{"_id":"60c39d168ebc3e53db32c12e","slug":"protest-of-labours-rampur-news-mbd3919139168","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रम विभाग से मजदूरों के खाते में आया पैसा गायब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रम विभाग से मजदूरों के खाते में आया पैसा गायब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों के खाते में सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं का पैसा आया, लेकिन एक व्यक्ति ने फर्जीवाड़ा कर मजदूरों के खातों से रुपये निकाल लिए। इस बाबत मजदूरों के जिलाधिकारी कार्यालय पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। उन्होंने डीएम से मांग करते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की क्राइम ब्रांच से जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्राम मुतियापुरा के तमाम मजदूर एकत्र होकर कलक्ट्रेट आ गए। यहां जिलाधिकारी कार्यालय के सामने नारेबाजी कर प्रदर्शन करने लगे, जिसके बाद लोगों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। उनका कहना था कि 25 जनवरी 2018 व 20 अगस्त 2018 को मुरारी पुत्र रामकुमार ने गांवों के मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीकरण कराया था। पंजीकरण के लिए मजदूरों ने अपने आधार कार्ड, बैंक की किताब व फोटो दे दिए थे। पंजीकरण कराने के नाम मुरारी ने प्रत्येक मजदूर से पांच सौ रुपये लिए थे। इसके बाद मजदूरों के खाते में चिकित्सा के लिए तीन हजार रुपये एवं बेटी की शादी के अनुदान के लिए 55 हजार रुपये आए थे। अन्य योजनाओं के अनुसार भी रुपये आए थे। आरोप है कि रजिस्ट्रेशन कराते समय व बैंक में खाता खुलवाते समय कुछ अपने परिचितों के मोबाइल नंबर डाल दिए थे, जिससे कि ओटीपी भी उन नंबरों पर आता था। इसके साथ मजदूरों के एटीएम भी उसी के पास थे। आरोप लगाया कि इसी तरह का फर्जीवाड़ा कर करीब एक हजार मजदूरों के खातों से रुपये निकाले गए हैं। उन्होंने मामले की जांच क्राइम ब्रांच से कराने एवं दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मौके पर धर्म सिंह, श्यामलाल, वीरबल, राजू, रामवीर, विमला, मिथलेश आदि रहे।
विज्ञापन
ग्राम मुतियापुरा के तमाम मजदूर एकत्र होकर कलक्ट्रेट आ गए। यहां जिलाधिकारी कार्यालय के सामने नारेबाजी कर प्रदर्शन करने लगे, जिसके बाद लोगों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। उनका कहना था कि 25 जनवरी 2018 व 20 अगस्त 2018 को मुरारी पुत्र रामकुमार ने गांवों के मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीकरण कराया था। पंजीकरण के लिए मजदूरों ने अपने आधार कार्ड, बैंक की किताब व फोटो दे दिए थे। पंजीकरण कराने के नाम मुरारी ने प्रत्येक मजदूर से पांच सौ रुपये लिए थे। इसके बाद मजदूरों के खाते में चिकित्सा के लिए तीन हजार रुपये एवं बेटी की शादी के अनुदान के लिए 55 हजार रुपये आए थे। अन्य योजनाओं के अनुसार भी रुपये आए थे। आरोप है कि रजिस्ट्रेशन कराते समय व बैंक में खाता खुलवाते समय कुछ अपने परिचितों के मोबाइल नंबर डाल दिए थे, जिससे कि ओटीपी भी उन नंबरों पर आता था। इसके साथ मजदूरों के एटीएम भी उसी के पास थे। आरोप लगाया कि इसी तरह का फर्जीवाड़ा कर करीब एक हजार मजदूरों के खातों से रुपये निकाले गए हैं। उन्होंने मामले की जांच क्राइम ब्रांच से कराने एवं दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मौके पर धर्म सिंह, श्यामलाल, वीरबल, राजू, रामवीर, विमला, मिथलेश आदि रहे।
विज्ञापन