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अमनो-अमान की दुआ को उठे लाखों हाथ
अमर उजाला/ ब्यूरो रामपुर
Updated Sat, 02 Jul 2016 01:20 AM IST
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अलिवविदा की नमाज में शािममिल लोग
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अलविदा, अलविदा या शहरुल रमादान। जुमा अलविदा की नमाज के दौरान खुतबे में यह इबारत सुनकर हजारों आंखों से आंसू छलक गए। जुमा अलविदा को नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। उलमा ने तकरीर में जकात की फजीलत बयान की। उलमा ने कहा कि अगर ईद की नमाज से पहले सदका-ए फितर अदा ना किया तो रोजे कबूल नहीं होंगे।
जुमा अलविदा की तैयारियां छोटी ईद जैसी की गईं थीं। वक्त से पहले नमाजियों ने मसजिद की ओर रुख कर लिया। जामा मसजिद भी वक्त से पहले नमाजियों से खचाखच भर गई। नमाजियों की तादाद के सामने जामा मसजिद भी छोटी पड़ गई तो सड़क, मकानों की छतों और दुकानों तक में सफबंदी की गई। शहर काजी सैयद खुशनूद मियां ने जामा मसजिद में नमाज अदा कराई।
शहर इमाम मुफ्ती महबूब अली ने कहा कि जिन लोगों ने रोजे रखे, नमाज पढ़ी और कुरान सुना वो अल्लाह के नजदीक पहुंच गए। अगर किसी का रोजा नहीं है तो उसे भी इस मुकद्दस महीने का अहतराम करना चाहिए। रोजेदार के सामने खाना या पीना नहीं चाहिए। जामा मस्जिद के इमाम मौलवी फैजान खां ने जकात और सदका-ए- फितर की फजीलत बताई। मौैलवी ने कहा कि ईद की नमाज से पहले सदका-ए- फितर अदा नहीं किया तो अल्लाह तआला रोजे कबूल नहीं करेगा।
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हर मालदार पर जकात फर्ज है। जकात से माल पाक साफ हो जाता है। साथ में गरीबों का भी भला हो जाता है। इसलिए ईद की नमाज से पहले गरीब और मिस्कीनों को सदका-ए- फितर अदा करें। बाद में शहर काजी ने अमनो-अमान और कौम की तरक्की की दुआ कराई। शहर की और भी तमाम मसजिदों में नमाज अदा की गई। जुमा अलविदा पर तमाम लोगों ने अपने बच्चों का पहला रोजा रखवाया। उधर, जुमा अलविदा के मौके पर क्षेत्र की मसजिदों में हजारों लोगों ने नमाज अदा की। इस दौरान मुल्क और कौम की तरक्की के लिए दुआ की। जुमा अलविदा के मौके पर क्षेत्र के हकीमगंज, सींगनख़ेड़ा, हशमतगंज, हरैटा, लालपुर, नगलिया आकिल, बगड़खा, अलीनगर शुमाली, खिजरपुर, सैदनगर, अहमदनगर कलां, बैंजनी, बैंजना, काशीपुर, आंगा, ढक्का हरैटा, बगरौवा, मिलक हाशम, खिजरपुर, इमरता आदि गांवों में नमाज अदा की गई।
जुमा अलविदा की तैयारियां छोटी ईद जैसी की गईं थीं। वक्त से पहले नमाजियों ने मसजिद की ओर रुख कर लिया। जामा मसजिद भी वक्त से पहले नमाजियों से खचाखच भर गई। नमाजियों की तादाद के सामने जामा मसजिद भी छोटी पड़ गई तो सड़क, मकानों की छतों और दुकानों तक में सफबंदी की गई। शहर काजी सैयद खुशनूद मियां ने जामा मसजिद में नमाज अदा कराई।
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शहर इमाम मुफ्ती महबूब अली ने कहा कि जिन लोगों ने रोजे रखे, नमाज पढ़ी और कुरान सुना वो अल्लाह के नजदीक पहुंच गए। अगर किसी का रोजा नहीं है तो उसे भी इस मुकद्दस महीने का अहतराम करना चाहिए। रोजेदार के सामने खाना या पीना नहीं चाहिए। जामा मस्जिद के इमाम मौलवी फैजान खां ने जकात और सदका-ए- फितर की फजीलत बताई। मौैलवी ने कहा कि ईद की नमाज से पहले सदका-ए- फितर अदा नहीं किया तो अल्लाह तआला रोजे कबूल नहीं करेगा।
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हर मालदार पर जकात फर्ज है। जकात से माल पाक साफ हो जाता है। साथ में गरीबों का भी भला हो जाता है। इसलिए ईद की नमाज से पहले गरीब और मिस्कीनों को सदका-ए- फितर अदा करें। बाद में शहर काजी ने अमनो-अमान और कौम की तरक्की की दुआ कराई। शहर की और भी तमाम मसजिदों में नमाज अदा की गई। जुमा अलविदा पर तमाम लोगों ने अपने बच्चों का पहला रोजा रखवाया। उधर, जुमा अलविदा के मौके पर क्षेत्र की मसजिदों में हजारों लोगों ने नमाज अदा की। इस दौरान मुल्क और कौम की तरक्की के लिए दुआ की। जुमा अलविदा के मौके पर क्षेत्र के हकीमगंज, सींगनख़ेड़ा, हशमतगंज, हरैटा, लालपुर, नगलिया आकिल, बगड़खा, अलीनगर शुमाली, खिजरपुर, सैदनगर, अहमदनगर कलां, बैंजनी, बैंजना, काशीपुर, आंगा, ढक्का हरैटा, बगरौवा, मिलक हाशम, खिजरपुर, इमरता आदि गांवों में नमाज अदा की गई।