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ज्ञान और प्रज्ञान के लिए जानी जाती है हिंदुस्तान की सभ्यता : राज्यपाल
Mon, 16 Sep 2024 05:06 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Mon, 16 Sep 2024 05:06 AM IST
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रामपुर। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जो दिमाग से पैदा की हुई संस्कृति है वो लंबी चलती है, पैसे और ताकत से जो स्मृतियां पैदा होती हैं वे लंबे समय तक नहीं चलती हैं। हिंदुस्तान की संस्कृति लंबी चली है। यह दुनिया की प्राचीनतम संस्कृतियों में शामिल है, ये मान लीजिए कि इसकी बुनियाद रूहानियत पर है, इसकी बुनियाद आध्यात्मिकता पर है।
राज्यपाल रविवार को रजा लाइब्रेरी की ओर से रंगमहल में वैश्विक समन्वय एवं भारतीय विमर्श विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अरब इतिहासकारों के अनुसार दुनिया में पांच बड़ी संस्कृति सभ्यताएं हैं। ईरान अपनी शान-शौकत के लिए जाना जाता है, तुर्की अपनी बहादुरी के लिए, रोम अपनी खूबसूरती के लिए, चीन अपनी कौशल और दस्तकारी के लिए, यह इन चारों देशों की पहचान है। पांचवी सभ्यता जो ज्ञान और प्रज्ञान के संवर्धन के लिए दुनिया में जानी जाती है, वह हिन्दुस्तान की सभ्यता है। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने इतिहास का मानवीकरण किया और मानव का दिव्यकरण किया। इससे बड़ी और क्या प्रतिष्ठा होगी। उन्होंने कहा की हमारे यहां एक कर्म का सिद्धांत भी है। कर्म का सिद्धांत भारतीय संस्कृति में इतना मजबूत है कि उससे न तो भगवान बचते हैं और न अवतार बचते हैं। कोई भी कर्म के सिद्धांत से नहीं बच सकता है। जो दिमाग से पैदा की हुई संस्कृति है वह लंबा चलती है, पैसे और ताकत से जो स्मृतियां पैदा होती हैं वे लंबा नहीं चलती हैं। हिंदुस्तान की संस्कृति दुनिया की प्राचीनतम संस्कृतियों में शामिल है तो ये मान लीजिए कि इसकी बुनियाद रूहानियत पर है। इसकी बुनियाद आध्यात्मिकता पर है। इस अवसर पर सहकारिता राज्यमंत्री जेपीएस राठौर ने कहा कि हमारे देश में बहुत सी सांस्कृतिक धरोहर हैं और शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत बहुत अग्रणी था। रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की स्थापना के 250 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया जब विश्वविद्यालयों के नाम नहीं जानती थी, उस समय हम नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय चलाने का काम किया करते थे। भारत में ज्ञान का भण्डार और खजाना था हमारे पास, लेकिन हम भटक गए और दूसरे देश आगे निकलते चले गए। अब भारत फिर से उस गति को उस वैभव को प्राप्त करने की तरफ बढ़ रहा है। इस अवसर पर लाइब्रेरी के निदेशक डाॅ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि यदि आपने विद्या प्राप्त की है तो उस विद्या का आपको दान भी करना है।
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ये रहे मौजूद
रजा लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य नवाव मोहम्मद अली खान, पूर्व सांसद घनश्याम सिंह लोधी, भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज पप्पू, भारत भूषण गुप्ता, हरीश गंगवार, राधे श्याम वांसतेय, अज़हर इनायती, डाॅ. मुमताज अर्शी, डाॅ. जाफर अर्शी, निखत बी, डॉ. महमूद, मोहनलाल सैनी, मोहन सिंह लोधी, डॉ. किंश्वर सुल्ताना, डॉ. नफीस सिद्धकी, डॉ. अरुण कुमार, अशोक विश्नोई।
जन्नत यदि है तो लाइब्रेरी में ही है: राज्यपाल
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जमीन पर यदि जन्नत है तो लाइब्रेरी में ही है। रामपुर के नवाबों ने रजा लाइब्रेरी जैसी अनमोल धरोहर दी है। उन्होंने कहा कि बाकी बातों को लोग याद रखें न रखें, लेकिन रामपुर के नवाब परिवार ने जो धरोहर दी है, वह कभी भुलाई नहीं जा सकती है। रजा लाइब्रेरी में हिन्दी दिवस के मौके पर लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि जहांगीर का मानना था कि जमीन पर यदि जन्नत है तो वह कश्मीर में है,लेकिन उनका मानना है कि यदि जमीन पर जन्नत है तो वह लाइब्रेरी में है। रजा लाइब्रेरी देश की सबसे बेहतरीन लाइब्रेरी है। रामपुर के नवाब परिवार ने लोगों को जो अनमोल धरोहर दी है, उसको कभी भुलाया नहीं जा सकता। लोग यहां आकर ज्ञान की खोज करते हैं। शिक्षा के लिए सरकारों के साथ ही समाज को भी आगे आकर करना होगा।
राज्यपाल के आगमन के दौरान सुरक्षा के रहे कड़े बंदोबस्त
