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विद्यालयों में लागू होगा चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम
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रामपुर। फर्जी नामांकन के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ हड़पने की कोशिश अब सफल नहीं होगी। फर्जीवाड़े पर अंकुश के लिए अब शासन ने विद्यालयों में चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की कवायद की है। इससे न सिर्फ हर बच्चे का रिकार्ड विभाग के पास होगा, बल्कि विद्यालय में उपस्थिति से लेकर पढ़ाई से जुड़ी दैनिक गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने बच्चों का डाटा यू-डाइस पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश जारी किया है। जिले के सरकारी सहायता प्राप्त, मदरसा, समाज कल्याण व मान्यता प्राप्त विद्यालयों में यह सुविधा जल्द लागू की जाएगी।
विद्यालयों में बच्चों के फर्जी नामांकन की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। कभी निजी विद्यालय के बच्चों का नाम चढ़ाकर योजनाओं का लाभ हड़प लिया जाता है तो कभी अन्य तरीके से फर्जीवाड़ा होता है। सरकारी स्कूलों के साथ मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों व मदरसों में अक्सर छात्रों के फर्जी नामांकन की शिकायतें आती हैं। इन शिकायतों के मद्देनजर विभाग ने एक पोर्टल पर बच्चे की समग्र जानकारी इकट्ठा करने की कवायद की है। विद्यालयों में फर्जी नामांकन रोकने और छह से 14 वर्ष तक के बच्चों की गतिविधियों को ट्रैक कर उनके रिकॉर्ड रखने में भी पोर्टल विभाग की सहायता करेगा। पोर्टल पर अपलोड बच्चों के ब्योरों को आधार कार्ड से भी लिंक किया जाएगा। बच्चों का डेटा ऑनलाइन होने से फर्जी नामांकन की शिकायतों पर नकेल कसी जाएगी। यह प्रणाली सभी विद्यालयों में अप्रैल से नए सत्र से लागू होने की संभावना है।
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विद्यालयों में बच्चों के फर्जी नामांकन की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। कभी निजी विद्यालय के बच्चों का नाम चढ़ाकर योजनाओं का लाभ हड़प लिया जाता है तो कभी अन्य तरीके से फर्जीवाड़ा होता है। सरकारी स्कूलों के साथ मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों व मदरसों में अक्सर छात्रों के फर्जी नामांकन की शिकायतें आती हैं। इन शिकायतों के मद्देनजर विभाग ने एक पोर्टल पर बच्चे की समग्र जानकारी इकट्ठा करने की कवायद की है। विद्यालयों में फर्जी नामांकन रोकने और छह से 14 वर्ष तक के बच्चों की गतिविधियों को ट्रैक कर उनके रिकॉर्ड रखने में भी पोर्टल विभाग की सहायता करेगा। पोर्टल पर अपलोड बच्चों के ब्योरों को आधार कार्ड से भी लिंक किया जाएगा। बच्चों का डेटा ऑनलाइन होने से फर्जी नामांकन की शिकायतों पर नकेल कसी जाएगी। यह प्रणाली सभी विद्यालयों में अप्रैल से नए सत्र से लागू होने की संभावना है।
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