{"_id":"58ffa6004f1c1b9228c0d7b0","slug":"lemon-crop","type":"story","status":"publish","title_hn":"तरबूज में लगा कीड़ा, पालेज वालों ने माथा पीटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तरबूज में लगा कीड़ा, पालेज वालों ने माथा पीटा
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर/शाहबाद।
Updated Wed, 26 Apr 2017 01:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रामगंगा की तलहटी में लगी करीब पांच हजार हेक्टेयर तरबूज-खरबूज की पॉलेज में कीड़ा लगने से तरबूज की फसल को भारी नुकसान होने लगा है। इलाके के किसान माथा पीट रहे हैं, लेकिन जिले के उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र को खबर ही नहीं है। तरबूज में रूझ नाम के कीड़े ने ऐसा हमला बोला है कि रामगंगा तलहटी में पालेज बर्बादी के दूर से ही दिख रही है।
रामगंगा की तलहटी में शाहबाद-सैफनी व जनपद बरेली की सीमा सिरौली तक करीब पांच हजार हेक्टेयर जमीन पर तरबूज की पालेज होती है। यहां का तरबूज-खरबूज कई राज्यों में जाता है लेकिन सीजन शुरू होते ही किसानों के पास खेतों में ही तरबूजों के ऑर्डर पहले से ही बुक हो जाते हैं। तरबूज-खरबूज काफी मात्रा में कई राज्यों के लिए निर्यात किया जाता है। किसानों ने अनेक तरह के महंगे बीज खरीदकर पालेज की फसल तैयार की थी लेकिन इस बार किसानों को इस तरबूज की खेती से लाखों का नुकसान हो रहा है। अधिकतर किसानों ने जमीन पर ऋण ले रखा है। गर्मी का फल तरबूज जो कि प्यास बुझाने और इंसान के अंदर पानी की कमी को दूर करने के लिए लाभदायक होता है।
विज्ञापन
इस बार पालेज में रूझ कीड़ा लगने से बीमार हो गया है। किसानों के अनुसार इस बार इस खेती से किसानों की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन कीड़े की मार ने फसल को बर्बाद कर दिया है। इस बार तरबूज की बेल में जहरीला कीट रूझ लगने से पालेज खराब हो गई है, पूरी बेल पीली पड़ गई और जड़ें सूख गई हैं। उधर, जिले के उद्यान विभाग और कृषि विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। जिला उद्यान अधिकारी रामनरेश से जब तरबूज में बीमारी की जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई सूचना नहीं है, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को भी कीड़ा लगने की भनक नहीं हैं। किसान पालेज की बर्बादी देखकर माथा पीट रहे हैं।
विज्ञापन
किसानों के अनुसार जहां मुर्गी पालन होता है वहां पर एक कीड़ा रूझ के नाम से पाया जाता है और यह हवा के झोंके में हजारों की तादात में उड़ जाते हैं और तरबूज की बेल की कोप में घुस जाते हैं और बस वहीँ से तरबूज का खराब होना शुरू हो गया है। क्योंकि इलाके में पोल्ट्री फार्म की संख्या अधिक है। किसानों का कहना है कि कीटनाशक दवा का छिड़काव भी इन पर बेअसर रहा। कीड़ा तरबूज की बेल के पत्ते और तने में घुस जाता है और वह इसे ख़राब करने में अहम भूमिका निभाता है। कुछ किसानों ने खेत दो से लेकर चार हजार रुपये बीघा पर ठेके पर ले रखा था। अब कीड़ा लगने से लागत निकलना मुश्किल है।
तरबूज का उत्पादन करने वाली सोनवती कहती हैं कि इस बार खेती में बड़ा नुकसान हुआ है और काफी मेहनत करने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ है। इस बार दो हजार रुपये बीघा जमीन ली और नई रेत भी खेत में डाली गई लेकिन पूरी फसल खराब हो गई। अब इसकी भरपाई भी कैसे होगी। दीमक का क्षेत्र है रामगंगा तलहटी, दौरा करेंगे कृषि वैज्ञानिक रामगंगा की तलहटी दीमक का क्षेत्र है, यहां फसल करने के लिए बड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। दीमक नाशक पाउडर और जैविक खाद ही इसमें कारगर हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फसल की बर्बादी के कारणों की जांच के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से भी टीम शाहबाद में पालेज का दौरा करने जाएगी।