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एसिंप्टोमैटिक कोरोना कैरियर बनेंगे चुनौती, पर्याप्त जांच संसाधन व लॉकडाउन पालन से ही बचाव

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2020 08:06 PM IST
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corona , lockdown
एसिंप्टोमैटिक कोरोना कैरियर बनेंगे चुनौती, पर्याप्त जांच संसाधन व लॉकडाउन पालन से ही बचाव
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रामपुर। अदृश्य मौत के रूप में सामने आया कोरोना वायरस अब औैर भी घातक होता जा रहा है। उपचार से पहले ही इसकी नई जटिलता सामने आ रही हैं। एसिंप्टोमैटिक कैरियर के रूप में नए तरीके कोरोना संक्रमित सामने आ रहे हैं। ये ऐसे कोरोना संक्रमित हैं जिनमें संक्रमण के लक्षण सामने नहीं आते और वो अन्य लोगों को संक्रमित कर देते हैं। बुधवार को रामपुर में उत्तराखंड के पांच जमातियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है वो भी इसी श्रेणी के हैं। ---------------------------------------- कौन हैं एसिंप्टोमैटिक कोरोना कैरियर, कैसे करें बचाव --फोटो-- रामपुर। जिले के प्रतिष्ठत फिजीशियन डॉ. संदीप कुमार (एमबीबीएस, एमडी-मेडीसिन) कहते हैं कि एसिंप्टोमैटिक कोरोना कैरियर युवावस्था के संक्रमित होते हैं, जिनकी आयु 20 से 40 वर्ष के बीच होती है। इन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने के कारण कोरोना वायरस इनमें अपना असर नहीं दिखा पाता और निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी उसके लक्षण सामने नहीं आते हैं। लेकिन, ऐसे लोग बड़ी संख्या में अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। डॉ. संदीप कुमार कहते हैं कि इसीलिए प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर ही करीब 80 फीसदी तक मरीज जीवित रह जाते हैं, क्योंकि कोरोना वायरस अपनी जीवन अवधि का सर्किल पूरा कर लेता है लेकिन, मजबूत प्रतिरोधक क्षमता के कारण वो शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। इसीलिए आज भी कोरोना वायरस कोविड-19 का उपचार सिर्फ लक्षणों के आधार पर उन लक्षणों में सुधार के लिए ही हो रहा है, ऐसे में मजबूत प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इससे जंग जीत जाते हैं। ------------------------------------ संसाधन कम लिहाजा लॉकडाउन का करें पालन रामपुर। डॉ. संदीप पाल बताते हैं कि एसिंप्टोमैटिक कोरोना कैरियर के सामने आने के बाद अब चुनौती और बढ़ गई है। ऐसे में हर किसी आशंकित व सामान्य व्यक्ति की भी जांच आवश्यक हो जाती है, जिससे हर किसी में कोरोना वायरस न होने की पुष्टि हो सके। लेकिन, अभी इतने संसाधन नहीं है, इसलिए लोग लॉकडाउन का पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें। संभव हो तो घरों में भी उचित पर ही रहें और आइसोलेट तरीके से समय गुजारें। क्योंकि एसिंप्टोमैटिक कोरोना कैरियर की पुष्टि पैथोलॉजी रिपोर्ट के बाद ही हो सकती है और अभी सभी नागरिकों की जांच हो सके यह संभव नहीं है, हालांकि अधिक प्रभावित अन्य देशों में ऐसा ही किया जा रहा है। इसलिए लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंस का पूरी ईमानदारी व सख्ती से पालन करना जरुरी है। --------------------------- मलेरिया की दवा नहीं है हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन रामपुर। डॉ. संदीप कुमार कहते हैं कि हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन मलेरिया की दवा नहीं है। मलेरिया के उपचार में सिर्फ क्लोरोक्वीन का प्रयोग होता है जबकि हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन का प्रयोग गठिया के उपचार में होता है। लेकिन, इसका गलत या बिना चिकित्सीय परामर्श के प्रयोग कार्डिक टॉक्सीसिटी का कारण बन सकता है जिससे मौत भी हो सकती है। हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के साइड इफेक्ट भी अधिक हैं, इसका प्रयोग वायरस लोड कम करने के लिए होता है। चूंकि कोरोना वायरस का उपचार अभी तक संभव नहीं है और इसमें लक्षणों के आधार पर उपचार हो रहा है इसलिए अन्य दवाओं, डाइट के साथ इसका उचित मात्रा में प्रयोग किया जा रहा होगा।
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