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Rampur News: विश्व स्तरीय बहुभाषायी सांस्कृतिक विरासत का हब बनेगा रामपुर
Wed, 29 Jan 2025 01:24 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Wed, 29 Jan 2025 01:24 AM IST
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निर्मल पांडेय
रामपुर। रामपुर जल्द ही विश्व स्तरीय बहुभाषायी सांस्कृतिक विरासत का हब बनेगा। इसके लिए राज्यपाल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्यपाल की मुहर लगते ही अब रामपुर किले का संपूर्ण भू-भाग रजा लाइब्रेरी के नाम हो गया है। उधर, जिला प्रशासन ने रामपुर किले को रजा लाइब्रेरी के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
किले का संपूर्ण भू-भाग मिलने से अब विश्व की महत्वपूर्ण लाइब्रेरियों में एक रजा लाइब्रेरी के पास अब जगह का अभाव नहीं रहेगा। लाइब्रेरी बोर्ड यहां पर निकट भविष्य में ही विश्व स्तरीय संग्रहालय, बहुभाषायी अनुसंधान केंद्र, अनुवाद केंद्र की स्थापना करने की तैयारी में लग गया है। रामपुर संगीत-नृत्य कलाओं को प्रोत्साहित करने वाला केंद्र बनेगा।
रामपुर किले का क्षेत्रफल 65 एकड़ से भी अधिक है। नवाबों के किले पर आधिपत्य मिलते ही निदेशक पुष्कर मिश्र रजा लाइब्रेरी का दायरा बढ़ाते हुए रामपुर को विश्व स्तरीय उत्कृष्ट विद्या स्थान बनाने में जुट गए हैं। उनका मानना है कि अब रामपुर को विश्व स्तरीय उत्कृष्ट विद्या स्थान का बनने की उम्मीद परवान चढ़ने में कोई बाधा नहीं रहेगी। यह विद्या स्थान बहुभाषायी और बहुसांस्कृतिक केंद्र के रूप में विश्वभर में अपनी उत्कृष्टता के लिए पहचाना जाएगा।
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उन्होंने बताया कि इस दिशा में रजा लाइब्रेरी को जमीन की जरूरत थी। रजा लाइब्रेरी में भी पुस्तकों के संरक्षण में जगह का अभाव है। इसके लिए भी एक नए भवन की जरूरत है। इसके अलावा विश्व स्तरीय उत्कृष्ट संग्रहालय के निर्माण की दिशा में बढ़ रहे हैं।
विश्व स्तरीय संग्रहालय की स्थापना को हरी झंडी
निदेशक पुष्कर मिश्र ने बताया कि विश्व स्तरीय संग्रहालय की स्थापना के प्रस्ताव को राज्यपाल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने पारित भी कर दिया है। अब इसका गजट प्रकाशन केंद्र सरकार से होना शेष है। इस तरह रजा लाइब्रेरी को वैश्विक उत्कृष्टता संस्थान बनाना है। इसमें प्रथम चरण में अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दु, हिंदी, अंग्रेजी भाषा में अनुवाद होगा। फिर शेष भारतीय भाषाओं और इसके बाद विश्व भर की भाषाओं में आलेखों के अनुवाद की प्रक्रिया चलेगी।
15 अक्तूबर को राज्यपाल के सामने रखी गई थी बात
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 15 अक्टूबर 2024 को रामपुर आई थीं। उसी दिन केंद्रीय संस्कृत मंत्रालय के संयुक्त सचिव और डीएम-एसपी और निदेशक रजा लाइब्रेरी के साथ पुस्तकालय परिसर के रंग महल में ही राज्यपाल ने बैठक की थी। इसमें रजा लाइब्रेरी में पुस्तकों व अन्य सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में सुरक्षित जगह के अभाव और समस्या निदान पर चर्चा हुई थी। इस कमेटी की बैठक में रजा लाइब्रेरी के जीर्णोद्धार, संरक्षण और विस्तार आदि बिंदुओं पर बातचीत हुई थी। इसी में रामपुर किले की संपूर्ण भूमि को रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम को सौंपने पर सहमति बनी थी। लेकिन, रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम बोर्ड की चेयरमैन राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हो पाए थे।
रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम की स्थापना
बताया जा रहा है कि सात अक्तूबर 1774 को रामपुर रियासत की स्थापना हुई थी। उस समय यहां के तोशखाना में कुछ पुस्तकें थीं। उन पुस्तकों की संख्या को पीढ़ी-दर-पीढ़ी नवाबों ने बढ़ाया था। फिर 1949 को रामपुर रियासत का विलय भारत संघ के साथ हो गया था। इससे पहले नवाब परिवार खासबाग में शिफ्ट हो गया था। 1957 में हामिद मंजिल (रजा लाइब्रेरी) में लाइब्रेरी स्थापित कर उसे ट्रस्ट को सौंपा था। वर्तमान में ट्रस्ट के पास दो जमीनें हैं। इसमें एक हामिद मंजिल और दूसरी रंग महल है। किले की शेष जमीन राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने ले रखा है। उसमें 1975 में पास हुए एक अधिनियम के बाद रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम को सांस्कृतिक मंत्रालय से वित्तपोषण मिल रहा है। उप्र के राज्यपाल इस रजा लाइब्रेरी के पदेन चेयरमैन हैं। इस तरह रजा लाइब्रेरी के संचालन को राज्यपाल की अध्यक्षता वाली 12 सदस्यों की कमेटी है। इस कमेटी में रजा लाइब्रेरी के निदेशक संयुक्त सचिव हैं।
