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गांवों में होने वाली हर मौत का रिकॉर्ड रखेंगे पंचायत सचिव
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रामपुर। गांवों में होने वाली हर मौत का रिकॉर्ड पंचायत सचिव रखेंगे। पंचायत सचिव यह रिकॉर्ड रखेंगे कि गांव में किस व्यक्ति की मौत किस तारीख को किस वजह से हुई। इस कार्य में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, बीडीसी सदस्य भी पंचायत सचिव की मदद करेंगे। गांव में किसी व्यक्ति की बुखार या सांस लेने में दिक्कत से हुई मौत की सूचना के बाद अगर वहां स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम नहीं पहुंचती है तो संबंधित जिलाधिकारी इसके लिए जिम्मेदार होंगे। यह निर्देश शनिवार को मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने मंडल के सभी जिलाधिकारियों, सीएमओ, सीडीओ और एडी हेल्थ के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में दिए।
मंडलायुक्त ने कहा कि गांवों से मौत की खबरें लगातार आ रही हैं। इसको लेकर सर्च और ट्रेसिंग अभियान चलाया जाना चाहिए। गांवों में अभियान चलाकर ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए जिनमें कोरोना संक्रमण के लक्षण हैं। इस कार्य में स्वयंसेवकों से भी मदद ली जाएगी। मंडलायुक्त ने कहा कि गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हमें अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना होगा। हमारे पास इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि गांवों में या उसके आसपास कितने एमबीबीएस या फिर बीएएमएस डॉक्टर हैं। आवश्यकता पड़ने पर सभी की मदद ली जाएगी।
मंडलायुक्त ने कहा कि इस बात की शिकायत मिल रही है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। उनकी ठीक से देखभाल भी नहीं हो पा रही है। निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए और इन कैमरों को इंटीग्रेटेड कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाए। ताकि सेंटर से अस्पतालों में होने वाले इलाज पर नजर रखी जा सके। उन्होंने एडी हेल्थ को निर्देश दिए कि कोरोना से संक्रमित मरीजों के इलाज का प्रोटोकाल निर्धारित किया जाए। किस मरीज को कौन सी दवा दी जानी है यह डॉक्टर निर्धारित करेंगे। कई बार ऐसा देखने में आता है कि डॉक्टर तीमारदारों के दबाव में दवा लिख रहे हैं या फिर ऐसी दवा लिख रहे हैं जो आसानी से बाजार में उपलब्ध ही नहीं है। मंडलायुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि किसी मरीज को ऑक्सीजन की कमी नहीं होनी चाहिए। पूरे मंडल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में ऑक्सीजन हेल्प लाइन सेवा दी जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे निजी अस्पतालों में मरीजों से ओवर चार्जिंग पर भी नजर रखें।
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रोजगार उपलब्ध कराने पर दिया जोर
मंडलायुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की ओर से जिन कार्यों की अनुमति है उनको नहीं रोका जाए। मनरेगा के तहत कार्य कराए जाएंगे। लॉकडाउन की वजह से जिनके सामने रोजी रोटी का संकट है उनको रोजगार उपलब्ध कराए जाएं।
बहाना करके छुट्टी पर जाने वालों पर होगी कार्रवाई
मंडलायुक्त ने कहा कि हमारे कई अधिकारी अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात कार्य कर रहे हैं। कई अधिकारी और कर्मचारी संक्रमण की चपेट में भी आए हैं, उनको प्राथमिकता के आधार पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं कुछ अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जो बहाना करके घर में बैठ गए हैं। ऐसे लोगों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। संकट की घड़ी में हमें सबकी मदद करनी है।
हल्के लक्षण होने पर भी की जांच कराने की अपील
