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भक्तों की लगी कतार, गूंजे घंटे और घड़ियाल
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Fri, 16 Oct 2015 11:38 PM IST
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नवरात्र के चौथे दिन देवी मां के कूष्मांडा स्वरूप का पूजन हुआ। भक्तों ने उदर की देवी को प्रसन्न करने के लिए शाक-सब्जी और अन्न का दान किया। मंदिरों में भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को देवी के मां कूष्मांडा स्वरूप का पूजन हुआ।
भक्तों ने मंदिर पहुंचकर मां को पुष्प-लौंग, शाक-सब्जी और मेवा अर्पित कर कपूर से आरती की। मंदिर पहुंचे देवी भक्तों ने शंख, घंटे और घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां का पूजन किया। पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि कूष्मांडा देवी सूर्य के समान तेजस्वी स्वरूप हैं। उनकी आठ भुजाएं हमें कर्मयोगी जीवन अपनाकर तेज अर्जित करने की प्रेरणा देती हैं।
वहीं, उनकी मधुर मुस्कान हमारी जीवनी शक्ति का संवर्धन करते हुए हमें हंसते हुए कठिन से कठिन मार्ग पर चलकर सफलता पाने को प्रेरित करती है। मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।
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कहते हैं कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। मंदिरों में देर शाम से रात तक भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के महालक्ष्मी मंदिर, गुरुयानी जी मंदिर, प्राचीन श्री दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर, दत्ताराम शिवालय, नर्मदेश्वर मंदिर में चहल-पहल रही।
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भक्तों ने मंदिर पहुंचकर मां को पुष्प-लौंग, शाक-सब्जी और मेवा अर्पित कर कपूर से आरती की। मंदिर पहुंचे देवी भक्तों ने शंख, घंटे और घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां का पूजन किया। पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि कूष्मांडा देवी सूर्य के समान तेजस्वी स्वरूप हैं। उनकी आठ भुजाएं हमें कर्मयोगी जीवन अपनाकर तेज अर्जित करने की प्रेरणा देती हैं।
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वहीं, उनकी मधुर मुस्कान हमारी जीवनी शक्ति का संवर्धन करते हुए हमें हंसते हुए कठिन से कठिन मार्ग पर चलकर सफलता पाने को प्रेरित करती है। मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।
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कहते हैं कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। मंदिरों में देर शाम से रात तक भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के महालक्ष्मी मंदिर, गुरुयानी जी मंदिर, प्राचीन श्री दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर, दत्ताराम शिवालय, नर्मदेश्वर मंदिर में चहल-पहल रही।