिसमें आर्य समाज के प्रधान कमल कुमार आर्य, राजीव मांगलिक ,सुभाष चंद्र रस्तोगी एवं कौशल्या नंदन यजमान के रूप में विद्यमान रहे। यज्ञ में विश्व कल्याण एवं शांति के लिए आहुति दी गई। पुरोहित बृजेश कुमार शास्त्री ने यज्ञ संपन्न कराया।
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शुक्रवार को शुरु हुए समारोह में उन्होंने कहा कि यज्ञ मनुष्य का मुख्य कर्म है। यज्ञ कर्म के बिना जीवन सफल नहीं हो सकता। अपना जीवन सफल करना है तो यज्ञ अवश्य करना होगा। यज्ञ से वातावरण की शुद्धि होती है। उन्होंने कहा कि दान से कमाया हुआ धन शुद्ध होता है। सत्संग और संगतिकरण से बुद्धि शुद्ध होती है। इसलिए मानव जीवन के तीन मुख्य कर्म, यज्ञ दान और सत्संग अथवा संगतिकरण अवश्य करते रहना चाहिए। बिजनौर से पधारे पंडित नरेश दत्त आर्य भजनोपदेशक ने कहा कि परमपिता परमात्मा को कभी नहीं भूलना चाहिए। क्योंकि परमपिता परमात्मा सुख अथवा दुख जो भी देता है वह अपने पास से कुछ नहीं देता बल्कि आपके कर्मों का फल ही आपको मिलता है। बदायूं से आईं अलका आर्य ने महिलाओं से अपनी शक्ति को पहचान कर आडंबर, ढोंग,पाखंडों से निकलकर ज्ञान के रास्ते पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया। अध्यक्षता भगवत स्वरूप आर्य व संचालन ओमवीर सिंह वैदिक ने किया। हरिदत्त कर्मठ, राजवीर आर्य, सत्य प्रकाश आर्य, गिरेंद्र सिंह आर्य, भारत सिंह आर्य, अमन सिंह आर्य, वेद प्रकाश आर्य, भजन लाल आर्य, सुरेश कुमार श्रीवास्तव एवं श्रीमती चंद्रलेखा आर्या, गायत्री आर्य, मुन्नी देवी आर्या, ललिता आर्य, शिवालिका आर्या, गीता देवी आर्या, चंद्रकांता आर्य आदि मौजूद रहे।
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दूसरी ओर आर्य समाज पट्टी टोला के 123 वें वार्षिक उत्सव के पांचवें व अंतिम दिवस के कार्यक्रम का प्रारंभ ब्रह्म यज्ञ एवं देव यज्ञ से हुआ। जिसमें आर्य समाज के प्रधान कमल कुमार आर्य, राजीव मांगलिक ,सुभाष चंद्र रस्तोगी एवं कौशल्या नंदन यजमान के रूप में विद्यमान रहे। यज्ञ में विश्व कल्याण एवं शांति के लिए आहुति दी गई। पुरोहित बृजेश कुमार शास्त्री ने यज्ञ संपन्न कराया।
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