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इस्लाम के उसूलों पर चलकर बेहतर जिंदगी गुजारें
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Updated Wed, 14 Sep 2016 12:50 AM IST
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बारगाहे इलाही में झुके सिर
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ईदुल अजहा पर लाखों लोगों ने ईदगाह और मस्जिदों में दो रकअत नमाज अदा की। उलमा ने नमाज, हज और कुरबानी की अहमियत बयान की। मुल्क-कौम की तरक्की और अमनों अमान कायम रहने की दुआ को भी लाखों हाथ उठे। नमाज के बाद कुरबानी का सिलसिला शुरू हो गया।
हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अल्लाह के हुक्म पर बिना किसी हिचक के अपने प्यारे बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुरबानी देने के लिए तैयार हो गए थे। अल्लाह का हुक्म होते ही हजरत इब्राहीम अपने बेटे को अल्लाह की राह में कुरबान करने के लिए आबादी से दूर ले गए थे। हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने लख्ते जिगर की आंखों पर पट्टी बांधकर गले पर छुरी चला दी। लेकिन अल्लाह के हुक्म से हजरत
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इस्माइल की जगह दुम्बा जिबाह हो गया। लिहाजा हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अल्लाह के इम्तिहान में पास हो गए। अल्लाह को यह अदा बहुत पसंद आई।10 जिलहिज्ज को फज्र की नमाज के साथ खुशी का माहौल छा गया। मुसलमान नए और साफ सुथरे कपड़े पहनकर दो रकअत नमाज अदा करने के लिए घरों से निकल पड़े। काफी तादाद में लोगों ने ईदगाह की तरफ रुख किया। वक्त से पहले ही ईदगाह नमाजियों से खचाखच भर गई थी। ईदगाह में जगह कम पड़ी तो सड़कों पर ही सफबंदी की गई।
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शहर काजी सैयद खुशनूद मियां ने ईद की नमाज अदा कराई। उन्होंने तकरीर में नमाज, हज और कुरबानी की अहमियत व फजीलत बयान की। साथ ही इस्लाम के उसूलों पर चलकर बेहतर जिंदगी गुजारने की ताकीद की। नमाज के बाद शहर काजी ने खुतबा पढ़ा। बाद में कौम-मुल्क की तरक्की और अमन-चैन कायम रहने की दुआ कराई। सैफनी क्षेत्र में मंगलवार को ईद उल जहा की नमाज अकीदत से अदा की गई। कस्बा स्थित ईदगाह में कस्बे के शहर इमाम कारी अतीकुर्रहमान साहिब ने कस्बे के हजारों लोगों को ईद उल जुहा की नमाज अदा कराई। लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारक बाद देने का सिलसिला शुरू हुआ।