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Rampur News: हाथ कारीगरों के कौशल की याद दिलाता है मोहल्ला फर्राशखाना
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रामपुर। किला के पास स्थित मोहल्ला फर्राशखाना नवाब दौर के हाथ कारीगरों की कौशल की याद दिलाता है। यहां रहने वाले हाथ कारीगर नवाब के दरबार से लेकर उनके महलों तक के लिए आलीशान दरी और कालीन बनाते थे। यहां दरी व कालीन का भंडार हुआ करता था। इसलिए इस मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। देश के विभाजन के बाद आए पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को भी नवाब ने यहां रहने के लिए जगह दी। रामपुर में 10 नवाबों ने करीब पौने दो सौ साल तक शासन किया। नवाबी दौर की तमाम ऐतिहासिक चीजें आज भी रामपुर की शान हैं। नवाबों ने शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी काम किया। इसी के चलते जिले में तमाम सरकारी इंटर कॉलेज हैं। नवाबी दौर में बने तमाम भवनों को स्कूल के रूप में विकसित कर दिया गया। रामपुर के तमाम मोहल्लों का नाम भी नवाबों के शासन के समय से ही चलता आ रहा है। ऐसा ही एक मोहल्ला है फर्राशखाना।
फर्राशखाना किला के पास स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार फर्राशखाना मोहल्ला में वाबों के हाथ कारीगर रहा करते थे। यहां पर फर्श पर बिछाने वाली कालीन व दरी बनाई जाती थीं। इसके साथ ही फर्श को रंगे बिरंगे तरीके से सजाने का काम किया जाता था। इतिहासकार बताते हैं कि नवाबी शासन में यहां तैयार की गईं कालीन और दरियों को नवाबों के महल व दरबारों तक पहुंचाया जाता था। यह दौर नवाब हामिद अली खां के समय का था। फर्राश का मतलब होता है जमीन पर दरी बिछाने वाला व्यक्ति। इसी से मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। देश के बंटवारे के बाद आए शरणार्थियों को यहां बसा दिया गया। अब सभी इस मोहल्ले को फर्राशखाना के नाम से ही जानते हैं।
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यहां पर नवाबी शासन में दरी व कालीन बनाने का काम हुआ करता था। हाथ कारीगर यहीं रहा करते थे। तभी से इस मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। - नफीस सिद्दीकी, इतिहासकार
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बंटवारे के बाद तमाम लोग रामपुर आकर रहने लगे। उस वक्त यहां आए लोगों को भी इस मोहल्ले में शरण दी गई। 1950 से यहां पर करीब 75 शरणार्थी परिवार रह रहे हैं। - मनीष कथूरिया, स्थानीय निवासी
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फर्राशखाना किला के पास स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार फर्राशखाना मोहल्ला में वाबों के हाथ कारीगर रहा करते थे। यहां पर फर्श पर बिछाने वाली कालीन व दरी बनाई जाती थीं। इसके साथ ही फर्श को रंगे बिरंगे तरीके से सजाने का काम किया जाता था। इतिहासकार बताते हैं कि नवाबी शासन में यहां तैयार की गईं कालीन और दरियों को नवाबों के महल व दरबारों तक पहुंचाया जाता था। यह दौर नवाब हामिद अली खां के समय का था। फर्राश का मतलब होता है जमीन पर दरी बिछाने वाला व्यक्ति। इसी से मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। देश के बंटवारे के बाद आए शरणार्थियों को यहां बसा दिया गया। अब सभी इस मोहल्ले को फर्राशखाना के नाम से ही जानते हैं।
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यहां पर नवाबी शासन में दरी व कालीन बनाने का काम हुआ करता था। हाथ कारीगर यहीं रहा करते थे। तभी से इस मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। - नफीस सिद्दीकी, इतिहासकार
बंटवारे के बाद तमाम लोग रामपुर आकर रहने लगे। उस वक्त यहां आए लोगों को भी इस मोहल्ले में शरण दी गई। 1950 से यहां पर करीब 75 शरणार्थी परिवार रह रहे हैं। - मनीष कथूरिया, स्थानीय निवासी

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