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Rampur News: शादी अनुदान के 189 आवेदनों में से पहले 25, अब रह गए 10 पात्र
Fri, 01 Mar 2024 11:28 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Fri, 01 Mar 2024 11:28 PM IST
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शाहबाद (रामपुर)। सामूहिक विवाह योजना के आवेदनों में जिस तरह का फर्जीबाड़ा पकड़ा गया है, उसके अनुसार जांच में मात्र पांच प्रतिशत आवेदन सही पाए गए है। 95 प्रतिशत आवेदन फर्जीबाड़े की भेंट चढ़ गए।
पिछले दिनों में शादी अनुदान लेने के लिए बिचौलियों के माध्यम से फर्जी लाभर्थियों ने सामूहिक विवाह योजना के आवेदन कर दिए थे। करीब 189 आवेदन नगर पंचायत को प्राप्त हुए थे। जिसकी जांच के लिए ईओ पुनीत कुमार ने नगर पंचायत कर्मी मुजीब मियां, नावेद मियां, विजय सिंह और अरशद समेत कई कर्मचारी लगाए थे। जांच शुरू होते ही चौकाने वाले खुलासे होने लगे। जांच में पता लगा कि बिचौलियों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों को लाभार्थी बना दिया और उसके बाद सामूहिक विवाह योजना का आवेदन करवा दिए। जांच में चौकाने वाली बात यह सामने आई कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बाद उन पर बिचौलियों ने बीस-बीस आवेदनों पर अपने नंबर डाल दिए थे। जिसके बाद जांच में सारा भंडाफोड़ हो गया था। जांच के दौरान नाबालिग दूल्हा मिला, मां और बेटी द्वारा किया गया सामूहिक विवाह योजना का फर्जी आवेदन निकला। सात बच्चों की मां शादी अनुदान पाने के लिए अविवाहिता बन गई। जांच में 189 आवेदन में से मात्र 25 आवेदन पात्रता की श्रेणी में आए थे। लेकिन जांच ढंग से की गई, तो पता लगा कि इन 25 आवेदन में से भी 15 आवेदन फर्जीबाड़े की भेंट चढ़ गए। मात्र दस आवेदन ही पात्रता की श्रेणी में आए। देखा जाए कि ढंग से जांच होने पर 189 में से मात्र 10 आवेदन पात्रता की श्रेणी में है। यानि पांच प्रतिशत आवेदन सही थे। 95 प्रतिशत आवेदन फर्जी थे। मतलब साफ है कि बिचौलिए फर्जी लाभर्थियों के माध्यम से सरकार को करीब 91 लाख 29 हजार का चूना लगाने की तैयारी में थे। जिसके जांच में भंडाफोड़ हुआ है। अब देखना यह है कि इतनी बड़े भ्रष्टाचार करने वाले बिचौलियों के खिलाफ अधिकारी कार्रवाई करते है या नही।
189 आवेदन में से अब केवल 10 आवेदन ही सही पाए गए है। जांच में 179 आवेदन फर्जी पाए गए है। -पुनीत कुमार, अधिशासी अधिकारी
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पिछले दिनों में शादी अनुदान लेने के लिए बिचौलियों के माध्यम से फर्जी लाभर्थियों ने सामूहिक विवाह योजना के आवेदन कर दिए थे। करीब 189 आवेदन नगर पंचायत को प्राप्त हुए थे। जिसकी जांच के लिए ईओ पुनीत कुमार ने नगर पंचायत कर्मी मुजीब मियां, नावेद मियां, विजय सिंह और अरशद समेत कई कर्मचारी लगाए थे। जांच शुरू होते ही चौकाने वाले खुलासे होने लगे। जांच में पता लगा कि बिचौलियों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों को लाभार्थी बना दिया और उसके बाद सामूहिक विवाह योजना का आवेदन करवा दिए। जांच में चौकाने वाली बात यह सामने आई कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बाद उन पर बिचौलियों ने बीस-बीस आवेदनों पर अपने नंबर डाल दिए थे। जिसके बाद जांच में सारा भंडाफोड़ हो गया था। जांच के दौरान नाबालिग दूल्हा मिला, मां और बेटी द्वारा किया गया सामूहिक विवाह योजना का फर्जी आवेदन निकला। सात बच्चों की मां शादी अनुदान पाने के लिए अविवाहिता बन गई। जांच में 189 आवेदन में से मात्र 25 आवेदन पात्रता की श्रेणी में आए थे। लेकिन जांच ढंग से की गई, तो पता लगा कि इन 25 आवेदन में से भी 15 आवेदन फर्जीबाड़े की भेंट चढ़ गए। मात्र दस आवेदन ही पात्रता की श्रेणी में आए। देखा जाए कि ढंग से जांच होने पर 189 में से मात्र 10 आवेदन पात्रता की श्रेणी में है। यानि पांच प्रतिशत आवेदन सही थे। 95 प्रतिशत आवेदन फर्जी थे। मतलब साफ है कि बिचौलिए फर्जी लाभर्थियों के माध्यम से सरकार को करीब 91 लाख 29 हजार का चूना लगाने की तैयारी में थे। जिसके जांच में भंडाफोड़ हुआ है। अब देखना यह है कि इतनी बड़े भ्रष्टाचार करने वाले बिचौलियों के खिलाफ अधिकारी कार्रवाई करते है या नही।
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189 आवेदन में से अब केवल 10 आवेदन ही सही पाए गए है। जांच में 179 आवेदन फर्जी पाए गए है। -पुनीत कुमार, अधिशासी अधिकारी