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Rampur News: डीएल में खेल, चालक पास और सिस्टम फेल

Wed, 02 Aug 2023 01:15 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Wed, 02 Aug 2023 01:15 AM IST
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Game in DL, driver pass and system fail
रामपुर। नियमों को ताक पर रखकर परिवहन विभाग आवेदकों को लाइसेंस जारी कर रहा है। वाहन चालकों को जिस परीक्षा से गुजरनी पड़ती है, उसके बारे में उन्हें पता ही नहीं है। इतना ही नहीं विभाग के अधिकारी भी जानबूझकर अंजान बने हुए हैं। 15 सालों से यह खेल पैसे के दम पर चल रहा है, तभी तो विभाग के पास अपना न तो ऑफिस है और न ही टेस्टिंग ट्रैक है। दोपहिया और चार पहिया वाहनों का लाइसेंस बनवाने वालों का न तो टेस्ट होता है न ही कोई जानकारी होती है। इसके बावजूद उनका धड़ल्ले से लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। आलम यह है कि 15 साल बीत गए, लेकिन विभाग को न तो छत नसीब हो सकी और न ही नियम कायदों में बांधा जा सका है।
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परिवहन विभाग में रोजाना 300-600 लाइसेंस बनवाने के लिए लोग आते हैं। आवेदन के बाद पहले लर्निंग लाइसेंस बनता है, उसके बाद स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए परीक्षण होता है कि आवेदक को गाड़ी चलानी आती है कि नहीं। इसके लिए प्रत्येक जगह आठ के अंक के आकार का ट्रैक बनाया जाता है, जिसमें गाड़ी चलवाकर दिखाई जाती है। पास होने के बाद ही लाइसेंस बनाया जाता है। मगर रामपुर में पिछले 15-20 साल से लाइसेंस की प्रक्रिया विभागीय नियम-कायदों के विपरीत चल रही है। यहां पर लाइसेंस बनवाने आने वाले आवेदकों के वाहनाें को सड़क पर ही खड़ा करवा दिया जाता है। कागजी कार्रवाई होती है और फिर लाइसेंस हाथ में आ जाता है। ऐसा नहीं कि यह आला अधिकारी नहीं देख रहे, लेकिन कोई इसके लिए प्रयास नहीं कर रहा है। आरोप यह भी है कि इसमें साफ तौर पर कमीशनखोरी का खेल चल रहा है, जिस वजह से एआरटीओ कार्यालय जमीन के लिए कोई खास जल्दी नहीं कर रहा है। शहर के आउटर में होने की वजह से अधिकारियों का भी ध्यान कम ही पड़ पाता है। ऐसे में मनमानी से अपना खेल चल रहा है।
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बिना ट्रैक एक साल में बन गए लाइसेंस

परिवहन विभाग रामपुर में अगर एक साल के भीतर ही बात करें तो अब तक यहां पर बिना परीक्षा के आवेदकों के 23 हजार के करीब लाइसेंस बन चुके हैं। ऐसे में यह लाइसेंस कैसे बने, प्रशिक्षण कहां हुआ, किसी को नहीं पता है।
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अधिकारी का तर्क, सड़क पर ही चलवा लेते हैं
परिवहन विभाग के एक अधिकारी से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सड़क पर ही चलवा लेते हैं। यहां पर अधिक समझ में आता है कि गाड़ी पर कितनी अधिक प्रैक्टिस है।


इतनी है लाइसेंस की फीस

यदि परिवहन विभाग में दोपहिया और चार पहिया वाहन के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं तो उसके लर्निंग के लिए 300 और पक्का लाइसेंस के लिए 1000 रुपये का शुल्क देना होता है।


लाइसेंस बनवाने के लिए दलाल लेते हैं 3000 रुपये
यदि विभाग में ऑनलाइन लाइसेंस न बनवाकर दलालों के जरिए लाइसेंस की प्रक्रिया अपनाते हैं तो उसके लिए कम से कम 3000 रुपये लगते हैं। यही नहीं एक दलाल से बातचीत करने पर पता चला कि यहां तो दूसरे शहर का लाइसेंस भी बन जाता है, उसके लिए यहां का आधार भी बन जाता है।


क्या होता है आठ के अंक का टेस्ट

-सबसे पहले आठ अंक जैसे ड्राइविंग ट्रैक पर ट्रायल होगा। इस पर गाड़ी सीधी और फिर पीछे लानी होगी। यहां 20 सेंसर लगे होंगे। जहां भी गलती होगी तो सेंसर बज उठेगा।

-ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक पर पहली बार करीब पांच फीट गाड़ी आगे ले जानी होगी। बढ़ाते समय गाड़ी जरा भी पीछे आई या गलत दिशा में गई तो सेंसर बज उठेगा।
-टेस्ट में गाड़ी को एक बार सीधा दूसरी बार पीछे के लिए आठ के अंक में पार्क करना होगा यदि कोई गड़बड़ी हुई तो लाइसेंस नहीं बनेगा।


लाइसेंस रूम में घूमते रहते हैं लोग
परिवहन विभाग में बेवजह अधिक भीड़ लगी रहती है। दफ्तर के अंदर लोग मोबाइल पर बात करते घूमते नजर आते हैं। यही नहीं लाइसेंस रूम में भी काफी अधिक लोग भरे रहते हैं, जिनका कोई काम नहीं है।



लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन है, सभी को नियम और कायदे के तहत लाइसेंस बनवाना चाहिए। इधर-उधर न जाकर सीधे ऑनलाइन आवेदन करें और जो फीस है, उसे भरेें। विभागीय दफ्तर और ट्रैक के लिए कई बार पत्र भेज चुके हैं।
-राजेश श्रीवास्तव, एआरटीओ, रामपुर
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