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हम सबने ठाना, बच्चों को हर रोज है स्कूल जाना
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रामपुर। कोरोना महामारी के दौर में कमरों में और मोबाइल में कैद हो गई जिंदगी को एक बार फिर पटरी पर लाने के लिए बच्चे अभिभावक और विद्यालय तीनों मिलकर प्रयास कर रहे हैं। विद्यालय प्रशासन अभिभावकों को बता रहे हैं कि बच्चे में फिर से पहले की तरह लिखने-पढ़ने की आदत डालनी है तो उसे रोज विद्यालय भेजें। उधर अभिभावकों ने भी ठाना है कि बच्चों को रोज स्कूल भेजना है।
कोरोना काल में लॉकडाउन के समय बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए मोबाइल ही एक साधन था। विद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने का प्रयास किया गया था लेकिन इस प्रयास का यह प्रभाव हुआ कि बच्चों की किताब से पढ़ने और कॉपियों में लिखने की आदत ही छूट गई। जब ऑफलाइन कक्षाओं में पढ़ने का समय आया तो शिक्षकों ने देखा कि अधिकांश बच्चों का कॉपियों में काम पूरा ही नहीं था। कुछ बच्चे तो काम पूरा न हो पाने के कारण स्कूल आने को तैयार नहीं थे। बच्चों से वार्षिक परीक्षा में लिखा नहीं जा रहा था।
विद्यालय में अब तक यह रणनीति तैयार की है कि पहले बच्चों को लिखने की आदत डालेंगे। नए सत्र के पहले एक दो महीने बच्चों को पुरानी कक्षाओं को ही पढ़ाएंगे। कक्षाएं बढ़ने के साथ-साथ विषय भी बढ़ते जाते हैं, अब ऑनलाइन कक्षाओं में कई विषयों को आधारभूत चीजें स्पष्ट ही नहीं हो पाई थी। ऐसे में बच्चों को अगली कक्षा का समझाने में कठिनाई न हो इसके लिए कुछ माह पिछली कक्षा का पाठयक्रम ही दोहराया जाएगा।
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कोरोना काल में लॉकडाउन के समय बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए मोबाइल ही एक साधन था। विद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने का प्रयास किया गया था लेकिन इस प्रयास का यह प्रभाव हुआ कि बच्चों की किताब से पढ़ने और कॉपियों में लिखने की आदत ही छूट गई। जब ऑफलाइन कक्षाओं में पढ़ने का समय आया तो शिक्षकों ने देखा कि अधिकांश बच्चों का कॉपियों में काम पूरा ही नहीं था। कुछ बच्चे तो काम पूरा न हो पाने के कारण स्कूल आने को तैयार नहीं थे। बच्चों से वार्षिक परीक्षा में लिखा नहीं जा रहा था।
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विद्यालय में अब तक यह रणनीति तैयार की है कि पहले बच्चों को लिखने की आदत डालेंगे। नए सत्र के पहले एक दो महीने बच्चों को पुरानी कक्षाओं को ही पढ़ाएंगे। कक्षाएं बढ़ने के साथ-साथ विषय भी बढ़ते जाते हैं, अब ऑनलाइन कक्षाओं में कई विषयों को आधारभूत चीजें स्पष्ट ही नहीं हो पाई थी। ऐसे में बच्चों को अगली कक्षा का समझाने में कठिनाई न हो इसके लिए कुछ माह पिछली कक्षा का पाठयक्रम ही दोहराया जाएगा।
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