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विधायक यूसुफ की बढ़ीं मुश्किलें
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:18 AM IST
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चुनाव आचार संहिता उल्लंघन और लोक संपत्ति निवारण अधिनियम में आरोपित बसपा विधायक यूसुफ अली की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने उनको अब सफाई देने का मौका समाप्त कर दिया है। इस मामले में प्रतिदिन न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
2007 में विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर स्वार से चुनाव लड़े यूसुफ अली के खिलाफ छह अप्रैल 2007 को नायब तहसीलदार संजय मिश्रा की ओर से आचार संहिता उल्लंघन के साथ लोकसंपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले में पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। कोर्ट में मामले की सुनवाई हर रोज चल रही है।
अभियोजन की ओर से गवाही पूरी हो चुकी है। विधायक यूसुफ अली की ओर से अपने बचाव में 76 गवाहों की सूची कोर्ट में पेश की गई थी। उन्होंने इन सभी को कोर्ट में तलब करने की मांग रखी थी। इनमें से अब तक केवल एक की गवाही पूरी हुई है।
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एसीजेएम प्रथम मनीष कुमार की कोर्ट ने विधायक के बचाव का अवसर समाप्त करते हुए अपने आदेश में कहा कि आरोपी को बार-बार चेतावनी जारी करने के बाद भी सहयोग नहीं किया जा रहा है। मुकदमे को एक साल से ज्यादा का समय हो गया है। अगली कार्रवाई के लिए तारीख निश्चित की है। सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधियों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरा कर लेने के आदेश जारी किए हैं।
2007 में विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर स्वार से चुनाव लड़े यूसुफ अली के खिलाफ छह अप्रैल 2007 को नायब तहसीलदार संजय मिश्रा की ओर से आचार संहिता उल्लंघन के साथ लोकसंपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले में पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। कोर्ट में मामले की सुनवाई हर रोज चल रही है।
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अभियोजन की ओर से गवाही पूरी हो चुकी है। विधायक यूसुफ अली की ओर से अपने बचाव में 76 गवाहों की सूची कोर्ट में पेश की गई थी। उन्होंने इन सभी को कोर्ट में तलब करने की मांग रखी थी। इनमें से अब तक केवल एक की गवाही पूरी हुई है।
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एसीजेएम प्रथम मनीष कुमार की कोर्ट ने विधायक के बचाव का अवसर समाप्त करते हुए अपने आदेश में कहा कि आरोपी को बार-बार चेतावनी जारी करने के बाद भी सहयोग नहीं किया जा रहा है। मुकदमे को एक साल से ज्यादा का समय हो गया है। अगली कार्रवाई के लिए तारीख निश्चित की है। सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधियों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरा कर लेने के आदेश जारी किए हैं।