रामपुर। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के रामपुर आगमन के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहे। रजा लाइब्रेरी जाने वाले सभी मार्गों को सील कर दिया गया था। यहां पर भारी सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। किला परिसर को पुलिस के साथ ही सीआईएसएफ ने भी घेर रखा था। इसके अलावा जौहर अली रोड पर भी सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे।
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राज्यपाल रविवार को रजा लाइब्रेरी की ओर से रंगमहल में वैश्विक समन्वय एवं भारतीय विमर्श विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अरब इतिहासकारों के अनुसार दुनिया में पांच बड़ी संस्कृति सभ्यताएं हैं। ईरान अपनी शान-शौकत के लिए जाना जाता है, तुर्की अपनी बहादुरी के लिए, रोम अपनी खूबसूरती के लिए, चीन अपनी कौशल और दस्तकारी के लिए, यह इन चारों देशों की पहचान है। पांचवी सभ्यता जो ज्ञान और प्रज्ञान के संवर्धन के लिए दुनिया में जानी जाती है, वह हिन्दुस्तान की सभ्यता है। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने इतिहास का मानवीकरण किया और मानव का दिव्यकरण किया। इससे बड़ी और क्या प्रतिष्ठा होगी। उन्होंने कहा की हमारे यहां एक कर्म का सिद्धांत भी है। कर्म का सिद्धांत भारतीय संस्कृति में इतना मजबूत है कि उससे न तो भगवान बचते हैं और न अवतार बचते हैं। कोई भी कर्म के सिद्धांत से नहीं बच सकता है। जो दिमाग से पैदा की हुई संस्कृति है वह लंबा चलती है, पैसे और ताकत से जो स्मृतियां पैदा होती हैं वे लंबा नहीं चलती हैं। हिंदुस्तान की संस्कृति दुनिया की प्राचीनतम संस्कृतियों में शामिल है तो ये मान लीजिए कि इसकी बुनियाद रूहानियत पर है। इसकी बुनियाद आध्यात्मिकता पर है। इस अवसर पर सहकारिता राज्यमंत्री जेपीएस राठौर ने कहा कि हमारे देश में बहुत सी सांस्कृतिक धरोहर हैं और शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत बहुत अग्रणी था। रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की स्थापना के 250 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया जब विश्वविद्यालयों के नाम नहीं जानती थी, उस समय हम नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय चलाने का काम किया करते थे। भारत में ज्ञान का भण्डार और खजाना था हमारे पास, लेकिन हम भटक गए और दूसरे देश आगे निकलते चले गए। अब भारत फिर से उस गति को उस वैभव को प्राप्त करने की तरफ बढ़ रहा है। इस अवसर पर लाइब्रेरी के निदेशक डाॅ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि यदि आपने विद्या प्राप्त की है तो उस विद्या का आपको दान भी करना है।
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रजा लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य नवाव मोहम्मद अली खान, पूर्व सांसद घनश्याम सिंह लोधी, भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज पप्पू, भारत भूषण गुप्ता, हरीश गंगवार, राधे श्याम वांसतेय, अज़हर इनायती, डाॅ. मुमताज अर्शी, डाॅ. जाफर अर्शी, निखत बी, डॉ. महमूद, मोहनलाल सैनी, मोहन सिंह लोधी, डॉ. किंश्वर सुल्ताना, डॉ. नफीस सिद्धकी, डॉ. अरुण कुमार, अशोक विश्नोई।
जन्नत यदि है तो लाइब्रेरी में ही है: राज्यपाल
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जमीन पर यदि जन्नत है तो लाइब्रेरी में ही है। रामपुर के नवाबों ने रजा लाइब्रेरी जैसी अनमोल धरोहर दी है। उन्होंने कहा कि बाकी बातों को लोग याद रखें न रखें, लेकिन रामपुर के नवाब परिवार ने जो धरोहर दी है, वह कभी भुलाई नहीं जा सकती है। रजा लाइब्रेरी में हिन्दी दिवस के मौके पर लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि जहांगीर का मानना था कि जमीन पर यदि जन्नत है तो वह कश्मीर में है,लेकिन उनका मानना है कि यदि जमीन पर जन्नत है तो वह लाइब्रेरी में है। रजा लाइब्रेरी देश की सबसे बेहतरीन लाइब्रेरी है। रामपुर के नवाब परिवार ने लोगों को जो अनमोल धरोहर दी है, उसको कभी भुलाया नहीं जा सकता। लोग यहां आकर ज्ञान की खोज करते हैं। शिक्षा के लिए सरकारों के साथ ही समाज को भी आगे आकर करना होगा।
राज्यपाल के आगमन के दौरान सुरक्षा के रहे कड़े बंदोबस्त
रामपुर। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के रामपुर आगमन के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहे। रजा लाइब्रेरी जाने वाले सभी मार्गों को सील कर दिया गया था। यहां पर भारी सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। किला परिसर को पुलिस के साथ ही सीआईएसएफ ने भी घेर रखा था। इसके अलावा जौहर अली रोड पर भी सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे।