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Rampur News: रुहेला सरदार के नाम पर पड़ा मोहल्ला गूजर टोला
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रामपुर। शहर की घनी आबादी वाला मोहल्ला गूजर टोला रुहेला सरदार गूजर खां के नाम पर बसाया गया था। वर्ष 1775 में रुहेला सरदार रामपुर आकर बसे थे। उनके नाम पर शहर के कई मोहल्लों का नाम हैं।
रामपुर के पहले नवाब फैजुल्लाह खां ने 1775 में अपनी रियासत में कई रुहेला सरदारों को अफगानिस्तान से लाकर बसाया था और उन्हें एक-एक प्लॉट आवंटित किया था। रियासतकाल के जानकार शौकत अली खां ने अपनी पुस्तक रामपुर का इतिहास में जिक्र करते हुए लिखा है कि रामपुर को साल 1775 में बसाया गया था। नवाब फैजुल्लाह खां ने सुरक्षा की दृष्टि से रुहेला सरदारों को अपने यहां बसाया था।
बाद में मोहल्लों का नाम भी उन सरदारों के नाम पर ही पड़ गया, जो आज तक कायम है। इन्हीं रुहेला सरदारों में गूजर खां भी थे। उन्हें शहर के बीच प्लॉट आवंटित किया गया था। धीरे-धीरे आसपास घनी बस्ती हो गई और मोहल्ले का नाम गूजर टोला पड़ गया। करीब 225 साल पुराने इस मोहल्ले की तस्वीर अब बदल गई है। यह मोहल्ला गंज थाना क्षेत्र में आता है।
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रामपुर के पहले नवाब अपने साथ रुहेला सरदार भी साथ लाए थे। इन्हीं में से एक सरदार थे गूजर खां। नवाब ने उनको यहां एक प्लाॅट दिया था, जिसमें वह रहते थे। उनके साथ उनके साथी भी रहा करते थे। बाद में यहां पूरा मोहल्ला बस गया और उसका नाम मोहल्ला गूजर टोला पड़ गया। - महेंद्र सक्सेना, इतिहासकार
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रामपुर के पहले नवाब फैजुल्लाह खां ने 1775 में अपनी रियासत में कई रुहेला सरदारों को अफगानिस्तान से लाकर बसाया था और उन्हें एक-एक प्लॉट आवंटित किया था। रियासतकाल के जानकार शौकत अली खां ने अपनी पुस्तक रामपुर का इतिहास में जिक्र करते हुए लिखा है कि रामपुर को साल 1775 में बसाया गया था। नवाब फैजुल्लाह खां ने सुरक्षा की दृष्टि से रुहेला सरदारों को अपने यहां बसाया था।
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बाद में मोहल्लों का नाम भी उन सरदारों के नाम पर ही पड़ गया, जो आज तक कायम है। इन्हीं रुहेला सरदारों में गूजर खां भी थे। उन्हें शहर के बीच प्लॉट आवंटित किया गया था। धीरे-धीरे आसपास घनी बस्ती हो गई और मोहल्ले का नाम गूजर टोला पड़ गया। करीब 225 साल पुराने इस मोहल्ले की तस्वीर अब बदल गई है। यह मोहल्ला गंज थाना क्षेत्र में आता है।
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रामपुर के पहले नवाब अपने साथ रुहेला सरदार भी साथ लाए थे। इन्हीं में से एक सरदार थे गूजर खां। नवाब ने उनको यहां एक प्लाॅट दिया था, जिसमें वह रहते थे। उनके साथ उनके साथी भी रहा करते थे। बाद में यहां पूरा मोहल्ला बस गया और उसका नाम मोहल्ला गूजर टोला पड़ गया। - महेंद्र सक्सेना, इतिहासकार