मंडलायुक्त ने लोगों से अपील की है कि वो कोरोना संक्रमण को हल्के में न लें। उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर लोगों में जागरूकता का अभाव है। कोरोना के लक्षण होने के बाद भी लोग जांच कराने से घबराते हैं। कई गांवों में जब स्वास्थ्य विभाग की टीम गई तो लोगों ने जांच कराने से मना कर दिया। जांच नहीं होने की स्थिति में इलाज देर से शुरू होता है। ऐसी स्थिति में मरीज की हालत बिगड़ सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोरोना संक्रमण हल्के लक्षण होने पर जांच जरूर कराएं। ताकि समय पर इलाज मिल सके।
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मंडलायुक्त ने कहा कि गांवों से मौत की खबरें लगातार आ रही हैं। इसको लेकर सर्च और ट्रेसिंग अभियान चलाया जाना चाहिए। गांवों में अभियान चलाकर ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए जिनमें कोरोना संक्रमण के लक्षण हैं। इस कार्य में स्वयंसेवकों से भी मदद ली जाएगी। मंडलायुक्त ने कहा कि गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हमें अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना होगा। हमारे पास इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि गांवों में या उसके आसपास कितने एमबीबीएस या फिर बीएएमएस डॉक्टर हैं। आवश्यकता पड़ने पर सभी की मदद ली जाएगी।
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मंडलायुक्त ने कहा कि इस बात की शिकायत मिल रही है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। उनकी ठीक से देखभाल भी नहीं हो पा रही है। निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए और इन कैमरों को इंटीग्रेटेड कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाए। ताकि सेंटर से अस्पतालों में होने वाले इलाज पर नजर रखी जा सके। उन्होंने एडी हेल्थ को निर्देश दिए कि कोरोना से संक्रमित मरीजों के इलाज का प्रोटोकाल निर्धारित किया जाए। किस मरीज को कौन सी दवा दी जानी है यह डॉक्टर निर्धारित करेंगे। कई बार ऐसा देखने में आता है कि डॉक्टर तीमारदारों के दबाव में दवा लिख रहे हैं या फिर ऐसी दवा लिख रहे हैं जो आसानी से बाजार में उपलब्ध ही नहीं है। मंडलायुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि किसी मरीज को ऑक्सीजन की कमी नहीं होनी चाहिए। पूरे मंडल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में ऑक्सीजन हेल्प लाइन सेवा दी जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे निजी अस्पतालों में मरीजों से ओवर चार्जिंग पर भी नजर रखें।
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रोजगार उपलब्ध कराने पर दिया जोर
मंडलायुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की ओर से जिन कार्यों की अनुमति है उनको नहीं रोका जाए। मनरेगा के तहत कार्य कराए जाएंगे। लॉकडाउन की वजह से जिनके सामने रोजी रोटी का संकट है उनको रोजगार उपलब्ध कराए जाएं।
बहाना करके छुट्टी पर जाने वालों पर होगी कार्रवाई
मंडलायुक्त ने कहा कि हमारे कई अधिकारी अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात कार्य कर रहे हैं। कई अधिकारी और कर्मचारी संक्रमण की चपेट में भी आए हैं, उनको प्राथमिकता के आधार पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं कुछ अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जो बहाना करके घर में बैठ गए हैं। ऐसे लोगों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। संकट की घड़ी में हमें सबकी मदद करनी है।
हल्के लक्षण होने पर भी की जांच कराने की अपील
मंडलायुक्त ने लोगों से अपील की है कि वो कोरोना संक्रमण को हल्के में न लें। उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर लोगों में जागरूकता का अभाव है। कोरोना के लक्षण होने के बाद भी लोग जांच कराने से घबराते हैं। कई गांवों में जब स्वास्थ्य विभाग की टीम गई तो लोगों ने जांच कराने से मना कर दिया। जांच नहीं होने की स्थिति में इलाज देर से शुरू होता है। ऐसी स्थिति में मरीज की हालत बिगड़ सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोरोना संक्रमण हल्के लक्षण होने पर जांच जरूर कराएं। ताकि समय पर इलाज मिल सके।