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प्लास्टिक की बोतलों की जगह अब तांबे के लोटे से पानी पिएंगे अफसर
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रामपुर। जिलेभर के अधिकारी अब प्लास्टिक की बोतलों की जगह तांबे के लोटे से पानी पिएंगे। बुधवार अधिकारियों की बैठक में पहली बार प्लास्टिक की बोतलों की जगह तांबे के लोटे और स्टील के ग्लास नजर आए। पर्यावरण के मद्देनजर जिलाधिकारी ने यह फैसला किया है।
प्लास्टिक के प्रयोग रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनियाभर को संदेश दे रहे हैं। अपने देश में भी सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक का उपयोग न करने का फैसला किया गया है। दरअसल, प्लास्टिक से पर्यावरण को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचता है। जलस्तर घटने से लेकर प्रदूषण बढ़ते तक प्लास्टिक की भूमिका अहम है। इसी वजह से सरकार ने अब प्लास्टिक के प्रयोग को बंद कर दिया है। रामपुर में जिलाधिकारी कार्यालय से इसकी शुरुआत हो गई। पहले कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों को बैठक में बोतल बंद पानी दिया जाता है। साथ ही शीशे का ग्लास होता था, लेकिन अब यहां न तो शीशे का ग्लास मिलेगा और न ही प्लास्टिक की बोतल में पानी। बुधवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की बैठक शुरु हुई तो अफसरों के सामने तांबे का लोटा और स्टील का ग्लास आया। तांबे के लोटे में पानी भरा हुआ था, जो स्टील की प्लेट से ढका हुआ था। ऐसे में अधिकारियों को आवश्यकता पड़ने पर लोटे से पानी अपने गिलास में करके पीना था। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह से अधिकारियों को बोतल बंद पानी पीने से बचने की सलाह दी और अपील की प्लास्टिक का उपयोग अपने कार्यालयों में न होने दें।
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प्लास्टिक के प्रयोग रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनियाभर को संदेश दे रहे हैं। अपने देश में भी सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक का उपयोग न करने का फैसला किया गया है। दरअसल, प्लास्टिक से पर्यावरण को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचता है। जलस्तर घटने से लेकर प्रदूषण बढ़ते तक प्लास्टिक की भूमिका अहम है। इसी वजह से सरकार ने अब प्लास्टिक के प्रयोग को बंद कर दिया है। रामपुर में जिलाधिकारी कार्यालय से इसकी शुरुआत हो गई। पहले कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों को बैठक में बोतल बंद पानी दिया जाता है। साथ ही शीशे का ग्लास होता था, लेकिन अब यहां न तो शीशे का ग्लास मिलेगा और न ही प्लास्टिक की बोतल में पानी। बुधवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की बैठक शुरु हुई तो अफसरों के सामने तांबे का लोटा और स्टील का ग्लास आया। तांबे के लोटे में पानी भरा हुआ था, जो स्टील की प्लेट से ढका हुआ था। ऐसे में अधिकारियों को आवश्यकता पड़ने पर लोटे से पानी अपने गिलास में करके पीना था। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह से अधिकारियों को बोतल बंद पानी पीने से बचने की सलाह दी और अपील की प्लास्टिक का उपयोग अपने कार्यालयों में न होने दें।
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