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महिला प्रधान गायब, पतियों ने की अध्यक्षता
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Sat, 26 Dec 2015 11:18 PM IST
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ग्राम पंचायत की पहली बैठक में ही नियम कानून टूटते नजर आए। अधिकतर गांवों में खुली बैठक नहीं हो सकी। समितियों का गठन भी कागजों में कर लिया गया। कई गांवों में महिला प्रधान गायब रहीं। उनके स्थान पर उनके पति और रिश्तेदार बैठे।
शासन के निर्देशानुसार 26 दिसंबर को नवनिर्वाचित ग्राम पंचायत की पहली बैठक होनी थी। पहली बैठक में विकास का खाका तैयार कर समितियों का गठन होना था। नवनिर्वाचित ग्राम सभा की पहली हू बैठक में नियम-कानून तोड़ दिए गए। अधिकतर ग्राम पंचायतों में खुली बैठक नहीं हो सकी, क्योंकि एक सेक्रेटरी पर कई-कई गांवों का चार्ज है।
कई महिला प्रधानों के बजाय उनके पति और रिश्तेदारों ने अध्यक्षता कर अपनी मर्जी से समितियों का गठन कर लिया। महिला प्रधान मीटिंग से गायब रहीं। समितियों का गठन भी कागजों कर लिया गया, जबकि समितियां ही अहम मानी जाती हैं। समितियां की ही देखरेख में गांव का विकास कराया जाता है।
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इसका गठन सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। समितियों ने जिन सदस्यों को शामिल किया गया है उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं है।
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शासन के निर्देशानुसार 26 दिसंबर को नवनिर्वाचित ग्राम पंचायत की पहली बैठक होनी थी। पहली बैठक में विकास का खाका तैयार कर समितियों का गठन होना था। नवनिर्वाचित ग्राम सभा की पहली हू बैठक में नियम-कानून तोड़ दिए गए। अधिकतर ग्राम पंचायतों में खुली बैठक नहीं हो सकी, क्योंकि एक सेक्रेटरी पर कई-कई गांवों का चार्ज है।
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कई महिला प्रधानों के बजाय उनके पति और रिश्तेदारों ने अध्यक्षता कर अपनी मर्जी से समितियों का गठन कर लिया। महिला प्रधान मीटिंग से गायब रहीं। समितियों का गठन भी कागजों कर लिया गया, जबकि समितियां ही अहम मानी जाती हैं। समितियां की ही देखरेख में गांव का विकास कराया जाता है।
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इसका गठन सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। समितियों ने जिन सदस्यों को शामिल किया गया है उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं है।