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आईएमए से जुड़े डॉक्टर रहे हड़ताल पर, ओपीडी ठप
अमर उजाला/ ब्यूरोरामपुर
Updated Sun, 31 Jul 2016 12:38 AM IST
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रामपुर में शनिवार को क्लीनिकल एक्ट का विरोध करते आईएमए के सदस्य डाक्टर।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में शनिवार को ओपीडी नहीं की। एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों ने मीटिंग कर एक्ट के दुष्प्रभावों पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा। जिसमें एक्ट से होने वाली परेशानियों का हवाला देते हुए इसे प्रदेश में लागू न करने की अपील की गई।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सक सिविल लाइंस स्थित साहनी लायंस आई हास्पिटल के सभागार में एकत्र हुए। यहां पर निवर्तमान अध्यक्ष डा. विशेष कुमार ने कहा कि क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू होने से चिकित्सक और मरीज दोनों को परेशानी होगी। एक्ट के बाद छोटे क्लीनिक के संचालन में दिक्कत होगी। क्योंकि इसके अनुसार हर क्लीनिक के चिकित्सक को अपनी विशेषज्ञता के साथ ही अन्य सभी बीमारियों के मरीजों को भी उपचार दिए जाने का प्रावधान है। साथ ही क्लीनिक पर पैथोलॉजी व अन्य जांचों की सुविधा भी होनी चाहिए। रेफर करने की स्थिति में मरीज को शिफ्ट करने की जिम्मेदारी भी चिकित्सक की होगी।
निवर्तमान सचिव डा. नितिन कुमार ने कहा कि एक्ट के लागू होने के बाद किराए की जमीन या भवन पर क्लीनिक संचालन नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए चिकित्सक को अपनी जमीन या भवन ही प्रयोग करना होगा। जिससे एमबीबीएस या अन्य चिकित्सा कोर्स करके आने के बाद डाक्टर के सामने अपना क्लीनिक खोलने में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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एक्ट के लागू होने से परेशानियों के चलते यदि छोटे क्लीनिक या अस्पताल बंद होंगे तो मरीजों को मजबूरन महंगे और बड़े कारपोरेट अस्पतालों में जाना पड़ेगा। मीटिंग के बाद सभी चिकित्सक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के माध्यम से एक ज्ञापन प्रदेश सरकार को भेजा। जिसमें एक्ट को प्रदेश में लागू करने से पहले एक बार पुन: अवलोकन की मांग की गई।
इस दौरान डा. राजीव अग्रवाल, डा. शहाबुद्ददीन, डा. पीके पुरोहित, डा. हिमांशु गुप्ता, डा. एसके जैन, डा. अनिल जैन, डा. नवीन, डा. अनुराग सिंघल, डा. संजय रस्तोगी, डा. अनिल कुमार, डा. संदीप, डा. विजय आदि चिकित्सक मौजूद रहे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सक सिविल लाइंस स्थित साहनी लायंस आई हास्पिटल के सभागार में एकत्र हुए। यहां पर निवर्तमान अध्यक्ष डा. विशेष कुमार ने कहा कि क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू होने से चिकित्सक और मरीज दोनों को परेशानी होगी। एक्ट के बाद छोटे क्लीनिक के संचालन में दिक्कत होगी। क्योंकि इसके अनुसार हर क्लीनिक के चिकित्सक को अपनी विशेषज्ञता के साथ ही अन्य सभी बीमारियों के मरीजों को भी उपचार दिए जाने का प्रावधान है। साथ ही क्लीनिक पर पैथोलॉजी व अन्य जांचों की सुविधा भी होनी चाहिए। रेफर करने की स्थिति में मरीज को शिफ्ट करने की जिम्मेदारी भी चिकित्सक की होगी।
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निवर्तमान सचिव डा. नितिन कुमार ने कहा कि एक्ट के लागू होने के बाद किराए की जमीन या भवन पर क्लीनिक संचालन नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए चिकित्सक को अपनी जमीन या भवन ही प्रयोग करना होगा। जिससे एमबीबीएस या अन्य चिकित्सा कोर्स करके आने के बाद डाक्टर के सामने अपना क्लीनिक खोलने में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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एक्ट के लागू होने से परेशानियों के चलते यदि छोटे क्लीनिक या अस्पताल बंद होंगे तो मरीजों को मजबूरन महंगे और बड़े कारपोरेट अस्पतालों में जाना पड़ेगा। मीटिंग के बाद सभी चिकित्सक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के माध्यम से एक ज्ञापन प्रदेश सरकार को भेजा। जिसमें एक्ट को प्रदेश में लागू करने से पहले एक बार पुन: अवलोकन की मांग की गई।
इस दौरान डा. राजीव अग्रवाल, डा. शहाबुद्ददीन, डा. पीके पुरोहित, डा. हिमांशु गुप्ता, डा. एसके जैन, डा. अनिल जैन, डा. नवीन, डा. अनुराग सिंघल, डा. संजय रस्तोगी, डा. अनिल कुमार, डा. संदीप, डा. विजय आदि चिकित्सक मौजूद रहे।