रामपुर किले में चल रहे शैक्षिक संस्थान
रामपुर किले के पुराने जर्जर भवनों में आइटीआई, खुर्शीद इंटर कॉलेज और कई सरकारी कार्यालय संचालित हैं। हालांकि, पूर्व में पीडब्ल्यूडी किले के सभी जर्जर भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित कर चुका है।
अब रजा लाइब्रेरी में बढ़ेगा दायरा
- विश्व स्तरीय बहुभाषी अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
- विश्व स्तरीय बहुभाषी अनुवाद केंद्र के रूप में लाइब्रेरी विकसित हो सकेगी।
- विश्व स्तरीय पांडुलिपि संरक्षण एवं अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- विश्व स्तरीय सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- विद्वानों को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
- हामिद मंजिल को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा।
- पुस्तकालय में आधुनिक वाचनालय बनेगा।
वर्जन-
जिला प्रशासन के सहयोग से और रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम की पहल पर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद अब रामपुर किले का संपूर्ण भू-भाग पुस्तकालय को मिल पाया है। इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया अब प्रशासन पूरा करेगा। किले का करीब 65 एकड़ भू-भाग मिलने से पुस्तकालय की जगह के अभाव वाली समस्याओं का अंत होगा। साथ ही हम अब विभिन्न भाषाओं पर शोध के लिए संस्थान और संगीत-नृत्य कलाओं को प्रोत्साहित करने का केंद्र बनाने में भी सफल होंगे। रजा लाइब्रेरी के जीर्णोद्धर, संरक्षण और संपूर्ण विस्तार हो सकेगा।
- डॉ. पुष्कर मिश्र, निदेशक-रामपुर रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम
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रामपुर। रामपुर जल्द ही विश्व स्तरीय बहुभाषायी सांस्कृतिक विरासत का हब बनेगा। इसके लिए राज्यपाल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्यपाल की मुहर लगते ही अब रामपुर किले का संपूर्ण भू-भाग रजा लाइब्रेरी के नाम हो गया है। उधर, जिला प्रशासन ने रामपुर किले को रजा लाइब्रेरी के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
किले का संपूर्ण भू-भाग मिलने से अब विश्व की महत्वपूर्ण लाइब्रेरियों में एक रजा लाइब्रेरी के पास अब जगह का अभाव नहीं रहेगा। लाइब्रेरी बोर्ड यहां पर निकट भविष्य में ही विश्व स्तरीय संग्रहालय, बहुभाषायी अनुसंधान केंद्र, अनुवाद केंद्र की स्थापना करने की तैयारी में लग गया है। रामपुर संगीत-नृत्य कलाओं को प्रोत्साहित करने वाला केंद्र बनेगा।
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रामपुर किले का क्षेत्रफल 65 एकड़ से भी अधिक है। नवाबों के किले पर आधिपत्य मिलते ही निदेशक पुष्कर मिश्र रजा लाइब्रेरी का दायरा बढ़ाते हुए रामपुर को विश्व स्तरीय उत्कृष्ट विद्या स्थान बनाने में जुट गए हैं। उनका मानना है कि अब रामपुर को विश्व स्तरीय उत्कृष्ट विद्या स्थान का बनने की उम्मीद परवान चढ़ने में कोई बाधा नहीं रहेगी। यह विद्या स्थान बहुभाषायी और बहुसांस्कृतिक केंद्र के रूप में विश्वभर में अपनी उत्कृष्टता के लिए पहचाना जाएगा।
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उन्होंने बताया कि इस दिशा में रजा लाइब्रेरी को जमीन की जरूरत थी। रजा लाइब्रेरी में भी पुस्तकों के संरक्षण में जगह का अभाव है। इसके लिए भी एक नए भवन की जरूरत है। इसके अलावा विश्व स्तरीय उत्कृष्ट संग्रहालय के निर्माण की दिशा में बढ़ रहे हैं।
विश्व स्तरीय संग्रहालय की स्थापना को हरी झंडी
