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रामपुर रियासत की बेगमों की जिंदगी से रूबरू हुई दुनिया
अखिलेश शर्मा/ रामपुर
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:24 AM IST
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बेगम आफताब जमानी
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नवाबों-सुल्तानों, राजा-महाराजों की अंदरूनी जिंदगी आम आदमियों के लिए तिलिस्म ही रहे हैं। अब रामपुर रियासत की बेगमों की भव्य जीवन शैली से एक किताब रूबरू कराएगी। पिछले हफ्ते पाकिस्तान के लाहौर में लांच हुई ‘गोल्ड डस्ट आफ बेगम सुल्तान्स’ रामपुर रियासत की बेगमों की निजी जिंदगी के साथ ही सामाजिक-सांस्कृ तिक सहभागिता के कई पहलुओं को उजागर करती है। किताब में रुहेलखंड और वेस्ट यूपी की कई और बेगमों की दास्तां भी दी गई है।
पाकिस्तान के लाहौर में रामपुर के नवाबों की बेगमों के किरदार और उनकी पहचान के लिए लिखी गई किताब गोल्ड डस्ट आफ बेगम सुल्तान का बीते मंगलवार को शानदार विमोचन हुआ। इस किताब में रामपुर रियासत के गौरवमयी इतिहास में बेगमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। दावा किया गया है कि रामपुर के नवाबों के बारे में तो तमाम किताबें लिखी गईं लेकिन उनकी बेगमों पर लिखी गई यह पहली किताब रही है।
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गोल्ड डस्ट आफ बेगम सुल्तान शीर्षक की इस किताब में रामपुर रियासत की बेगमों की दास्तां है। बेगमों के शानदार रहन-सहन, जेवर-गहने, परिधान और खानपान का ब्योरा इस किताब में है। रियासत के जमाने के कई दुर्लभ चित्र भी किताब की शोभा बढ़ा रहे हैं। डॉ सईदा हमीद ने किताब को नवाब के परिवार के एक वंशज के साथ बातचीत के आधार पर तैयार किया है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष आइए रहमान ने इस किताब का विमोचन किया। इस दौरान वहां प्रोफेसर सलीमा हाशमी, डॉ आरिफा सईदा, जहरा, डॉ मुद्दशर हसन मौजूद रहे।
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कार्यक्रम डॉ मुद्दशर हसन और एनसीए के पूर्व प्रमुख नाजिश अताउल्लाह के निवास पर आयोजित किया गया था। इस किताब में 1857 से रुहेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नवाबों की बेगमों पर कहानी है, जिसमें अलीगढ़ और नैनीताल के पहाड़ों से मैदानी इलाकों तक की यात्रा के वृतांत्त भी लिखे हैं। इस दौरान आइए रहमान ने कहा कि किताब में नवाबों की जीवन शैली का एक सच्चा चित्रण किया गया है, जिसमें विभाजन से पहले का विवरण है।