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रेफरल सेंटर बनी सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Mon, 06 Jun 2016 12:43 AM IST
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नवजात िशशिशु इकाई
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गंभीर नवजातों के उपचार के लिए सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड रूम बनकर रह गया है। जिला महिला अस्पताल में स्थित एनएससीयू में आज तक किसी नवजात को उपचार नहीं मिल सका।
यहां उपकरण तो हैं लेकिन स्टाफ नहीं है। जन्म के उपरांत क्रिटिकल अवस्था वाले नवजात शिशुओं को अस्पताल से मुरादाबाद जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। वहीं मुरादाबाद न जाने वालों को 1000-1200 रुपया प्रतिदिन खर्च कर नवजात का इलाज कराना मजबूरी है।
इसलिए की गई थी एसएनसीयू की स्थापना : संस्थागत या घरेलू प्रसव के बाद गंभीर अवस्था के नवजात के उपचार के लिए एसएनसीयू की स्थापना की गई थी। इसमें कम वजन, कुपोषित, पीलिया या अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित नवजात शिशुओं को योग्य व प्रशिक्षित स्टाफ की देखरेख में समुचित चिकित्सीय देखभाल व उपचार दिया जा सके। ताकि शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
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यहां उपकरण तो हैं लेकिन स्टाफ नहीं है। जन्म के उपरांत क्रिटिकल अवस्था वाले नवजात शिशुओं को अस्पताल से मुरादाबाद जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। वहीं मुरादाबाद न जाने वालों को 1000-1200 रुपया प्रतिदिन खर्च कर नवजात का इलाज कराना मजबूरी है।
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इसलिए की गई थी एसएनसीयू की स्थापना : संस्थागत या घरेलू प्रसव के बाद गंभीर अवस्था के नवजात के उपचार के लिए एसएनसीयू की स्थापना की गई थी। इसमें कम वजन, कुपोषित, पीलिया या अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित नवजात शिशुओं को योग्य व प्रशिक्षित स्टाफ की देखरेख में समुचित चिकित्सीय देखभाल व उपचार दिया जा सके। ताकि शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
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