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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   No contract for hoardings and banners has been awarded for four years, yet promotional material is still displayed across the city.

Rampur News: चार साल से नहीं हुआ होर्डिंग-बैनर का ठेका फिर भी शहर में लगी प्रचार सामग्री

Fri, 09 Oct 2026 01:46 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Fri, 09 Oct 2026 01:46 AM IST
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No contract for hoardings and banners has been awarded for four years, yet promotional material is still displayed across the city.
रामपुर। शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर मनमानी से होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाए जा रहे हैं। शौकत अली रोड, सिविल लाइंस, शाहबाद गेट, ज्वाला नगर समेत शहर के कई प्रमुख इलाकों में खंभों, बिजली के पोल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में प्रचार सामग्री लगी हुई है। दुकानदारों ने भी दुकानों के सामने सड़क तक होर्डिंग और बैनर लगा रखे हैं। इससे कई जगह सड़क का हिस्सा तक घिर गया है।
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नगर पालिका से मिली जानकारी के मुताबिक शहर में होर्डिंग-बैनर लगाने का अंतिम ठेका वर्ष 2022 में करीब सवा तीन लाख रुपये में एक साल के लिए हुआ था। ठेके की अवधि समाप्त होने के बाद ठेकेदार की ओर से निर्धारित धनराशि जमा नहीं की गई। इसके चलते नगर पालिका ने बकाया वसूली के लिए आरसी भी जारी कराई थी। इसके बाद नया ठेका नहीं कराया गया।
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नियम के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों, खंभों और अन्य निर्धारित स्थलों पर विज्ञापन या प्रचार सामग्री लगाने के लिए नगर पालिका की अनुमति और निर्धारित शुल्क जरूरी है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह बिना अनुमति होर्डिंग-बैनर लगाए जाने की तस्वीर सामने आ रही है।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले करीब चार साल से होर्डिंग-बैनर लगाने का ठेका ही नहीं हुआ तो फिर शहर में जगह-जगह प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति कौन दे रहा है। सामाजिक संगठनों, राजनीतिक लोगों और विभिन्न कंपनियों के प्रचार से जुड़े पोस्टर-बैनर खुलेआम लगाए जा रहे हैं। ऐसे में नगर पालिका की निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।



शहर के प्रमुख मार्गों पर दुकानदारों ने भी अपनी दुकानों के प्रचार के लिए बड़े-बड़े बोर्ड और बैनर सड़क की ओर तक निकाल रखे हैं। कई जगह बिजली के खंभों और अन्य सार्वजनिक ढांचों पर पोस्टर चस्पा हैं। इससे न केवल शहर का स्वरूप बिगड़ रहा है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी परेशानी पैदा हो रही है। शौकत अली रोड, सिविल लाइंस, शाहबाद गेट और ज्वाला नगर जैसे व्यस्त इलाकों में स्थिति अधिक स्पष्ट दिखाई देती है। यहां राजनीतिक, सामाजिक कार्यक्रमों, निजी संस्थानों और कंपनियों के प्रचार वाले बैनर लगे हुए हैं। सवाल यह भी है कि यदि इनके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है तो नगर पालिका की ओर से इन्हें हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

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राजस्व को भी लग रहा झटका

होर्डिंग-बैनर का ठेका नहीं होने से एक ओर जहां सार्वजनिक स्थानों पर मनमानी बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका को विज्ञापन शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। 2022 में हुए ठेके से यह साफ है कि विज्ञापन से नगर पालिका को आय का स्रोत मिलता रहा है, लेकिन ठेका बंद होने के बाद से राजस्व को झटका लग रहा है।




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इस महीने में बोर्ड बैठक प्रस्तावित है। इसमें होर्डिंग-बैनर के ठेके के लिए भी प्रस्ताव रख दिया जाएगा, जिससे नगर पालिका के राजस्व को बढ़ावा मिल सके, जबकि अभियान चलवाकर लगे हुए होर्डिंग-बैनर और पोस्टर हटवा दिए जाएंगे। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
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