Azam Khan: 1980 के बाद पहली बार आजम खां किसी सदन के सदस्य नहीं, 10 बार जीता विधानसभा चुनाव
आजम खां ने पहली बार 2019 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और उसमें भी जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में सांसद रहते हुए उन्होंने रामपुर शहर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सपा नेता आजम खां के राजनीतिक कॅरिअर में 1980 के बाद यह पहला मौका है जब वह किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। 1980 से लेकर 27 अक्तूबर 2022 की अवधि के दौरान वह किसी न किसी सदन के सदस्य जरूर रहे हैं। नफरती भाषण देने के मामले में कोर्ट से तीन साल की सजा मिलने के बाद आजम खां की विधायकी रद्द हो गई है। अब वो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।
एएमयू छात्र संघ से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले आजम खां ने विधानसभा का पहला चुनाव 1977 में रामपुर शहर सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद आजम खां 1980 के विधानसभा चुनाव में फिर से उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद आजम खां ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सफलता के कीर्तिमान स्थापित करते गए।
हालांकि उनको 1996 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। उस वक्त कांग्रेस के प्रत्याशी अफरोज अली खां ने उनको हरा दिया था। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने उनको राज्यसभा में भेज दिया था। इसके बाद हुए विधानसभा के चुनाव में आजम खां ने फिर से जीत हासिल की और 2019 तक लगातार विधानसभा का चुनाव जीतते रहे। प्रदेश में जब-जब भी सपा की सरकार बनी, आजम खां उसमें कैबिनेट मंत्री रहे।
आजम खां ने पहली बार 2019 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और उसमें भी जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में सांसद रहते हुए उन्होंने रामपुर शहर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
नफरती भाषण देने के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) की कोर्ट ने 27 अक्तूबर को उनको तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद आजम खां की विधानसभा की सदस्यता सजा सुनाए जाने की तिथि से ही रद्द कर दी गई। अब आजम खां किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के मुताबिक वह फिलहाल चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। ऐसी स्थिति में 1980 के बाद यह पहला मौका है जब आजम खां किसी भी सदन के सदस्य नहीं है।
मुलायम सिंह यादव को जाता है आजम खां को आगे बढ़ाने का श्रेय
आजम खां ने राजनीति में जो सफलता हासिल की उसकी श्रेय तो उनकी अपनी मेहनत और जनता में पकड़ को जाता है। लेकिन दिवंगत सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने उनको आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुलायम सिंह यादव और आजम खां की दोस्ती के किस्से आज भी सियासी गलियारों में सुनाए जाते हैं। मुलायम सिंह यादव ने जब समाजवादी पार्टी बनाई थी तो आजम खां उसके संस्थापक सदस्यों में से थे।
एक साल तक सपा से दूर भी रहे हैं आजम खां
आजम खां सपा के संस्थापक सदस्यों में हैं। सपा से उनका साथ आज तक बना हुआ है। आजम के राजनीतिक कॅरिअर में एक वक्त ऐसा आया था जब उनको सपा से बाहर का रास्ता दिखा गया था। दरअसल 2009 के लोकसभा चुनाव में आजम खां नहीं चाहते थे कि जयाप्रदा रामपुर से चुनाव लड़ें। अमर सिंह के दबाव में पार्टी जयाप्रदा को टिकट दिया था। आजम खां की मुखालफत के बाद भी जयाप्रदा चुनाव जीत गईं। इसके बाद आजम खां को पार्टी से निकाल दिया गया। लेकिन इसके एक साल बाद ही आजम खां की पार्टी में वापसी हो गई। अमर सिंह और जयाप्रदा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।