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जिंदा व्यक्ति को मृत करार दिए जाने की जांच शुरू
Updated Wed, 05 Jul 2017 10:43 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। तहसील चिड़गांव की खरशाली पंचायत के दिउची गांव निवासी धर्म दास को किसने राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित किया? उसकी पत्नी चंद्रमणि को विधवा घोषित करने का आरोपी कौन रहा? मामला सामने आने के बाद चिड़गांव तहसील मुख्यालय में वर्ष 1952 तक के भू अभिलेख व राजस्व रिकॉर्ड को खंगालना शुरू कर दिया है। अभी तक की जांच में धर्मदास का नाम भू-रिकॉर्ड में नहीं मिल रहा है।
धर्मदास को भू-राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित करने का मामला उजागर होने के बाद डीसी शिमला की ओर से तहसीलदार चिड़गांव को मामले की गंभीरता से जांच के आदेश किए गए हैं। जांच के दौरान अभी तक भू-अभिलेख में धर्मदास का कहीं पर नाम नहीं मिल रहा है। पंचायत रिकॉर्ड में उसकी जन्म तिथि से लेकर परिवार के बारह सदस्यों के नाम दर्ज हैं। रिकॉर्ड में चंद्रमणि को विधवा धर्म दास किसने लिखा, इसके पीछे का कारण अभी तक पता नहीं चला है। गौर हो कि अपने को जीवित साबित करने के लिए धर्म दास कई दिनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। उसके स्वर्गीय पिता साध का भी कहीं पर माल काजगात में नाम अंकित नहीं है।
ग्राम पंचायत खरशाली की ओर से 26 जून 2017 को धर्म दास के जीवित होने का प्रमाणपत्र जारी किया। 24 जून को पंचायत की ओर जारी परिवार रजिस्टर की नकल में भी धर्मदास जीवित दर्शाया गया है। धर्म दास का आरोप रहा कि भूमि की जमाबंदी निकालने पर पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में उसको मृत घोषित किया गया।
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तहसीलदार चिड़गांव मस्त राम कश्यप ने कहा कि धर्म दास का पूरा राजस्व एवं भू-अभिलेख रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। इसमें कहीं पर धर्म दास का नाम ही नहीं लिखा गया है। उसकी पत्नी को विधवा लिखने की गलती किससे हुई, इसकी जांच चल रही है।
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रोहडू। तहसील चिड़गांव की खरशाली पंचायत के दिउची गांव निवासी धर्म दास को किसने राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित किया? उसकी पत्नी चंद्रमणि को विधवा घोषित करने का आरोपी कौन रहा? मामला सामने आने के बाद चिड़गांव तहसील मुख्यालय में वर्ष 1952 तक के भू अभिलेख व राजस्व रिकॉर्ड को खंगालना शुरू कर दिया है। अभी तक की जांच में धर्मदास का नाम भू-रिकॉर्ड में नहीं मिल रहा है।
धर्मदास को भू-राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित करने का मामला उजागर होने के बाद डीसी शिमला की ओर से तहसीलदार चिड़गांव को मामले की गंभीरता से जांच के आदेश किए गए हैं। जांच के दौरान अभी तक भू-अभिलेख में धर्मदास का कहीं पर नाम नहीं मिल रहा है। पंचायत रिकॉर्ड में उसकी जन्म तिथि से लेकर परिवार के बारह सदस्यों के नाम दर्ज हैं। रिकॉर्ड में चंद्रमणि को विधवा धर्म दास किसने लिखा, इसके पीछे का कारण अभी तक पता नहीं चला है। गौर हो कि अपने को जीवित साबित करने के लिए धर्म दास कई दिनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। उसके स्वर्गीय पिता साध का भी कहीं पर माल काजगात में नाम अंकित नहीं है।
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ग्राम पंचायत खरशाली की ओर से 26 जून 2017 को धर्म दास के जीवित होने का प्रमाणपत्र जारी किया। 24 जून को पंचायत की ओर जारी परिवार रजिस्टर की नकल में भी धर्मदास जीवित दर्शाया गया है। धर्म दास का आरोप रहा कि भूमि की जमाबंदी निकालने पर पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में उसको मृत घोषित किया गया।
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तहसीलदार चिड़गांव मस्त राम कश्यप ने कहा कि धर्म दास का पूरा राजस्व एवं भू-अभिलेख रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। इसमें कहीं पर धर्म दास का नाम ही नहीं लिखा गया है। उसकी पत्नी को विधवा लिखने की गलती किससे हुई, इसकी जांच चल रही है।