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इक्कीस घंटे तक सफर तय करने के बाद लवीव पहुंची शजा
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रामपुर। यूक्रेन के खारकीव में फंसी रामपुर की शजा उस्मान ट्रेन से 21 घंटे का सफर तय करने के बाद आखिरकार लवीव तक पहुंच ही गई। लवीव से उन्होंने यूक्रेन-पोलैंड बॉर्डर जाने के लिए टैक्सी पकड़ ली है। संभवतया रात या सुबह तक वह बॉर्डर तक पहुंच जाएं। जबकि, आशीष बस से करीब 18.30 घंटे का सफर करने के बाद हंगरी पहुंच गए हैं। वहीं, तमाम छात्र-छात्राएं हंगरी, रोमानिया और पोलैंड में फंसे हैं। जिनमें से अधिकांश के रात में भारत के लिए निकलने की संभावना है।
अठभैयान घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रही हैं। यह उनका तीसरा साल है। उनकी मां समीना नादिर ने बताया कि बुधवार को उनकी बेटी से बात हुई थी तो शजा ने बताया कि उन्हें मंगलवार शाम को चार बजे खारकीव से ट्रेन मिली थी। जिसके बाद लगातार सफर कर 21 घंटे बाद बुधवार को दोपहर एक बजे यूक्रेन के ही लवीव शहर पहुंच गईं। जैसे तैसे शाम करीब चार बजे उन्हें यूक्रेन-पोलैंड के बॉर्डर तक पहुंचाने के लिए टैक्सी मिली। उन्होंने बताया कि उनका सफर बहुत थकानभरा रहा है। ट्रेन में इतनी अधिक भीड़ थी कि टॉयलेट तक में लोग थे। उन्होंने बताया कि रात या सुबह तक वो यूक्रेन-पोलैंड बॉर्डर तक पहुंच जाएंगी। जबकि, सांई विहार के आशीष कुमार यूक्रेन की उजहोरोद के एक मेडिकल कालेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। इस बार उनका तीसरा साल है। वह पहले तो हालात ठीक होने का इंतजार करते रहे, लेकिन इसके बाद एक प्राइवेट बस के जरिए हंगरी बॉर्डर के लिए निकल गए। लगातार 18.30 घंटे तक सफर करने के बाद बॉर्डर पहुंचे, जहां से उन्हें हंगरी में प्रवेश मिला। जिला अस्पताल कालोनी निवासी सौरभ कुमार भी सुबह पौने दस बजे पोलैंड पहुंचे हैं। वह यूक्रेन के उजहोरोद स्थित मेडिकल कालेज से एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं।
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अठभैयान घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रही हैं। यह उनका तीसरा साल है। उनकी मां समीना नादिर ने बताया कि बुधवार को उनकी बेटी से बात हुई थी तो शजा ने बताया कि उन्हें मंगलवार शाम को चार बजे खारकीव से ट्रेन मिली थी। जिसके बाद लगातार सफर कर 21 घंटे बाद बुधवार को दोपहर एक बजे यूक्रेन के ही लवीव शहर पहुंच गईं। जैसे तैसे शाम करीब चार बजे उन्हें यूक्रेन-पोलैंड के बॉर्डर तक पहुंचाने के लिए टैक्सी मिली। उन्होंने बताया कि उनका सफर बहुत थकानभरा रहा है। ट्रेन में इतनी अधिक भीड़ थी कि टॉयलेट तक में लोग थे। उन्होंने बताया कि रात या सुबह तक वो यूक्रेन-पोलैंड बॉर्डर तक पहुंच जाएंगी। जबकि, सांई विहार के आशीष कुमार यूक्रेन की उजहोरोद के एक मेडिकल कालेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। इस बार उनका तीसरा साल है। वह पहले तो हालात ठीक होने का इंतजार करते रहे, लेकिन इसके बाद एक प्राइवेट बस के जरिए हंगरी बॉर्डर के लिए निकल गए। लगातार 18.30 घंटे तक सफर करने के बाद बॉर्डर पहुंचे, जहां से उन्हें हंगरी में प्रवेश मिला। जिला अस्पताल कालोनी निवासी सौरभ कुमार भी सुबह पौने दस बजे पोलैंड पहुंचे हैं। वह यूक्रेन के उजहोरोद स्थित मेडिकल कालेज से एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं।
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