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कोरोना का खौफ : स्कूल खुले, तो भी बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे अभिभावक
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सुमेधा राजपूत।
- फोटो : RAMPUR
रामपुर। कोरोना वायरस के फैलने की गति अपने चरम पर है। कन्टेंटमेंट जोन को छोड़कर दिन के समय में जनजीवन कुछ हद तक सामान्य होता दिख रहा है, लेकिन लोगों को डर इस बात का है कि कहीं उनके आसपास से गुजर रहे लोग कोरोना संक्रमित तो नहीं है। रोजगार के लिए तो लोग फिर भी जोखिम उठा रहे हैं, लेकिन शिक्षा के संबंध में लोगों की राय स्पष्ट है। वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कतई तैयार नहीं हैं। दरअसल, आशंका जताई जा रही है कि अब जुलाई में शिक्षण संस्थान खुल सकते हैं। अभिभावकों की मानें तो बच्चे स्कूल में न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर सकेंगे और न ही मास्क आदि का नियमित तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। आखिर स्कूल में लगातार उनकी निगरानी कौन करेगा? ऐसे में उन्हें स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। लिहाजा, बच्चों के स्कूल तभी खोले जाएं, जब कोरोना वायरस पूरी तरह से समाप्त हो जाए। पेश है अभिभावकों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट।
संभव है कि राज्य सरकार की ओर से शिक्षण संस्थान खोलने को लेकर निर्देश जारी हो जाएं, लेकिन शुरूआती कुछ माह में अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। क्योंकि, बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से कम नहीं है। इसलिए, घर बैठे ही जितनी पढ़ाई हो सकेगी, बच्चे को उतना पढ़ाएंगे। हमारा साफ मानना है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। फिर चाहे एक साल बर्बाद ही क्यों न हो जाए? क्योंकि, बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है।
- अंशिका अग्रवाल, अभिभावक
यदि एक जुलाई से स्कूल खुलते हैं तो यह खतरनाक निर्णय होगा। जब कोरोना अपने चरम पर है तो बच्चों को स्कूल भेजना सही नहीं है। वर्तमान में तमाम स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं और कुछ हद तक ये प्रक्रिया अच्छे और सुरक्षित ढंग से चल भी रही है। ऐसे में जब तक हालात सही नहीं होते, ऑनलाइन शिक्षा को ही बढ़ावा देना चाहिए और पढ़ाई इसी के माध्यम से चलती रहनी चाहिए। हम बच्चों को स्कूल भेजकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकते।
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- राजीव गुप्ता, अभिभावक
हमारे दो बच्चे हैं, जिसमें एक सातवीं और दूसरा पांचवीं में है। इन दिनों कोरोना का कहर चरम पर है। रामपुर में हो हर रोज कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से यह कतई उचित नहीं है कि जुलाई में स्कूल खुलें। कोरोना पूरी तरह से समाप्त होने पर ही हम अपने बच्चों को स्कूल भेजेंगे। सरकार को बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम देखने के बाद ही कुछ निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि स्कूलों में बच्चों का उतना ख्याल रखना संभव नहीं है।
- सुमेधा राजपूत, अभिभावक
कोरोना संक्रमण की वजह से सभी कामकाज प्रभावित हुए हैं। यह बात भी सही है कि बच्चों की पढ़ाई का काफी अधिक नुकसान हुआ है। हालांकि, ऑनलाइन क्लास के माध्यम से उन्हें पढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह उतना कारगर नहीं है, जितना क्लास में होता है। बावजूद, इसके हम अपने बच्चों को शुरूआत कुछ माह तक स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। क्योंकि, स्कूलों में न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सकता है और न बच्चे मास्क का प्रयोग कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें खतरा अधिक होगा।
- रमेश कुमार, अभिभावक
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संभव है कि राज्य सरकार की ओर से शिक्षण संस्थान खोलने को लेकर निर्देश जारी हो जाएं, लेकिन शुरूआती कुछ माह में अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। क्योंकि, बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से कम नहीं है। इसलिए, घर बैठे ही जितनी पढ़ाई हो सकेगी, बच्चे को उतना पढ़ाएंगे। हमारा साफ मानना है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। फिर चाहे एक साल बर्बाद ही क्यों न हो जाए? क्योंकि, बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है।
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- अंशिका अग्रवाल, अभिभावक
यदि एक जुलाई से स्कूल खुलते हैं तो यह खतरनाक निर्णय होगा। जब कोरोना अपने चरम पर है तो बच्चों को स्कूल भेजना सही नहीं है। वर्तमान में तमाम स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं और कुछ हद तक ये प्रक्रिया अच्छे और सुरक्षित ढंग से चल भी रही है। ऐसे में जब तक हालात सही नहीं होते, ऑनलाइन शिक्षा को ही बढ़ावा देना चाहिए और पढ़ाई इसी के माध्यम से चलती रहनी चाहिए। हम बच्चों को स्कूल भेजकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकते।
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- राजीव गुप्ता, अभिभावक
हमारे दो बच्चे हैं, जिसमें एक सातवीं और दूसरा पांचवीं में है। इन दिनों कोरोना का कहर चरम पर है। रामपुर में हो हर रोज कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से यह कतई उचित नहीं है कि जुलाई में स्कूल खुलें। कोरोना पूरी तरह से समाप्त होने पर ही हम अपने बच्चों को स्कूल भेजेंगे। सरकार को बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम देखने के बाद ही कुछ निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि स्कूलों में बच्चों का उतना ख्याल रखना संभव नहीं है।
- सुमेधा राजपूत, अभिभावक
कोरोना संक्रमण की वजह से सभी कामकाज प्रभावित हुए हैं। यह बात भी सही है कि बच्चों की पढ़ाई का काफी अधिक नुकसान हुआ है। हालांकि, ऑनलाइन क्लास के माध्यम से उन्हें पढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह उतना कारगर नहीं है, जितना क्लास में होता है। बावजूद, इसके हम अपने बच्चों को शुरूआत कुछ माह तक स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। क्योंकि, स्कूलों में न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सकता है और न बच्चे मास्क का प्रयोग कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें खतरा अधिक होगा।
- रमेश कुमार, अभिभावक

राजीव गुप्ता।- फोटो : RAMPUR

अंशिका जिंदल।- फोटो : RAMPUR

रमेश कुमार।- फोटो : RAMPUR