निदेशक पुष्कर मिश्र ने बताया कि विश्व स्तरीय संग्रहालय की स्थापना के प्रस्ताव को राज्यपाल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने पारित भी कर दिया है। अब इसका गजट प्रकाशन केंद्र सरकार से होना शेष है। इस तरह रजा लाइब्रेरी को वैश्विक उत्कृष्टता संस्थान बनाना है। इसमें प्रथम चरण में अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दु, हिंदी, अंग्रेजी भाषा में अनुवाद होगा। फिर शेष भारतीय भाषाओं और इसके बाद विश्व भर की भाषाओं में आलेखों के अनुवाद की प्रक्रिया चलेगी।
15 अक्तूबर को राज्यपाल के सामने रखी गई थी बात
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 15 अक्टूबर 2024 को रामपुर आई थीं। उसी दिन केंद्रीय संस्कृत मंत्रालय के संयुक्त सचिव और डीएम-एसपी और निदेशक रजा लाइब्रेरी के साथ पुस्तकालय परिसर के रंग महल में ही राज्यपाल ने बैठक की थी। इसमें रजा लाइब्रेरी में पुस्तकों व अन्य सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में सुरक्षित जगह के अभाव और समस्या निदान पर चर्चा हुई थी। इस कमेटी की बैठक में रजा लाइब्रेरी के जीर्णोद्धार, संरक्षण और विस्तार आदि बिंदुओं पर बातचीत हुई थी। इसी में रामपुर किले की संपूर्ण भूमि को रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम को सौंपने पर सहमति बनी थी। लेकिन, रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम बोर्ड की चेयरमैन राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हो पाए थे।
रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम की स्थापना
बताया जा रहा है कि सात अक्तूबर 1774 को रामपुर रियासत की स्थापना हुई थी। उस समय यहां के तोशखाना में कुछ पुस्तकें थीं। उन पुस्तकों की संख्या को पीढ़ी-दर-पीढ़ी नवाबों ने बढ़ाया था। फिर 1949 को रामपुर रियासत का विलय भारत संघ के साथ हो गया था। इससे पहले नवाब परिवार खासबाग में शिफ्ट हो गया था। 1957 में हामिद मंजिल (रजा लाइब्रेरी) में लाइब्रेरी स्थापित कर उसे ट्रस्ट को सौंपा था। वर्तमान में ट्रस्ट के पास दो जमीनें हैं। इसमें एक हामिद मंजिल और दूसरी रंग महल है। किले की शेष जमीन राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने ले रखा है। उसमें 1975 में पास हुए एक अधिनियम के बाद रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम को सांस्कृतिक मंत्रालय से वित्तपोषण मिल रहा है। उप्र के राज्यपाल इस रजा लाइब्रेरी के पदेन चेयरमैन हैं। इस तरह रजा लाइब्रेरी के संचालन को राज्यपाल की अध्यक्षता वाली 12 सदस्यों की कमेटी है। इस कमेटी में रजा लाइब्रेरी के निदेशक संयुक्त सचिव हैं।
रामपुर किले में चल रहे शैक्षिक संस्थान
रामपुर किले के पुराने जर्जर भवनों में आइटीआई, खुर्शीद इंटर कॉलेज और कई सरकारी कार्यालय संचालित हैं। हालांकि, पूर्व में पीडब्ल्यूडी किले के सभी जर्जर भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित कर चुका है।
अब रजा लाइब्रेरी में बढ़ेगा दायरा
- विश्व स्तरीय बहुभाषी अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
- विश्व स्तरीय बहुभाषी अनुवाद केंद्र के रूप में लाइब्रेरी विकसित हो सकेगी।
- विश्व स्तरीय पांडुलिपि संरक्षण एवं अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- विश्व स्तरीय सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- विद्वानों को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
- हामिद मंजिल को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा।
- पुस्तकालय में आधुनिक वाचनालय बनेगा।
वर्जन-
जिला प्रशासन के सहयोग से और रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम की पहल पर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद अब रामपुर किले का संपूर्ण भू-भाग पुस्तकालय को मिल पाया है। इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया अब प्रशासन पूरा करेगा। किले का करीब 65 एकड़ भू-भाग मिलने से पुस्तकालय की जगह के अभाव वाली समस्याओं का अंत होगा। साथ ही हम अब विभिन्न भाषाओं पर शोध के लिए संस्थान और संगीत-नृत्य कलाओं को प्रोत्साहित करने का केंद्र बनाने में भी सफल होंगे। रजा लाइब्रेरी के जीर्णोद्धर, संरक्षण और संपूर्ण विस्तार हो सकेगा।
- डॉ. पुष्कर मिश्र, निदेशक-रामपुर रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम