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ग्रामीणों ने जागकर गुजारी रात
अमर उजाला ब्यूरो/बिलासपुर
Updated Sun, 31 Jan 2016 11:26 PM IST
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खूंखार जानवर की दहशत से धनुपुरा, मिलक मिर्जा और मिलक बादुल्ला के लोगों ने पूरी रात जागकर काटी। जानवर के हमले से लोगों में ऐसी दहशत बैठी है कि वो दिन में भी खेतों की ओर जाने से कतराते रहे। ये दहशत का ही आलम था कि गांव की गलियों में रविवार को भी सन्नाटा पसरा रहा।
वहीं, वन विभाग अधिकारियों ने खेतों में पाए गए पंजों के आधार पर इसे गुलदार बताया है। वनकर्मियों ने रविवार को पूरे दिन इसकी तलाश में कांबिंग की, लेकिन उसका पता नहीं चला। शनिवार शाम ग्रामीणों ने ग्राम धनुपुरा और मिलक मिर्जा के पास स्थित नधा नाले के पास किसी जानवर को देखा।
ग्रामीणों ने उसे भगाने की कोशिश की उसने हमला करके तीन लोगों को घायल कर दिया। पुलिस, वन विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर तीनों घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया था। ग्रामीणों के साथ पूरे क्षेत्र में कांबिंग करके जानवर को खोजने की कोशिश की, लेकिन रात तक उसका कहीं पता नहीं लग सका था।
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डीएफओ गजेंद्र सिंह और सीओ केमरी इंदु प्रभा सिंह भी कांबिग में मौजूद रहीं। वन विभाग ने रात में जंगल में पिंजड़ा भी रखवाया, लेकिन कोशिश सफल नहीं हुई। रात होने की वजह से जानवर के पदचिह्नों की पहचान भी नहीं हो पाई। पूरी रात ग्रामीणों ने दहशत के साये में काटी।
रविवार सुबह भी डीएफओ, रेंजर स्वार माजिद इब्राहीम, रेंजर रामपुर टीसी पंत आदि ने कांबिंग की, लेकिन नतीजा शून्य रहा। स्वार रेंजर ने बताया कि पैरों के निशान गुलदार से मिलते हैं। वो रातभर में 30-40 किलोमीटर तक दौड़ सकता है। संभावना है कि वो किसी दूसरे क्षेत्र में चला गया होगा। पिंजड़े को सुबह ही जिला मुख्यालय वापस भेज दिया गया।
दहशत के कारण तीनों गांव के लोग रविवार को खेतों में कारम करने भी नहीं गए। दहशत का आलम ये था कि तीनों गांवों में चहलकदमी भी कम देखी गई। ज्यादातर गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। शनिवार शाम से ही तीनों गांवों के लोग गुलदार की दहशत से अपने घरों में कैद हो गए। ग्रामीण पूरी रात एक-दूसरे से फोन करके हालचाल पूछते रहे।
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वहीं, वन विभाग अधिकारियों ने खेतों में पाए गए पंजों के आधार पर इसे गुलदार बताया है। वनकर्मियों ने रविवार को पूरे दिन इसकी तलाश में कांबिंग की, लेकिन उसका पता नहीं चला। शनिवार शाम ग्रामीणों ने ग्राम धनुपुरा और मिलक मिर्जा के पास स्थित नधा नाले के पास किसी जानवर को देखा।
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ग्रामीणों ने उसे भगाने की कोशिश की उसने हमला करके तीन लोगों को घायल कर दिया। पुलिस, वन विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर तीनों घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया था। ग्रामीणों के साथ पूरे क्षेत्र में कांबिंग करके जानवर को खोजने की कोशिश की, लेकिन रात तक उसका कहीं पता नहीं लग सका था।
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डीएफओ गजेंद्र सिंह और सीओ केमरी इंदु प्रभा सिंह भी कांबिग में मौजूद रहीं। वन विभाग ने रात में जंगल में पिंजड़ा भी रखवाया, लेकिन कोशिश सफल नहीं हुई। रात होने की वजह से जानवर के पदचिह्नों की पहचान भी नहीं हो पाई। पूरी रात ग्रामीणों ने दहशत के साये में काटी।
रविवार सुबह भी डीएफओ, रेंजर स्वार माजिद इब्राहीम, रेंजर रामपुर टीसी पंत आदि ने कांबिंग की, लेकिन नतीजा शून्य रहा। स्वार रेंजर ने बताया कि पैरों के निशान गुलदार से मिलते हैं। वो रातभर में 30-40 किलोमीटर तक दौड़ सकता है। संभावना है कि वो किसी दूसरे क्षेत्र में चला गया होगा। पिंजड़े को सुबह ही जिला मुख्यालय वापस भेज दिया गया।
दहशत के कारण तीनों गांव के लोग रविवार को खेतों में कारम करने भी नहीं गए। दहशत का आलम ये था कि तीनों गांवों में चहलकदमी भी कम देखी गई। ज्यादातर गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। शनिवार शाम से ही तीनों गांवों के लोग गुलदार की दहशत से अपने घरों में कैद हो गए। ग्रामीण पूरी रात एक-दूसरे से फोन करके हालचाल पूछते रहे।