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‘विधानसभा से हटाएं हैदर अली, टीपू सुल्तान की तस्वीर’
ब्यूरो अमर उजाला / रामपुर
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:20 AM IST
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tipu sultan
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पूर्व मंत्री व सपा विधायक मोहम्मद आजम खां ने विधानसभा की गैलरी में लगी हैदर अली, टीपू सुल्तान और बेगम हजरत महल की तस्वीरों को हटाने की मांग की है। इसको लेकर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा है। पत्र में आशंका जताई है कि इन तस्वीरों की वजह से विधानसभा और प्रदेश का माहौल खराब हो सकता है।
आजम खां का कहना है कि कर्नाटक की राजनीति को लेकर सियासी हल्कों में इतिहास की व्याख्या की जा रही है। पूरे प्रदेश मेें धार्मिक उन्माद तेजी से फैल रहा है। जहरीली राजनीतिक मानसिकता वालों को इसका फायदा मिल रहा है। नफरत फैलाने वालों के मंसूबे कामयाब हुए हैं और बड़े पैमाने पर सत्ता में बदलाव आया है।
फिल्मों की कहानियों पर विवाद, मनोरंजन के संसाधनों पर कुठाराघात, फिल्म पद्मावती को लेकर चुनाव में बरपा तूफान और चुनाव समाप्त होते ही सन्नाटा है। समझ में नहीं आता है कि यह उबाल बाजीराव मस्तानी फिल्म पर क्यों नहीं आया। क्या इसलिए कि प्रेमिका मस्तानी का रूप पद्मावती के रूप से भिन्न था।
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यदि पुरानी फिल्म मुगल-ए-आजम के बारे में सोचा जाए तो यह फिल्म फर्जी कहानी पर आधारित थी। यदि फिल्म का इतिहास देखें तो अनेकों ऐसी फिल्में आईं, जिनमें सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक हस्तियों का खुलकर मजाक उड़ाया गया। लेकिन, लोगों ने केवल इसे मनोरंजन माना।
टीपू सुल्तान को लेकर देश के बड़े बड़े नेताओं के गिरे स्तर के बयान आ रहे हैं, जिससे समाज कमजोर हो रहा है। रिश्ते टूट रहे हैं और मुल्क की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। ऐसे में विधानसभा की गैलरी में लगी हुई ऐसी तस्वीरें, जिनसे कभी भी उन्माद पैदा हो सकता है, हटा दी जाएं।
कभी भी विधायक या आने वाले मेहमान कुछ ऐसा कर सकते हैं, जो कर्नाटक में हुआ है। इसीलिए, बेहतर होगा कि प्रदेश के माहौल को खराब होने से बचाने के लिए हैदर अली, टीपू सुल्तान और बेगम हजरत महल की तस्वीरों को हटा दिया जाए। यदि कभी माहौल में बेहतरी पैदा तो इन तस्वीरों को फिर से लगाने पर विचार किया जा सकता है।
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आजम खां का कहना है कि कर्नाटक की राजनीति को लेकर सियासी हल्कों में इतिहास की व्याख्या की जा रही है। पूरे प्रदेश मेें धार्मिक उन्माद तेजी से फैल रहा है। जहरीली राजनीतिक मानसिकता वालों को इसका फायदा मिल रहा है। नफरत फैलाने वालों के मंसूबे कामयाब हुए हैं और बड़े पैमाने पर सत्ता में बदलाव आया है।
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फिल्मों की कहानियों पर विवाद, मनोरंजन के संसाधनों पर कुठाराघात, फिल्म पद्मावती को लेकर चुनाव में बरपा तूफान और चुनाव समाप्त होते ही सन्नाटा है। समझ में नहीं आता है कि यह उबाल बाजीराव मस्तानी फिल्म पर क्यों नहीं आया। क्या इसलिए कि प्रेमिका मस्तानी का रूप पद्मावती के रूप से भिन्न था।
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यदि पुरानी फिल्म मुगल-ए-आजम के बारे में सोचा जाए तो यह फिल्म फर्जी कहानी पर आधारित थी। यदि फिल्म का इतिहास देखें तो अनेकों ऐसी फिल्में आईं, जिनमें सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक हस्तियों का खुलकर मजाक उड़ाया गया। लेकिन, लोगों ने केवल इसे मनोरंजन माना।
टीपू सुल्तान को लेकर देश के बड़े बड़े नेताओं के गिरे स्तर के बयान आ रहे हैं, जिससे समाज कमजोर हो रहा है। रिश्ते टूट रहे हैं और मुल्क की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। ऐसे में विधानसभा की गैलरी में लगी हुई ऐसी तस्वीरें, जिनसे कभी भी उन्माद पैदा हो सकता है, हटा दी जाएं।
कभी भी विधायक या आने वाले मेहमान कुछ ऐसा कर सकते हैं, जो कर्नाटक में हुआ है। इसीलिए, बेहतर होगा कि प्रदेश के माहौल को खराब होने से बचाने के लिए हैदर अली, टीपू सुल्तान और बेगम हजरत महल की तस्वीरों को हटा दिया जाए। यदि कभी माहौल में बेहतरी पैदा तो इन तस्वीरों को फिर से लगाने पर विचार किया जा सकता है।