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फर्जी था फईम का ड्राइविंग लाइसेंस
अमर उजाला ब्यूरो / रामपुर
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:51 AM IST
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सीआरपीएफ आतंकी हमले के आरोपी फईम अरशद अंसारी का जहां पासपोर्ट फर्जी था, वहीं ड्राइविंग लाइसेंस भी अब फर्जी निकला। मुंबई के जिस समीर शेख के नाम से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया गया था। उस नाम का कोई व्यक्ति मुंबई में नहीं मिला। मुंबई के तीन लोगों ने कोर्ट में पेश होकर गवाही दी,जिसमें तीनों ने फईम को पहचाने से इंकार कर दिया। साफ कहा कि वह फईम को नहीं जानते। अब इस मामले की सुनवाई 30 जनवरी को होगी।
याद दिला दें कि 31 जनवरी 2007 की रात सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमला हुआ था। हमलें में सीआरपीएफ के 7 जवान शहीद हो गए थे जबकि एक रिक्शा चालक की जान गई थी। सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। हमले के आरोप में आठ लोगों की गिरफ्तारी की गई। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर का इमरान शहजाद व मोहम्मद फारूख,मुंबई के गोरे गांव का फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन उर्फ सबा, बरेली जिले के बहेड़ी का गुलाब खां, प्रतापगढ ़जिले के कुंडा का कौसर खां, मुरादाबाद के मूंढापांडे थाना क्षेत्र का जंगबहादुर उर्फ खान बाबा और खजुरिया का शरीफ उर्फ सुहेल शामिल हैं। इनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चल रहा है। सोमवार को मुकदमे की सुनवाई के लिए सभी आतंकियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही के लिए मुंबई निवासी वजीर आलम और उसके पड़ोसी मोहम्मद वसी व मंजर को कोर्ट में पेश किया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता हाजी जमीर रिजवी ने बताया कि तीनों ने फईम को पहचाने से इंकार कर दिया। साफ कहा कि वह उसको नहीं जानते। पुलिस फईम के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच करने के लिए मुंबई पहुंची थी,जहां समीर शेख के नाम से बनाए गए ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की तो पता चला कि समीर शेख के पिता के नाम के रूप में वजीर आलम का नाम दर्ज किया गया था,लेकिन जब पुलिस ने जांच की तो वजीर आलम तो मिला, लेकिन समीर शेख नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला।
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साथ ही वजीर ने ड्राइविंग लाइसेंस पर लगे फोटो को देखकर पहचानने से इंकार कर दिया। इस दौरान वजीर के पड़ोसी मोहम्मद वसी और मंजर ने भी फईम को पहचानने से इंकार कर दिया। इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह की, जिसका उन्होंने जवाब दिया। उनकी गवाही पूरी हो गई। सुनवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी को होगी।
याद दिला दें कि 31 जनवरी 2007 की रात सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमला हुआ था। हमलें में सीआरपीएफ के 7 जवान शहीद हो गए थे जबकि एक रिक्शा चालक की जान गई थी। सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। हमले के आरोप में आठ लोगों की गिरफ्तारी की गई। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर का इमरान शहजाद व मोहम्मद फारूख,मुंबई के गोरे गांव का फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन उर्फ सबा, बरेली जिले के बहेड़ी का गुलाब खां, प्रतापगढ ़जिले के कुंडा का कौसर खां, मुरादाबाद के मूंढापांडे थाना क्षेत्र का जंगबहादुर उर्फ खान बाबा और खजुरिया का शरीफ उर्फ सुहेल शामिल हैं। इनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चल रहा है। सोमवार को मुकदमे की सुनवाई के लिए सभी आतंकियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया गया।
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अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही के लिए मुंबई निवासी वजीर आलम और उसके पड़ोसी मोहम्मद वसी व मंजर को कोर्ट में पेश किया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता हाजी जमीर रिजवी ने बताया कि तीनों ने फईम को पहचाने से इंकार कर दिया। साफ कहा कि वह उसको नहीं जानते। पुलिस फईम के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच करने के लिए मुंबई पहुंची थी,जहां समीर शेख के नाम से बनाए गए ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की तो पता चला कि समीर शेख के पिता के नाम के रूप में वजीर आलम का नाम दर्ज किया गया था,लेकिन जब पुलिस ने जांच की तो वजीर आलम तो मिला, लेकिन समीर शेख नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला।
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साथ ही वजीर ने ड्राइविंग लाइसेंस पर लगे फोटो को देखकर पहचानने से इंकार कर दिया। इस दौरान वजीर के पड़ोसी मोहम्मद वसी और मंजर ने भी फईम को पहचानने से इंकार कर दिया। इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह की, जिसका उन्होंने जवाब दिया। उनकी गवाही पूरी हो गई। सुनवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी को होगी।