{"_id":"660090b3cf6c86b8c3000c97","slug":"mohalla-bhainskhana-now-replaces-nawabs-stables-rampur-news-c-282-1-rmp1004-118799-2024-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur News: नवाबों के तबेले की जगह अब मोहल्ला भैंसखाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur News: नवाबों के तबेले की जगह अब मोहल्ला भैंसखाना
विज्ञापन
रामपुर। नवाबी दौर में शहर के बीचोंबीच नवाबों ने भैंसों के रहने के लिए तबेला बनवाया था। उनकी देखभाल के लिए कर्मचारी भी रखे गए थे। इन भैंसों का दूध नवाब परिवार को दिया जाता था। नवाबी रियासत खत्म होने के साथ यहां न तो भैंसे रहीं और न ही उनको पालने वाले लोग। बाद में यहां पर पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को रहने के लिए जगह दी गई। भैंसों के बांधे जाने के चलते मोहल्ले का नाम भैंसखाना पड़ गया। रामपुर नवाबों का शहर रहा है। नवाबों ने अपने शौक और उस वक्त की जरूरत के हिसाब से शहर को बसाया। नवाबों ने अपने नाम से शैक्षिक संस्थान भी खोले तो तमाम ऐतिहासिक इमारतों को धरोहर के रूप में संजोया। इतिहासकारों के अनुसार रामपुर के मोहल्लों का भी अपना इतिहास है। शहर के लगभग हर एक मोहल्ले की याद नवाब परिवार से जुड़ी है।
इतिहासकार बताते हैं कि रियासतकाल में यहां नवाबों की भैंसें पाली जाती थीं। नवाब हामिद अली खां ने भैंसों को पालने के लिए जिला अस्पताल रोड पर भैंसखाना बनवाया, इसमें करीब सौ से ज्यादा देशी व विदेशी नस्लों की भैंसे पाली जाती थीं। नवाबों के कर्मचारी इसी मोहल्ले में रहकर भैंसों की की देखभाल किया करते थे। नवाबी दौर खत्म होने के बाद भी शहर के बीच स्थित इस स्थान का नाम भैंसखाना पड़ गया। बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को नवाबों ने यहां रहने की जगह दी और पूरा मोहल्ला बस गया।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
नवाब हामिद अली खां के शासनकाल में शहर में काफी संख्या में भैंसें पाली जाती थीं। इन भैंसों का दूध नवाब परिवार को दिया जाता था। बाद में यहां शरणार्थियों को बसाया गया। - नफीस सिद्दीकी, इतिहासकार
विज्ञापन
इतिहासकार बताते हैं कि रियासतकाल में यहां नवाबों की भैंसें पाली जाती थीं। नवाब हामिद अली खां ने भैंसों को पालने के लिए जिला अस्पताल रोड पर भैंसखाना बनवाया, इसमें करीब सौ से ज्यादा देशी व विदेशी नस्लों की भैंसे पाली जाती थीं। नवाबों के कर्मचारी इसी मोहल्ले में रहकर भैंसों की की देखभाल किया करते थे। नवाबी दौर खत्म होने के बाद भी शहर के बीच स्थित इस स्थान का नाम भैंसखाना पड़ गया। बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को नवाबों ने यहां रहने की जगह दी और पूरा मोहल्ला बस गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
नवाब हामिद अली खां के शासनकाल में शहर में काफी संख्या में भैंसें पाली जाती थीं। इन भैंसों का दूध नवाब परिवार को दिया जाता था। बाद में यहां शरणार्थियों को बसाया गया। - नफीस सिद्दीकी, इतिहासकार