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Rampur News: छेड़खानी के मामले में मंडलीय टीम ने 19 कर्मियों के दर्ज किए बयान
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रामपुर। बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में परिषदीय स्कूल में शिक्षिका से हुई छेड़खानी के मामले में मंडलायुक्त द्वारा गठित मंडल स्तरीय टीम जांच करने बुधवार को विद्यालय पहुंची। टीम ने आरोपी प्रधानाध्यापक समेत 14 शिक्षक-शिक्षिकाओं व पांच रसोइयों के बयान दर्ज किए। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में करीब साढ़े छह घंटे जांच का कार्य चलता रहा। जांच अधिकारी अपर आयुक्त द्वितीय सर्वेश कुमार गुप्ता ने बताया कि उक्त प्रकरण में अगर कोई अन्य व्यक्ति अपने बयान दर्ज कराना चाहता है तो वह दो मई को उनके कार्यालय में दोपहर तीन बजे तक पहुंचकर बयान दर्ज करा सकता है। इसके बाद जांच रिपोर्ट मंडल आयुक्त को सौंप दी जाएगी।
12 अप्रैल को कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में परिषदीय स्कूल में शिक्षिकाओं का प्रधानाध्यापक से विवाद हो गया था। विवाद के दौरान शिक्षिकाओं ने प्रधानाध्यापक पर छेड़खानी करने का आरोप लगाया था। एक शिक्षिका ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ कोतवाली में छेड़खानी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। डीएम ने भी मामले की जांच कराई थी। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आरोपी प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया था।
बाद में शिक्षिकाओं ने मंडलायुक्त मुरादाबाद से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने अपर आयुक्त द्वितीय सर्वेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की। जांच कमेटी में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की सचिव अंजू लता, अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रीति सिंह, सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा मुरादाबाद बुद्ध प्रिय सिंह, उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी राजेश चंद्र गुप्ता को शामिल किया था। इस टीम ने स्कूल में पहुंचकर जांच की। इस दौरान एसडीएम हिमांशु उपाध्याय, तहसीलदार निश्चय कुमार, सीओ रवि खोखर, कोतवाली प्रभारी बलवान सिंह मौजूद रहे।
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ग्रामीणों को दो सौ मीटर दूर रखा
ग्रामीणों को भी विद्यालय से करीब 200 मीटर दूर रखा गया, ताकि जांच में किसी भी तरह का कोई भी व्यवधान पैदा न हो सके। एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि मंडल स्तरीय टीम ने शाम साढ़े पांच बजे तक आरोपी प्रधानाध्यापक, नौ महिला शिक्षक, पांच महिला रसोइयां, दो अनुदेशक, दो शिक्षामित्रों के बयान दर्ज किए हैं। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें जांच टीम से मिलने तक नहीं दिया। वह लोग जांच टीम के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाह रहे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन की सख्ती के चलते वह अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। उन्होंने कहा कि अगर जांच के दौरान कोई अन्याय हुआ तो वह लोग विद्यालय से अपने बच्चों को हटा लेंगे।
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12 अप्रैल को कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में परिषदीय स्कूल में शिक्षिकाओं का प्रधानाध्यापक से विवाद हो गया था। विवाद के दौरान शिक्षिकाओं ने प्रधानाध्यापक पर छेड़खानी करने का आरोप लगाया था। एक शिक्षिका ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ कोतवाली में छेड़खानी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। डीएम ने भी मामले की जांच कराई थी। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आरोपी प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया था।
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बाद में शिक्षिकाओं ने मंडलायुक्त मुरादाबाद से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने अपर आयुक्त द्वितीय सर्वेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की। जांच कमेटी में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की सचिव अंजू लता, अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रीति सिंह, सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा मुरादाबाद बुद्ध प्रिय सिंह, उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी राजेश चंद्र गुप्ता को शामिल किया था। इस टीम ने स्कूल में पहुंचकर जांच की। इस दौरान एसडीएम हिमांशु उपाध्याय, तहसीलदार निश्चय कुमार, सीओ रवि खोखर, कोतवाली प्रभारी बलवान सिंह मौजूद रहे।
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ग्रामीणों को दो सौ मीटर दूर रखा
ग्रामीणों को भी विद्यालय से करीब 200 मीटर दूर रखा गया, ताकि जांच में किसी भी तरह का कोई भी व्यवधान पैदा न हो सके। एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि मंडल स्तरीय टीम ने शाम साढ़े पांच बजे तक आरोपी प्रधानाध्यापक, नौ महिला शिक्षक, पांच महिला रसोइयां, दो अनुदेशक, दो शिक्षामित्रों के बयान दर्ज किए हैं। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें जांच टीम से मिलने तक नहीं दिया। वह लोग जांच टीम के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाह रहे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन की सख्ती के चलते वह अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। उन्होंने कहा कि अगर जांच के दौरान कोई अन्याय हुआ तो वह लोग विद्यालय से अपने बच्चों को हटा लेंगे।