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रामपुर रियासत: मेहरुन्निसा बेगम के हिस्से की अचल संपत्ति को शत्रु संपत्ति में शामिल करने के लिए भारत सरकार करेगी विधि सम्मत निर्णय
Thu, 09 Dec 2021 02:02 AM IST
Vikas Kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 09 Dec 2021 02:02 AM IST
सार
जिला जज की कोर्ट ने रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति बंटवारे को लेकर सुनाए गए फैसले की एक प्रति और प्रस्तावित विभाजन योजना को सुप्रीम कोर्ट को भी भेजने के आदेश दिए हैं।
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रामपुर के नवाब का किला
- फोटो : amar ujala
विस्तार
नवाब खानदान की संपत्ति के बंटवारे को लेकर जिला जज की कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, उसमें पाकिस्तान की नागरिकता ले चुकीं एक पक्षकार मेहरुन्निसा बेगम की संपत्ति को शत्रु संपत्ति में दर्ज करने के संबंध में भारत सरकार को विधि सम्मत निर्णय लेते हुए कार्यवाही करने को कहा है। इसको लेकर सह अभिरक्षक शत्रु संपत्ति की ओर से कोर्ट प्रक्रिया के दौरान प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया था।
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नवाब संपत्ति बंटवारे की कोर्ट प्रक्रिया के दौरान सह अभिरक्षक शत्रु संपत्ति की ओर से शासकीय अधिवक्ता (सिविल) राजीव अग्रवाल के माध्यम से प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया था। जिसमें कहा गया था कि संपत्ति बंटवारे में प्रतिवादी संख्या सात (7) मेहरुन्निसा बेगम पत्नी एयर मार्शल अब्दुल रहीम के हिस्से में आ रही अचल संपत्ति को उनके पाकिस्तान नागरिक होने के कारण उस हिस्से को तत्कालीन अभिरक्षक शत्रु संपत्ति भारत सरकार द्वारा शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया था। इसलिए मेहरुन्निसा बेगम के हिस्से की अचल संपत्ति जो कि कुल संपत्ति का करीब 7.3 फीसदी है उसे अलग कर उस पर अभिरक्षक शत्रु संपत्ति भारत सरकार को कब्जा प्रदान करने का आदेश दिया जाए।
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शासकीय अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने बताया कि नवाब संपत्ति बंटवारे को लेकर कोर्ट ने दिए आदेश में पाकिस्तानी नागरिक मेहरुन्निसा बेगम के हिस्से की अचल संपत्ति को शत्रु संपत्ति में दर्ज करने के मामले में भारत सरकार को विधि सम्मत फैसला लेते हुए कार्यवाही के लिए आदेश दिए गए हैं।
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जिला जज की कोर्ट ने रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति बंटवारे को लेकर सुनाए गए फैसले की एक प्रति और प्रस्तावित विभाजन योजना को सुप्रीम कोर्ट को भी भेजने के आदेश दिए हैं।
क्या होती है शत्रु संपत्ति
-शत्रु संपत्ति अधिनियमभारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है। जिसके अनुसार शत्रु संपत्ति पर भारत सरकार का अधिकार होगा। पाकिस्तान से 1965 में हुए युद्ध के बाद 1968 में शत्रु संपत्ति (संरक्षण एवं पंजीकरण) अधिनियम पारित हुआ था। इस अधिनियम के अनुसार जो लोग बंटवारे या 1965 में और 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान चले गए और वहां की नागरिकता ले ली थी, उनकी सारी अचल संपत्ति 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दी गई। उसके बाद पहली बार उन भारतीय नागरिकों को संपत्ति के आधार पर ‘शत्रु’ की श्रेणी में रखा गया, जिनके पूर्वज किसी ‘शत्रु’ राष्ट्र के नागरिक रहे हों।