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सावधान : मासूमों पर बढ़ रहा नेफ्रोटिक सिंड्रोम का खतरा
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रामपुर। बच्चों के पेट, चेहरे, आंखों के चारों तरफ होने वाली सूजन को कतई नजरअंदाज न करें। यह नेफ्रोटिक सिंड्रोम हो सकता है। यह किडनी से जुड़ी बीमारी है। जो दो माह से छह माह के बच्चों में देखी जाती है। समय पर इलाज न करने पर इस बीमारी से किडनी पूरी तरह खराब हो सकती है। जिला अस्पताल में हर साल 12 से 15 बच्चे इस बीमारी का इलाज कराने आते हैं।
नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग से किसी भी उम्र में शरीर में सूजन हो सकती है। मगर मुख्य रूप से यह बीमारी बच्चों में दिखाई देती है। इलाज कराने पर रोग नियंत्रण में आ सकता है। बाद में फिर सूजन दिखाई देने लगती है यह सिलसिला सालों तक चलता रहना नेफ्रोटिक सिंड्रोम की विशेषज्ञता है। लंबे समय तक बार-बार सूजन होने से यह रोग मरीज और उसके परिवारिक सदस्यों के लिए चिंताजनक रोग है।
सरल भाषा में कहा जा सकता है कि किडनी शरीर में छन्नी का काम करती है। इसके द्वारा शरीर में अनावश्यक उत्सर्जी पदार्थ, अतिरिक्त पानी पेशाब द्वारा बाहर निकाला जाता है। मगर, इस बीमारी में किडनी की छन्नी जैसे छेद बड़े हो जाने से अतिरिक्त पानी उत्सर्जी पदार्थ के साथ-साथ शरीर के लिए जरुरी प्रोटीन को भी बाहर निकाल देता है। जिस कारण प्रोटीन की मात्रा कम होने से सूजन आने लगती है।
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बीमारी के मुख्य लक्षण
- इस रोग की शुरुआत बुखार खांसी के बाद होती है
- आंखों के नीचे चेहरे पर सूजन दिखाई देती है
- सोकर उठने पर सूजन दिखाई देती है और शाम तक कम हो जाती है
- रोग के बढ़ने पर पेट फूल जाता है, पेशाब कम होती है
- पूरे शरीर में सूजन आ जाने पर वजन भी बढ़ जाता है
- कई बार पेशाब से झाग भी आना शुरू हो जाता है
- जिला अस्पताल में हर साल 12 से 15 बच्चे नेफ्रोटिक सिंड्रोम के आ जाते हैं। समय पर इलाज न कराने पर इस बीमारी में बच्चों की किडनी हमेशा के लिए खराब हो सकती है। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी ना करें।
- डॉ. राकेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ
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नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग से किसी भी उम्र में शरीर में सूजन हो सकती है। मगर मुख्य रूप से यह बीमारी बच्चों में दिखाई देती है। इलाज कराने पर रोग नियंत्रण में आ सकता है। बाद में फिर सूजन दिखाई देने लगती है यह सिलसिला सालों तक चलता रहना नेफ्रोटिक सिंड्रोम की विशेषज्ञता है। लंबे समय तक बार-बार सूजन होने से यह रोग मरीज और उसके परिवारिक सदस्यों के लिए चिंताजनक रोग है।
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सरल भाषा में कहा जा सकता है कि किडनी शरीर में छन्नी का काम करती है। इसके द्वारा शरीर में अनावश्यक उत्सर्जी पदार्थ, अतिरिक्त पानी पेशाब द्वारा बाहर निकाला जाता है। मगर, इस बीमारी में किडनी की छन्नी जैसे छेद बड़े हो जाने से अतिरिक्त पानी उत्सर्जी पदार्थ के साथ-साथ शरीर के लिए जरुरी प्रोटीन को भी बाहर निकाल देता है। जिस कारण प्रोटीन की मात्रा कम होने से सूजन आने लगती है।
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बीमारी के मुख्य लक्षण
- इस रोग की शुरुआत बुखार खांसी के बाद होती है
- आंखों के नीचे चेहरे पर सूजन दिखाई देती है
- सोकर उठने पर सूजन दिखाई देती है और शाम तक कम हो जाती है
- रोग के बढ़ने पर पेट फूल जाता है, पेशाब कम होती है
- पूरे शरीर में सूजन आ जाने पर वजन भी बढ़ जाता है
- कई बार पेशाब से झाग भी आना शुरू हो जाता है
- जिला अस्पताल में हर साल 12 से 15 बच्चे नेफ्रोटिक सिंड्रोम के आ जाते हैं। समय पर इलाज न कराने पर इस बीमारी में बच्चों की किडनी हमेशा के लिए खराब हो सकती है। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी ना करें।
- डॉ. राकेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