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सेहत से खिलवाड़ : अस्पतालों में खुले में जल रहा बायोमेडिकल वेस्ट

Fri, 14 Feb 2025 01:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Fri, 14 Feb 2025 01:29 AM IST
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Playing with health: Biomedical waste burning in the open in hospitals
टांडा (रामपुर)। नगर की सीएचसी में बायोमेडिकल वेस्ट खुले में जलाया जा रहा है। साथ ही निजी अस्पतालों में विभिन्न जगहों पर रखें डस्टबिन में बायोमेडिकल वेस्ट डाला जा रहा है। सरकारी और निजी अस्पताल प्रबंधन की ओर से बरती गई लापरवाही मरीजों, तीमारदारों, स्वास्थ्य कर्मियों के साथ ही लोगों पर भारी पड़ रही है।
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टांडा क्षेत्र के निजी अस्तपाल, क्लीनिक व स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी संस्थाओं को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की कोई परवाह नहीं है। स्थिति यह है कि सामान्य कचरे की तरह वार्डों और अस्पतालों में रखे डस्टबिन में बायोमेडिकल वेस्ट डाल दिया जाता है। संक्रमित सीरींज से एचआईवी, हेपेटाइटिस समेत अन्य गंभीर रोग फैलने का खतरा रहता है। हालात ये हैं कि तहसील क्षेत्र में किसी भी निजी अस्पताल ने अब तक बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की मंजूरी के संबंध में प्रदूषण विभाग से एनओसी नहीं ली है। ऐसे में इनका कचरा कहां जा रहा है, यह कोई नहीं जानता।
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खास बात है कि नगर की सीएचसी में भी बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण खुले में जलाकर किया जाता है। ऐसा नहीं है कि जिम्मेदारों को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन सभी अनदेखी कर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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वर्जन
नगर में बड़ी संख्या में अपंजीकृत अस्पताल हैं। सभी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण न कर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ होता है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। वहीं सरकारी अस्पताल में भी खुले में ही बायोमेडिकल वेस्ट जलाया जा रहा है। -माजिद सैफी, एडवोकेट

अधिकांश निजी अस्पताल संचालकों को तो यह तक नहीं पता कि बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण कैसे करना है। कार्रवाई न होने पर अस्पताल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। इसलिए अस्पताल संचालक लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। -हाजी शकील, नगर अध्यक्ष व्यापार मंडल

टांडा में अधिकांश निजी अस्पताल बायोमेडिकल वेस्ट नगर पालिका की गाड़ियों में डाल देते हैं और नगर से सटे ग्राम बादली में मौजूद अस्पताल अपना वेस्ट बादली में बहने वाली बहल्ला नदी में डालकर पर्यावरण के साथ ही पानी को भी दूषित कर रहे है। -सरताज जहां रहमानी, समाजसेवी


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क्या कहता है बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट-

बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट 2016 के संशोधित नियम 2018 के तहत कुछ बदलाव किए गए है। इसके तहत अब अस्पताल में चार के स्थान पर पांच रंग की बाल्टियां रखी जाएंगी। सामान्य कचरे को छोड़कर अन्य संक्रमित वेस्ट का निस्तारण बार कोडिंग से होगा। पूर्व में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 के तहत जो कांच के आइटम थे उन्हें कार्ड बोर्ड के बॉक्स में रखे जाने का प्रावधान था, लेकिन संशोधित एक्ट 2018 के तहत अब कार्ड बोर्ड बॉक्स पंचर प्रूफ नीले निशान वाले कंटेनर में रखवाया जाएगा। इसी संशोधित एक्ट 2018 बायोमेडिकल वेस्ट नियम के अनुसार, इस जैविक कचरे को खुले में डालने पर अस्पतालों के खिलाफ जुर्माने व सजा का भी प्रावधान है। कूड़ा निस्तारण के उपाय नहीं करने पर पांच साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।



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