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मनरेगा ने साढ़े सात हजार से अधिक प्रवासी मजदूर परिवारों के घरों में जलाया चूल्हा
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दढ़ियाल के ग्राम भाऊपुरा में काम करते मनरेगा मजदूर।फोटो-संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RAMPUR
रामपुर। कोरोना महामारी की त्रासदी का शिकार हुए मजदूरों को मनरेगा ने आर्थिक रूप से नया जीवन दिया है। मजदूरों के बुझे चूल्हों को जलाकर दोबारा परिवार के लिए रोटी और मजदूर के लिए रोजी का इंतजाम मनरेगा से किया गया। जिले में 7785 अन्य प्रदेशों से आए मजदूर परिवारों के मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाए जा चुके हैं। जिससे इन मजदूरों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट दूर हो गया है। वहीं, इसके साथ ही योग्यता के आधार पर प्रवासी मजदूरों का सर्वे भी किया जा रहा है। जिससे उन्हें उनकी योग्यता के आधार स्वरोजगार, रोजगार या कारोबार से जोड़ा जा सके।
कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के बाद जनपद में बड़ी संख्या में अन्य प्रदेशों से मजदूर वापस आ रहे हैं। इन मजदूरों के कोरोना संक्रमण की जांच के बाद इन्हें मनरेगा के तहत पंजीकृत कर जॉब कार्ड बनाया जा रहा है और अपने ही जनपद में रोजगार से जोड़ा रहा है। जिले में अब तक करीब 22 हजार प्रवासी मजदूर आ चुके हैं, इनमें से 15,982 मजदूर मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं।
फैक्ट फाइल
जिले में कुल सक्रिय मनरेगा मजदूरों की संख्या एक लाख चार हजार है।
इनमें से 89 हजार मजदूर पुराने और शेष प्रवासी मजदूर हैं।
जिले में अभी तक करीब पांच लाख मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं।
जिले में मनरेगा मजदूरों को करीब साढ़े छह करोड़ की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है।
मौजूदा समय में जिले में 468 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कार्य किए जा रहे हैं।
जिले में अभी तक 15982 प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया गया है।
इन कार्यों में लगे प्रवासी अनस्क्लिड मजदूर
संपर्क मार्ग निर्माण, तालाब निर्माण, गूल निर्माण, नहरों की सफाई, नाली-खड़ंजा निर्माण, कायाकल्प के तहत स्कूलों में जल संरक्षण निर्माण कार्य आदि।
क्या बोले अन्य प्रदेशों से आए मजदूर
मैं हरियाणा में काम करता था, वहां पर 12 घंटे की मजदूरी के बाद भी जैसे-तैसे ही गुजारा हो रहा था। लॉकडाउन में गांव वापस आ गया तो यहां पर मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाकर रोजगार से जोड़ दिया गया। अब कम घंटे काम करना पड़ रहा है और दोपहर में आराम भी कर लेते हैं। मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी से परिवार का खर्चा चल रहा है और परिजनों के साथ रहने को भी मिल रहा है।
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- नरेंद्र कुमार
मैं राजस्थान में वेल्डिंग का कार्य करता था। लॉकडाउन में गांव वापस आ गया, यहां पर मनरेगा के तहत रोजगार मिलने लगा है। अब यहीं पर रहकर काम करूंगा, कहीं बाहर नहीं जाऊंगा।
- अरविंद कुमार
जिले में अन्य प्रदेशों से आ रहे मजदूरों को उनकी योग्यता के आधार पर सर्वे कर सूची तैयार की जा रही है। अप्रशिक्षित व कम पढ़े-लिखे गैर हुनरमंद मजदूरों को अभी से ही जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी का कार्य कराया जा रहा है। जिले में मौजूदा समय में 15982 प्रवासी मजदूर कार्य कर रहे हैं।
- प्रभुदयाल, डीसी मनरेगा
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कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के बाद जनपद में बड़ी संख्या में अन्य प्रदेशों से मजदूर वापस आ रहे हैं। इन मजदूरों के कोरोना संक्रमण की जांच के बाद इन्हें मनरेगा के तहत पंजीकृत कर जॉब कार्ड बनाया जा रहा है और अपने ही जनपद में रोजगार से जोड़ा रहा है। जिले में अब तक करीब 22 हजार प्रवासी मजदूर आ चुके हैं, इनमें से 15,982 मजदूर मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं।
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जिले में कुल सक्रिय मनरेगा मजदूरों की संख्या एक लाख चार हजार है।
इनमें से 89 हजार मजदूर पुराने और शेष प्रवासी मजदूर हैं।
जिले में अभी तक करीब पांच लाख मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं।
जिले में मनरेगा मजदूरों को करीब साढ़े छह करोड़ की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है।
मौजूदा समय में जिले में 468 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कार्य किए जा रहे हैं।
जिले में अभी तक 15982 प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया गया है।
इन कार्यों में लगे प्रवासी अनस्क्लिड मजदूर
संपर्क मार्ग निर्माण, तालाब निर्माण, गूल निर्माण, नहरों की सफाई, नाली-खड़ंजा निर्माण, कायाकल्प के तहत स्कूलों में जल संरक्षण निर्माण कार्य आदि।
क्या बोले अन्य प्रदेशों से आए मजदूर
मैं हरियाणा में काम करता था, वहां पर 12 घंटे की मजदूरी के बाद भी जैसे-तैसे ही गुजारा हो रहा था। लॉकडाउन में गांव वापस आ गया तो यहां पर मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाकर रोजगार से जोड़ दिया गया। अब कम घंटे काम करना पड़ रहा है और दोपहर में आराम भी कर लेते हैं। मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी से परिवार का खर्चा चल रहा है और परिजनों के साथ रहने को भी मिल रहा है।
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- नरेंद्र कुमार
मैं राजस्थान में वेल्डिंग का कार्य करता था। लॉकडाउन में गांव वापस आ गया, यहां पर मनरेगा के तहत रोजगार मिलने लगा है। अब यहीं पर रहकर काम करूंगा, कहीं बाहर नहीं जाऊंगा।
- अरविंद कुमार
जिले में अन्य प्रदेशों से आ रहे मजदूरों को उनकी योग्यता के आधार पर सर्वे कर सूची तैयार की जा रही है। अप्रशिक्षित व कम पढ़े-लिखे गैर हुनरमंद मजदूरों को अभी से ही जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी का कार्य कराया जा रहा है। जिले में मौजूदा समय में 15982 प्रवासी मजदूर कार्य कर रहे हैं।
- प्रभुदयाल, डीसी मनरेगा