फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   crpf center attack issue

फैसला आने तक ढाई सौ से अधिक तारीखे पड़ी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 01 Nov 2019 11:45 PM IST
विज्ञापन
crpf center attack issue
रामपुर।सीआरपीएफ आतंकी हमले के मुकदमे पर सरकार को करोड़ों रुपये खर्च हो गए। मुकदमे का फैसला होने तक ढाई सौ से अधिक तारीखें पड़ी। उसके साथ ही हर तारीख पर सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सरकार के दो लाख रुपये खर्च होते हैं।माह में दो बार मुकदमे की सुनवाई होने से हर माह चार लाख रुपये सुरक्षा पर खर्च हुए।एक साल में 48 लाख रुपये खर्च हुआ। 12 साल में यह रकम साढे पांच करोड़ तक पहुंच गई।
विज्ञापन

सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की रात आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हुए थे। एक रिक्शा चालक की भी मौत हुई थी। इस हमले की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनी गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री भी रामपुर आए थे। इस मामले में पहली गिरफ्तारी दस फरवरी 2008 को हुई थी।अगले दिन गिरफ्तार आतंकियों को कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया था।पाक आतंकी इमरान, फारूख और सबाउद्दीन को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। प्रतापगढ़ के कौसर खां, खजुरिया के बरेली के गुलाब खां और मुरादाबाद के जंग बहादुर को उनके घरों से पकड़ा था।इसके अलावा मुंबई के फहीम अंसारी और रामपुर के खजुरिया गांव के शरीफ खां की गिरफ्तारी रामपुर रोडवेज के पास से हुई थी।पुलिस ने विवेचना के बाद इन सभी के खिलाफ वर्ष 2010 में चार्जशीट दाखिल की थी। तब से मुकदमे की सुनवाई चल रही है।पहले सभी आरोपियों को रामपुर जिला कारागार में रखा गया था। बाद में सुरक्षा के लिहाज से इमरान, फारूख और सबाउद्दीन को लखनऊ जेल में ट्रांसफर कर दिया था।बचे पांचों को बरेली सेंट्रेल जेल भेज दिया।सभी को सुनवाई के लिए यहां कड़ी सुरक्षा में लाया जाता है। माह में मुकदमे की दो बार सुनवाई हो रही थी। इनकी पेशी के दौरान कड़े सुरक्षा प्रबंध रहते हैं। अधिकारी कई थानों की फोर्स और पीएसी जवानों से साथ मुस्तैद रहते हैं। इस पर बहुत खर्चा होता है। इस संबंध में सरकार की ओर से हाईकोर्ट में एप्लीकेशन लगाई गई थी।जिसमें सीआरपीएफ कांड की सुनवाई लखनऊ कोर्ट में ट्रांसफर कराने की सिफारिश की गई थी। इसके पीछे तर्क दिए थे कि आरोपियों को हर पेशी के दौरान सुरक्षा पर करीब दो लाख रुपये खर्च होते हैं। सरकार ने यह मुकदमा लखनऊ कोर्ट में ट्रांसफर करने और सभी आरोपितों को लखनऊ जेल में शिफ्ट करने का भी आग्रह किया था।आरोपियों के अधिवक्ता मोहम्मद जमीर रिजवी ने बताया कि मुकदमें की सुनवाई हर 14 दिन में होती थी । इस तरह माह में दो बार सुनवाई की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed