फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   Mohalla Farrashkhana reminds of the skill of hand artisans

Rampur News: हाथ कारीगरों के कौशल की याद दिलाता है मोहल्ला फर्राशखाना

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 15 Apr 2024 03:32 AM IST
विज्ञापन
Mohalla Farrashkhana reminds of the skill of hand artisans
रामपुर। किला के पास स्थित मोहल्ला फर्राशखाना नवाब दौर के हाथ कारीगरों की कौशल की याद दिलाता है। यहां रहने वाले हाथ कारीगर नवाब के दरबार से लेकर उनके महलों तक के लिए आलीशान दरी और कालीन बनाते थे। यहां दरी व कालीन का भंडार हुआ करता था। इसलिए इस मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। देश के विभाजन के बाद आए पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को भी नवाब ने यहां रहने के लिए जगह दी। रामपुर में 10 नवाबों ने करीब पौने दो सौ साल तक शासन किया। नवाबी दौर की तमाम ऐतिहासिक चीजें आज भी रामपुर की शान हैं। नवाबों ने शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी काम किया। इसी के चलते जिले में तमाम सरकारी इंटर कॉलेज हैं। नवाबी दौर में बने तमाम भवनों को स्कूल के रूप में विकसित कर दिया गया। रामपुर के तमाम मोहल्लों का नाम भी नवाबों के शासन के समय से ही चलता आ रहा है। ऐसा ही एक मोहल्ला है फर्राशखाना।
विज्ञापन

फर्राशखाना किला के पास स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार फर्राशखाना मोहल्ला में वाबों के हाथ कारीगर रहा करते थे। यहां पर फर्श पर बिछाने वाली कालीन व दरी बनाई जाती थीं। इसके साथ ही फर्श को रंगे बिरंगे तरीके से सजाने का काम किया जाता था। इतिहासकार बताते हैं कि नवाबी शासन में यहां तैयार की गईं कालीन और दरियों को नवाबों के महल व दरबारों तक पहुंचाया जाता था। यह दौर नवाब हामिद अली खां के समय का था। फर्राश का मतलब होता है जमीन पर दरी बिछाने वाला व्यक्ति। इसी से मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। देश के बंटवारे के बाद आए शरणार्थियों को यहां बसा दिया गया। अब सभी इस मोहल्ले को फर्राशखाना के नाम से ही जानते हैं।
विज्ञापन

----------------------------
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां पर नवाबी शासन में दरी व कालीन बनाने का काम हुआ करता था। हाथ कारीगर यहीं रहा करते थे। तभी से इस मोहल्ले का नाम फर्राशखाना पड़ गया। - नफीस सिद्दीकी, इतिहासकार
--------------------
बंटवारे के बाद तमाम लोग रामपुर आकर रहने लगे। उस वक्त यहां आए लोगों को भी इस मोहल्ले में शरण दी गई। 1950 से यहां पर करीब 75 शरणार्थी परिवार रह रहे हैं। - मनीष कथूरिया, स्थानीय निवासी

विक्की, दुकानदार

विक्की, दुकानदार

विक्की, दुकानदार

विक्की, दुकानदार

विक्की, दुकानदार

विक्की, दुकानदार

विक्की, दुकानदार

विक्की, दुकानदार

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed