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रामपुर के दो नवाबों के उस्ताद रहे थे मिर्जा गालिब

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2020 12:44 AM IST
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rampur nawab was puple of mirzagalib
रामपुर। मिर्जा गालिब का रामपुर से गहरा नाता रहा है। वह यहां के दो नवाबों के उस्ताद रहे थे। उन्हें रामपुर रियासत से प्रतिमाह सौ रुपये वेतन भी मिलता था। साथ ही उन्होंने रामपुर में काफी समय भी गुजारा था।
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1857 की क्रांति के बाद देश में हालात बदल रहे थे। दिल्ली में बहादुर शाह जफर का राज नहीं रह गया था। ब्रिटिश हुक्मरानों ने बहादुर शाह जफर को रंगून की जेल में बंद कर दिया था। इन स्थितियों में मिर्जा गालिब 1860 में रामपुर आ गए। रामपुर के नवाब ने उनका तहेदिल से स्वागत किया और उन्होंने रामपुर के शासक नवाब यूसुफ अली खां के शिक्षक का दायित्व संभाला। इसके बदले उन्हें प्रतिमाह सौ रुपये बतौर वजीफा दिया जाता था। इसके बाद नवाब कल्बे अली के भी वह शिक्षक रहे। रामपुर रियासत की ओर से राजद्वारा में उनको रहने के लिए एक मकान भी दिया गया था। मिर्जा गालिब यहां बहुत दिन नहीं रहे। वह वापस दिल्ली चले गए लेकिन इसके बाद भी नवाब परिवार से उनका ताल्लुक बना रहा। वह दिल्ली से रामपुर के नवाब को लगातार पत्र भेजते रहे। उनके कई पत्र अब भी रजा लाइब्रेरी में संरक्षित हैं। इतिहासकार बताते हैं कि नवाब ने 1865 में अपने राज्याभिषेक के मौके पर मिर्जा गालिब को रामपुर बुलाया था लेकिन सेहत खराब होने की वजह से वह नहीं आ सके। उन्होंने इस अवसर के लिए कसीदा लिखकर जरूर भेजा था।
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मिर्जा गालिब ने अपनी शायरी में कई जगहों पर रामपुर की कोसी नदी के मीठे पानी और शानदार भोजन और भव्यता की प्रशंसा की है। अपने अंतिम दिनों में भी वह रामपुर के नवाबों के संपर्क में थे। उन्होंने नवाब कल्बे अली खां को खत भेजकर अपने पोते हुसैन अली की निकाह को लिए गए कर्ज की अदायगी करने का अनुरोध किया था। उन्होंने अपने खत में लिखा था ‘हाल मेरा तबाह होते-होते अब ये नौबत पहुंची है... आठ सौ रुपये हो तो मेरी आबरू बचती है ... बस मेरा यही काम है याद दिला दूं। आगे हजरत मालिक हैं’। रामपुर के इतिहास के जानकारों का कहना है कि इसके कुछ ही दिनों के बाद मिर्जा गालिब का इंतकाल हो गया। इसके बाद भी रामपुर के नवाब ने आठ सौ रुपये की राशि उनकी पत्नी को दी। उनकी पत्नी को रियासत की ओर से पेंशन भी दी गई जो उनके इंतकाल के बाद मिर्जा गालिब के पोते हुसैन अली खान को भी मिली।
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