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सवा करोड़ खर्च फिर भी गोवंशीय पशुओं को नहीं मिल रहा आश्रय
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मिलक। गोवंशीय पशुओं के आश्रय के लिए नगर में करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से वृहद गो संरक्षण केंद्र का निर्माण किया गया है। लेकिन, इसकी चहारदीवारी न होने के कारण यहां पर अभी तक गोवंशीय पशुओं को आश्रय नहीं मिल सका है। विभागीय अधिकारी बिना चहारदीवारी बने इस आश्रय स्थल में गोवंशीय पशुओं को रखने में असमर्थता जता रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने ब्लाक स्तर पर वृहद वृहद गो सरंक्षण केंद्र की स्थापना कराई है। ब्लॉक क्षेत्र में जमीन न मिलने के कारण प्रशासन ने नगर पालिका परिषद क्षेत्र में खाली पड़ी भूमि का चयन करके वृहद गो सरंक्षण केंद्र की स्थापना 1.20 करोड रुपये की लागत से की है। इसका निर्माण पूरा हो चुका है। गो संरक्षण केंद्र की क्षमता 250 है, लेकिन निर्मित भवन की चहारदीवारी नहीं हो सकी है। इससे शासन के सवा करोड़ खर्च होने पर भी इसका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। निर्मित भवन पहले पशुपालन विभाग को हस्तांतरित किया गया था और फिर पालिका को हस्तांतरित कर दिया गया।
गोवंशीय पशुओं की हत्या को लेकर हुए हैं धरना-प्रदर्शन
मिलक। नगर में गोवंशीय पशुओं की हत्या को लेकर शुक्रवार और रविवार को बजंगर दल व अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन भी किया है। वहीं नगर में गो संरक्षण केंद्र का निर्माण होने के बाद भी संचालन न होने के कारण नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंशीय पशु खेतों व सड़कों पर घूमते रहते हैं। ऐसे में यदि चहारदीवारी का निर्माण कर गो संरक्षण केंद्र का संचालन शुरू करा दिया जाए तो गोवंशीय पशुओं को आश्रय भी मिलेगा और गोवंशीय पशुओं की हत्या की घटनाओं पर भी अंकुश लग सकता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
चहारदीवारी का निर्माण नगर पालिका को कराना है। इसको लेकर नगर पालिका के ईओ स्टीमेट स्वीकृत कराने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। स्टीमेट स्वीकृत होते ही चहारदीवारी का निर्माण हो जाएगा और इसके बाद गो सरंक्षण केंद्र का संचालन शुरू हो जाएगा। -डॉ. अशोक कुमार पटेल,
पशु चिकित्साधिकारी-मिलक
गो सरंक्षण केंद्र की चहारदीवारी का स्टीमेट करीब 75 लाख का बना है। जिसको शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। कोरोना काल से पहले यह भवन हस्तांतरण हुआ था। इस बीच कोरोना संक्रमण के कारण शासन को स्टीमेट नहीं भेजा जा सका था। -छोटे कन्हैया सिंह, ईओ-नगर पालिका, मिलक
अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल पड़े हैं वीरान
मिलक। परम और स्योंडरा गांव में अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल बनाए गए थे लेकिन, इनकी देखरेख न होने के कारण ये वीरान पड़े हैं।
शासन ने ग्राम पंचायतों के सहयोग से गोवंशीय पशुओं के अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल में रखने की पहल की थी। इसके तहत तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत परम और ग्राम पंचायत स्योंडरा में अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल की व्यवस्था की थी। यहां पर कुछ दिनों तक तो व्यवस्था दिखी और कुछ पशु भी रखे गए लेकिन, यहां भी चहारदीवारी के अभाव में गोवंशीय पशु नहीं रुक सके। इन स्थलों का एसडीएम और पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने कई बार दौरा किया,लेकिन कोई व्यवस्था बन नहीं सकी। इनकी व्यवस्था ग्राम पंचायत के जिम्मे थी, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
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प्रदेश सरकार ने ब्लाक स्तर पर वृहद वृहद गो सरंक्षण केंद्र की स्थापना कराई है। ब्लॉक क्षेत्र में जमीन न मिलने के कारण प्रशासन ने नगर पालिका परिषद क्षेत्र में खाली पड़ी भूमि का चयन करके वृहद गो सरंक्षण केंद्र की स्थापना 1.20 करोड रुपये की लागत से की है। इसका निर्माण पूरा हो चुका है। गो संरक्षण केंद्र की क्षमता 250 है, लेकिन निर्मित भवन की चहारदीवारी नहीं हो सकी है। इससे शासन के सवा करोड़ खर्च होने पर भी इसका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। निर्मित भवन पहले पशुपालन विभाग को हस्तांतरित किया गया था और फिर पालिका को हस्तांतरित कर दिया गया।
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गोवंशीय पशुओं की हत्या को लेकर हुए हैं धरना-प्रदर्शन
मिलक। नगर में गोवंशीय पशुओं की हत्या को लेकर शुक्रवार और रविवार को बजंगर दल व अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन भी किया है। वहीं नगर में गो संरक्षण केंद्र का निर्माण होने के बाद भी संचालन न होने के कारण नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंशीय पशु खेतों व सड़कों पर घूमते रहते हैं। ऐसे में यदि चहारदीवारी का निर्माण कर गो संरक्षण केंद्र का संचालन शुरू करा दिया जाए तो गोवंशीय पशुओं को आश्रय भी मिलेगा और गोवंशीय पशुओं की हत्या की घटनाओं पर भी अंकुश लग सकता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
चहारदीवारी का निर्माण नगर पालिका को कराना है। इसको लेकर नगर पालिका के ईओ स्टीमेट स्वीकृत कराने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। स्टीमेट स्वीकृत होते ही चहारदीवारी का निर्माण हो जाएगा और इसके बाद गो सरंक्षण केंद्र का संचालन शुरू हो जाएगा। -डॉ. अशोक कुमार पटेल,
पशु चिकित्साधिकारी-मिलक
गो सरंक्षण केंद्र की चहारदीवारी का स्टीमेट करीब 75 लाख का बना है। जिसको शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। कोरोना काल से पहले यह भवन हस्तांतरण हुआ था। इस बीच कोरोना संक्रमण के कारण शासन को स्टीमेट नहीं भेजा जा सका था। -छोटे कन्हैया सिंह, ईओ-नगर पालिका, मिलक
अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल पड़े हैं वीरान
मिलक। परम और स्योंडरा गांव में अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल बनाए गए थे लेकिन, इनकी देखरेख न होने के कारण ये वीरान पड़े हैं।
शासन ने ग्राम पंचायतों के सहयोग से गोवंशीय पशुओं के अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल में रखने की पहल की थी। इसके तहत तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत परम और ग्राम पंचायत स्योंडरा में अस्थायी गोवंशीय आश्रय स्थल की व्यवस्था की थी। यहां पर कुछ दिनों तक तो व्यवस्था दिखी और कुछ पशु भी रखे गए लेकिन, यहां भी चहारदीवारी के अभाव में गोवंशीय पशु नहीं रुक सके। इन स्थलों का एसडीएम और पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने कई बार दौरा किया,लेकिन कोई व्यवस्था बन नहीं सकी। इनकी व्यवस्था ग्राम पंचायत के जिम्मे थी, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका।