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हिंदी बने राष्ट्र की भाषा, यह सबकी अभिलाषा है............
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रामपुर। पल्लव काव्य मंच की ओर से हिंदी पखवाड़े पर हुए कवि सम्मेलन साहित्यकार सम्मान समारोह में कवियों और साहित्यकारों से अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। स्थानीय और बाहर से आए कवियों ने वीर, हास्य, शृंगार आदि रसों की रचनाओं से लोगों का मन मोह लिया।
मायादेवी धर्मशाला में हुए समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष बरेली के गीतकार डॉ. महेश मधुकर की ओर से दीप प्रज्वलन कर हुआ। सरस्वती वंदना लालकुआं से आए कवि सत्यपाल सिंह सजग ने प्रस्तुत की। गीतकार डॉ. शिवशंकर यजुर्वेदी कहा... बोल जिनके मधुरतम हुए, काम भी जिनके अनुपम हुए। सच का चूमा जिन्होंने शिखर, वे ही नर से नरोत्तम हुए। जितेंद्र कमल आनंद ने हिंदी पर अपनी बात इस तरह की। हिंदी हिंदुस्तान की बिंदी, इसको लाल चमकने दें। वीर रस के कवि राम रतन यादव ने कहा, हिंदी है बिंदी देश की पहचान दोस्तों। हिंदी हमारी आन बान शान दोस्तों। कवि रामकिशोर वर्मा ने संकल्प दोहराया, हिंदी बने राष्ट्र की भाषा यह सबकी अभिलाषा है। टाल मटोल बहुत हो चुकी अब निर्णय की आशा है। कवि महाराज किशोर ने माहौल को बदलते हुए कहा, माँ बाप के दिल का चिराग होती हैं बेटियां। घर के गुलशन की बहार होती हैं बेटियां। कवि ज्ञान प्रकाश राही ने देश का मान बढ़ाते हुए कहा कि खून की हर बूंद से लिख देंगे हिंदुस्तान तुझपे समर्पित है मेरा दिल मेरी जान। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे गजलकार ओंकार सिंह विवेक ने भी अपनी गजलें पेश कीं। इसके अलावा प्रदीप राजपूत माहिर, सचिन कुमार सिंह, महेंद्र पांडेय, रमेश चंद्र जैन सेठी, हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष, राम शंकर शर्मा प्रेमी, गजलकार गीतेश राज नक्श, कुलदीप कल्प आदि ने भी काव्यपाठ किया। अध्यक्षता कर रहे ऋषिकेश से आए बाबा कल्पेश और श्रोताओं की मांग पर पल्लव काव्य मंच के अध्यक्ष डॉ. शिव कुमार शर्मा चंदन ने भी अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया। इस दौरान पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना, महिला महाविद्यालय की पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. किश्वर सुल्ताना, रजा महाविद्यालय के हिंदी के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार, डॉ. केसी दिवाकर, डॉ. मोनिका शर्मा, आशीष पांडेय आदि तमाम साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
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मायादेवी धर्मशाला में हुए समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष बरेली के गीतकार डॉ. महेश मधुकर की ओर से दीप प्रज्वलन कर हुआ। सरस्वती वंदना लालकुआं से आए कवि सत्यपाल सिंह सजग ने प्रस्तुत की। गीतकार डॉ. शिवशंकर यजुर्वेदी कहा... बोल जिनके मधुरतम हुए, काम भी जिनके अनुपम हुए। सच का चूमा जिन्होंने शिखर, वे ही नर से नरोत्तम हुए। जितेंद्र कमल आनंद ने हिंदी पर अपनी बात इस तरह की। हिंदी हिंदुस्तान की बिंदी, इसको लाल चमकने दें। वीर रस के कवि राम रतन यादव ने कहा, हिंदी है बिंदी देश की पहचान दोस्तों। हिंदी हमारी आन बान शान दोस्तों। कवि रामकिशोर वर्मा ने संकल्प दोहराया, हिंदी बने राष्ट्र की भाषा यह सबकी अभिलाषा है। टाल मटोल बहुत हो चुकी अब निर्णय की आशा है। कवि महाराज किशोर ने माहौल को बदलते हुए कहा, माँ बाप के दिल का चिराग होती हैं बेटियां। घर के गुलशन की बहार होती हैं बेटियां। कवि ज्ञान प्रकाश राही ने देश का मान बढ़ाते हुए कहा कि खून की हर बूंद से लिख देंगे हिंदुस्तान तुझपे समर्पित है मेरा दिल मेरी जान। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे गजलकार ओंकार सिंह विवेक ने भी अपनी गजलें पेश कीं। इसके अलावा प्रदीप राजपूत माहिर, सचिन कुमार सिंह, महेंद्र पांडेय, रमेश चंद्र जैन सेठी, हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष, राम शंकर शर्मा प्रेमी, गजलकार गीतेश राज नक्श, कुलदीप कल्प आदि ने भी काव्यपाठ किया। अध्यक्षता कर रहे ऋषिकेश से आए बाबा कल्पेश और श्रोताओं की मांग पर पल्लव काव्य मंच के अध्यक्ष डॉ. शिव कुमार शर्मा चंदन ने भी अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया। इस दौरान पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना, महिला महाविद्यालय की पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. किश्वर सुल्ताना, रजा महाविद्यालय के हिंदी के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार, डॉ. केसी दिवाकर, डॉ. मोनिका शर्मा, आशीष पांडेय आदि तमाम साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
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