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Rampur News: जौहर यूनिवर्सिटी पर गरमाई सियासत, ध्वस्तीकरण पर रोक की मांग
Sat, 18 Jul 2026 02:17 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sat, 18 Jul 2026 02:17 AM IST
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रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने चिंता जताते हुए कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। आप, सपा, एआईएमआईएम समेत विभिन्न संगठनों ने कार्रवाई रोकने और पारदर्शिता की मांग उठाई।
आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता फैसल खान लाला ने कहा कि आजम खां से वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी शिक्षा संस्थान को निशाना बनाकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, मगर उनकी कीमत विद्यार्थियों को नहीं चुकानी चाहिए।
फैसल लाला ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हजारों छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार का दायित्व शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो तथा शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचे।
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सपा नेता ने आरडीए से मांगी नौ बिंदुओं की जानकारी
समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव मोहम्मद उसामा खान ने जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत आरडीए से नौ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। उन्होंने ग्राम सिंगनखेड़ा को विकास क्षेत्र में शामिल किए जाने संबंधी शासनादेश, अधिसूचना, प्रभावी तिथि और भवन मानचित्र स्वीकृति से जुड़े नियमों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस, निरीक्षण रिपोर्ट, आदेश, अभिलेख और उन साक्ष्यों की जानकारी भी मांगी है, जिनके आधार पर निर्माण को अवैध माना गया। उसामा खान ने कहा कि पूरे प्रकरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तथ्य सामने लाने के लिए यह जानकारी मांगी गई है।
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एआईएमआईएम ने राष्ट्रपति के नाम भेजा ज्ञापन
एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष फरीदुज्ज जफर रहमानी ने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय रामपुर की पहचान होने के साथ-साथ गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र है। यहां हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यदि विश्वविद्यालय की इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है तो जिले के शिक्षा क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी और युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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राज्यपाल से लगाई यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण रोकने की गुहार
जुल्फिकार अली तुर्क एडवोकेट, हरदीप सिंह और शुभम सागर ने राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय के भवनों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि विश्वविद्यालय हजारों छात्रों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। भवनों का ध्वस्तीकरण होने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षाएं, डिग्रियां तथा शिक्षकों व कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा। ज्ञापन में मांग की गई कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन शिक्षा संस्थान को नुकसान न पहुंचाया जाए। साथ ही स्वतंत्र उच्चस्तरीय तकनीकी एवं विधिक समिति से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर रिपोर्ट आने तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने और यथास्थिति बनाए रखने की मांग की गई।
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पीएम से जौहर यूनिवर्सिटी को सरकारी घोषित करने की मांग
स्वार। उलेमा काउंसिल के तहसील अध्यक्ष हाफिज जमील अहमद ने प्रधानमंत्री से मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को सरकारी विश्वविद्यालय घोषित करने की मांग की है।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत में उन्होंने कहा कि भवनों का नक्शा पास न होने पर विश्वविद्यालय के भवनों को तोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन पर जुर्माना लगाया जा सकता है अथवा नक्शा पास कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
शिकायत में कहा गया है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विभिन्न कानूनी विवादों के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने छात्रों के हितों को देखते हुए विश्वविद्यालय को सरकारी कब्जे में लेकर उसे सरकारी विश्वविद्यालय घोषित करने की मांग की है। संवाद
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आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता फैसल खान लाला ने कहा कि आजम खां से वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी शिक्षा संस्थान को निशाना बनाकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, मगर उनकी कीमत विद्यार्थियों को नहीं चुकानी चाहिए।
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फैसल लाला ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हजारों छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार का दायित्व शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो तथा शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचे।
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सपा नेता ने आरडीए से मांगी नौ बिंदुओं की जानकारी
समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव मोहम्मद उसामा खान ने जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत आरडीए से नौ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। उन्होंने ग्राम सिंगनखेड़ा को विकास क्षेत्र में शामिल किए जाने संबंधी शासनादेश, अधिसूचना, प्रभावी तिथि और भवन मानचित्र स्वीकृति से जुड़े नियमों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस, निरीक्षण रिपोर्ट, आदेश, अभिलेख और उन साक्ष्यों की जानकारी भी मांगी है, जिनके आधार पर निर्माण को अवैध माना गया। उसामा खान ने कहा कि पूरे प्रकरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तथ्य सामने लाने के लिए यह जानकारी मांगी गई है।
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एआईएमआईएम ने राष्ट्रपति के नाम भेजा ज्ञापन
एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष फरीदुज्ज जफर रहमानी ने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय रामपुर की पहचान होने के साथ-साथ गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र है। यहां हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यदि विश्वविद्यालय की इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है तो जिले के शिक्षा क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी और युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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राज्यपाल से लगाई यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण रोकने की गुहार
जुल्फिकार अली तुर्क एडवोकेट, हरदीप सिंह और शुभम सागर ने राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय के भवनों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि विश्वविद्यालय हजारों छात्रों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। भवनों का ध्वस्तीकरण होने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षाएं, डिग्रियां तथा शिक्षकों व कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा। ज्ञापन में मांग की गई कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन शिक्षा संस्थान को नुकसान न पहुंचाया जाए। साथ ही स्वतंत्र उच्चस्तरीय तकनीकी एवं विधिक समिति से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर रिपोर्ट आने तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने और यथास्थिति बनाए रखने की मांग की गई।
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पीएम से जौहर यूनिवर्सिटी को सरकारी घोषित करने की मांग
स्वार। उलेमा काउंसिल के तहसील अध्यक्ष हाफिज जमील अहमद ने प्रधानमंत्री से मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को सरकारी विश्वविद्यालय घोषित करने की मांग की है।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत में उन्होंने कहा कि भवनों का नक्शा पास न होने पर विश्वविद्यालय के भवनों को तोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन पर जुर्माना लगाया जा सकता है अथवा नक्शा पास कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
शिकायत में कहा गया है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विभिन्न कानूनी विवादों के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने छात्रों के हितों को देखते हुए विश्वविद्यालय को सरकारी कब्जे में लेकर उसे सरकारी विश्वविद्यालय घोषित करने की मांग की है। संवाद