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चलो रे डोली उठाओ कहार, पिया मिलन की रुत आई ...
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Fri, 13 May 2016 12:51 AM IST
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स्वार में डोली में दुल्हन को विदा करा कर ले जाते बाराती।
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‘चलो रे डोली उठाओ कहार पिया मिलन की रुत आई’ गीत सुनते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। अब फिर से बेटी को डोलियों में विदा करने चलन शुरू हो गया। मंगलवार की देर रात नगर से बारातियों की सुरक्षा में कहारों द्वारा डोली को उठाकर लोगों ने ले जाता देखा तो लोगाें को पुराने रस्मों रिवाज की याद ताजा हो गई।
आज के युग में लोग दूल्हा-दुल्हन को लाने के लिये हेलीकॉप्टर सहित लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं मंगलवार को तहसील क्षेत्र के गांव नरपतनगर निवासी हाजी खैराती के लड़के शहाबुद्दीन की बारात नगर के मोहल्ला रसूलपुर निवासी सलीम के यहां आई थी। जहां रस्मों रिवाज की समाप्ति के बाद विदाई का कार्यक्रम शुरू हुआ। तभी वर पक्ष ने कहारों सहित डोली को घर के दरवाजे पर खड़ा करा दिया। इससे लोग अचंभे में पड़ गए।
जानकारी करने पर वधू पक्ष के लोगों ने अपनी बेटी शाईस्ता की रुखसती डोली से ही करने का मन भी बना लिया। जैसे ही कहार डोली से दुल्हन को लेकर बारातियों की सुरक्षा में नगर से गुजरे तो लोगों को अपने पुराने रस्मों रिवाज याद आ गई। डोली को देख लोगों में चर्चा रही कि आज भी पुराने रस्मों रिवाज जिंदा है।
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आज के युग में लोग दूल्हा-दुल्हन को लाने के लिये हेलीकॉप्टर सहित लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं मंगलवार को तहसील क्षेत्र के गांव नरपतनगर निवासी हाजी खैराती के लड़के शहाबुद्दीन की बारात नगर के मोहल्ला रसूलपुर निवासी सलीम के यहां आई थी। जहां रस्मों रिवाज की समाप्ति के बाद विदाई का कार्यक्रम शुरू हुआ। तभी वर पक्ष ने कहारों सहित डोली को घर के दरवाजे पर खड़ा करा दिया। इससे लोग अचंभे में पड़ गए।
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जानकारी करने पर वधू पक्ष के लोगों ने अपनी बेटी शाईस्ता की रुखसती डोली से ही करने का मन भी बना लिया। जैसे ही कहार डोली से दुल्हन को लेकर बारातियों की सुरक्षा में नगर से गुजरे तो लोगों को अपने पुराने रस्मों रिवाज याद आ गई। डोली को देख लोगों में चर्चा रही कि आज भी पुराने रस्मों रिवाज जिंदा है।
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