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Rampur News: डायलिसिस के मरीजों को जोर का झटका दे रही बिजली

Wed, 18 Jun 2025 01:58 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Wed, 18 Jun 2025 01:58 AM IST
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Electricity is giving a strong shock to dialysis patients
रामपुर। गर्मी और तपिश के बीच बिजली संकट से मरीजों के इलाज को झटका लग रहा है। डायलिसिस के दौरान बिजली जाने से इलाज में बाधा आ रही है। बार-बार जनरेटर चलाने से डायलिसिस का चक्र टूट रहा है। ऐसे में मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दिनभर में महज 12 घंटे की बिजली सप्लाई मिल पा रही है। जबकि अन्य 12 घंटे जनरेटर का ही सहारा बना है।
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जिला अस्पताल की एक लाइन अलग से पनवड़िया से दी गई है। यहांं ट्रांसमिशन से सीधे अस्पताल को बिजली मिलती है जो कि डायलिसिस यूनिट में भी इस्तेमाल होती है। यूनिट में प्रत्येक दिन 35 मरीज अपना इलाज कराने के लिए यहां पर आते हैं। सुबह छह से रात 10 बजे तक मरीजों की डायलिसिस होती है। डायलिसिस की प्रक्रिया के बीच बिजली की बाधा लंबे समय से बनी हुई है।
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जिला अस्पताल को अलग से पनवडिया फीडर से बिजली सप्लाई दी जा रही है, लेकिन यह बिजली पर्याप्त नहीं मिल पा रही है। 24 घंटे की जगह महज 12 घंटे की सप्लाई मिल पा रही है। अन्य 12 घंटे के लिए जनरेटर चलाना पड़ रहा है। पिछली बार ज्यादा जनरेटर चलने पर यह गर्म पड़कर फुंक गया था और इसमें आग लग गई थी। इस बार भी इसका खतरा बना हुआ है। यही नहीं अभी हाल ही में बिजनौर में डायलिसिस यूनिट में अचानक बिजली जाने और जनरेटर में तेल न होने की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। ऐसे में बिजली की सप्लाई कटने से यहां पर भी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
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10 मिनट का बैकअप बचा रही जिंदगी

डायलिसिस यूनिट में मौजूदा समय में प्रक्रिया करते समय अचानक बिजली जाने के बाद जब तक जनरेटर की प्रक्रिया शुरू की जाती है, तब तक होमो डायलिसिस मशीन का 10 मिनट का बैकअप रहता है। जैसे ही जनरेटर चालू किया जाता है तो फिर दोबारा से डायलिसिस चालू की जाती है। यदि 10 मिनट का बैकअप न रहे तो बड़ी अनहोनी हो सकती है।



एक व्यक्ति की डायलिसिस में लगता चार घंटे का समय

डायलिसिस कराने आने वाले प्रत्येक मरीज को चार घंटे का समय लगता है। इस दौरान मरीज की डायलिसिस की जाती है। चार घंटे के बाद ही दूसरा मरीज को देखा जा सकता है।



10 में से नौ मशीन कर रही काम

अभी दो माह पहले डायलिसिस यूनिट की दो मशीनें खराब हो गई थी। मशीन ठीक करने के लिए दिल्ली से टेक्निशियन आए थे, जिसमें एक मशीन को ठीक कर गए थे, जबकि एक मशीन अभी भी खराब पड़ी हुई है। इससे अभी 10 बेड में से नौ बेड और नौ मशीन काम कर रही हैं।



30-40 लीटर खर्च हो रहा डीजल

मात्र 12 घंटे की बिजली सप्लाई मिलने के बाद जनरेटर पर आश्रित होना पड़ रहा है। ऐसे में इस जनरेटर की क्षमता 30-40 लीटर डीजल की है। इसका आधा तेल बिजली सप्लाई न होने पर रोजाना खर्च हो जा रहा है।




वर्जन

गर्मी में बिजली सप्लाई की दिक्कत रहती है, लेकिन हमारे पास जनरेअर की पूरी सुविधा है। डीजल भी एडवांस में मंगाकर रखा जाता है, जिससे इस पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। प्रत्येक मरीज की डायलिसिस कराई जाती है। किसी को भी पेंडिंग नहीं रखा जाता है। -देवाशीष मंडल, डायलिसिस यूनिट प्रभारी प्रदेश मुख्यालय लखनऊ
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